एक बार मनुहार करना जरूर

एक बार मनुहार करना जरूर

एक बार मनुहार करना जरूर

नदी की तरह तुम बहना जरुर,
सुभावों को नमन करना जरूर।

मन का मीत जब मिल जाए,
एक बार मनुहार करना जरुर।

मनुजता की पहली पसंद प्रेम,
जीवन में सच्चा प्रेम करना जरुर।

गम का शोर बेहिसाब समुन्दर में,
नदी बनकर समुद्र से मिलना जरूर ।

झुरमुट की ओट से झांकती चाँदनी,
चाँद संग सितारों सा चमकना जरूर।

हवा मस्ती में महक प्रियतम की लाती,
खूशबू संग जागरण तुम करना जरूर।

मनुष्यों में होता आस्था प्रेम प्रकट,
प्रेम-प्रतिभा संग जीवन जीना जरूर।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • कलम बोलती है | Kalam bolti hai kavita

    कलम बोलती है ( Kalam bolti hai )   कलम बोलती है कलम बोलती है पूरा तोलती है पूरा तोलती है   गूंज उठती है मंचों पर प्यारी सी रसधार बने गीत गजल छंद मधुर महकती बयार बने   बुलंद होती मुखर वाणी कुर्सियां डोलती है कलम बोलती है कलम बोलती है   कांपते हैं…

  • शब्दों को गढ़ना सीख लिया | Shabdon ko Gadhana Seekh Liya

    शब्दों को गढ़ना सीख लिया ( Shabdon ko gadhana seekh liya )    रंग बदलती दुनिया में हमने भी बदलना सीख लिया। भाग दौड़ के जीवन में संभल के चलना सीख लिया। कुंदन बनने की खातिर ज्वाला में जलना सीख लिया। सुरभित सी पुरवाई में मादक बन बहना सीख लिया। सपने सच हो जाएंगे आंखों…

  • अभाव | Abhaav

    अभाव ( Abhaav )   अंधेरा न होता तो सवेरा न होता होता न दिन तो रात भी न होती यही तो है सच्चाई भी जीवन की होता सबकुछ तो कुछ भी न होता.. न होती किसी को जरूरत किसी की न किसी को किसी की पहचान होती न होती भूख किसी को न प्यास…

  • उसकी औकात | Kavita Uski Aukat

    उसकी औकात ( Uski Aukat ) करते हैं काम जब आप औरों के हित में यह आपकी मानवता है करते हैं आपके लिए लोग जब काम तो यह आपकी महानता है बड़े खुशनसीब होते हैं वो लोग जिन्हे फ़िक्र और की होती है बदनसीब तो बेचारे खुद के लिए भी कुछ कर नही पाते इच्छाएं…

  • अनहोनी | Kavita anhoni

    अनहोनी ( Anhoni )   अनहोनी सी घट रही अब दो देशों की लड़ाई में विश्वयुद्ध के कगार पे जग सदी जा रही खाई में   लड़ाकू विमान बमबारी विध्वंसक तबाही लाते महासमर होता तभी आपस में मतभेद हो जाते   जब युद्ध छिड़ा आपस में भीषण नरसंहार हुआ शहर के शहर खत्म हो गए…

  • वर्षा भैया भारी | Varsha bhaiya bhari

    वर्षा भैया भारी ( Varsha bhaiya bhari )   शाम  शाम  के  होन  लगी  है  वर्षा  भैया भारी, जगह जगह पे छिपन लगे है सबरे नर और नारी।   कहीं हवाये, कहीं है बिजली, कहूँ बरसो है भारी, एसो  मौसम  देख  देख  के  हमरो  दिल है भारी।   हो रहो हैरान किसान हमारो आंतक मच…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *