एक बार मनुहार करना जरूर

एक बार मनुहार करना जरूर

एक बार मनुहार करना जरूर

नदी की तरह तुम बहना जरुर,
सुभावों को नमन करना जरूर।

मन का मीत जब मिल जाए,
एक बार मनुहार करना जरुर।

मनुजता की पहली पसंद प्रेम,
जीवन में सच्चा प्रेम करना जरुर।

गम का शोर बेहिसाब समुन्दर में,
नदी बनकर समुद्र से मिलना जरूर ।

झुरमुट की ओट से झांकती चाँदनी,
चाँद संग सितारों सा चमकना जरूर।

हवा मस्ती में महक प्रियतम की लाती,
खूशबू संग जागरण तुम करना जरूर।

मनुष्यों में होता आस्था प्रेम प्रकट,
प्रेम-प्रतिभा संग जीवन जीना जरूर।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • पहला मिलन | Kavita Pahla Milan

    पहला मिलन ( Pahla milan )    मेंरे जीवन की अजीब कहानी मैं सपनों का राजा वह मेरी रानी आज भी याद मुझको वह आती वो भोली सी सूरत जो थी पुरानी याद आता मुझे उनसे पहला मिलन प्यारी-प्यारी वह सुहानी छुअन।। चोरी छुपके जब कभी हम मिलते बोल दो प्यार के वह होल्ले से…

  • प्यार जिंदगी है | Pyar Zindagi

    प्यार जिंदगी है ( Pyar zindagi hai )   परखते भी तो क्या परखते तुमको हैसियत और काबिलियत तुम्हारी।। दुनिया की तराजू में रख कर कभी किसी के प्रेम को तोला नहीं जाता।। तुमसे मिले तो जाना प्यार जिंदगी है अनुभव हुआ सुहाना तुमसे मिलकर , प्यार जिंदगी है, तुम प्रेम हो हमारी यह हर…

  • अति

    “अति” प्रत्येक अति बुराई का रूप धारण कर लेती है।उचित की अति अनुचित हो जाती है।। अति मीठे को कीड़ा खा जाता है।अति स्नेह मति खराब कर देता है।। अति मेल मिलाप से अवज्ञा होने लगती है।बहुत तेज हवा से आग भड़क उठती है।। कानून का अति प्रयोग अत्याचार को जन्म देता हैं।अमृत की अति…

  • मतलब भरा कैसा ये दौर | Kavita matlab bhara kaisa ye daur

    मतलब भरा कैसा ये दौर ( Matlab bhara kaisa ye daur )   नफरत का बाजार सजा अपनापन वो प्यार कहां उल्फत के सौदागर बैठे कर रहे खड़ी दीवार यहां प्रेम प्यार भाईचारा की सब टूट रही रिश्तो की डोर अपनापन अनमोल खोया घट घट बैठा स्वार्थ चोर मतलब भरा कैसा ये दौर घृणा बैर…

  • चलें आओ कन्हैया | Chale aao Kanhaiya

    चलें आओ कन्हैया ( Chale aao Kanhaiya )    चलें-आओ कन्हैया अब नदियाॅं के पार, सुन लो सावरियाॅं आज मेरी यह पुकार। देकर आवाज़ ढूॅंढ रही राधे सारे जहान, इस राधा पर करो कान्हा आप उपकार।। कहाॅं पर छुपे हो माता यशोदा के लाल, खोजते-खोजते क्या हो गया मेरा हाल। आ जाओ तुमको आज राधा…

  • नादान | Nadan

    नादान ( Nadan )    धूप से गुजरकर ही पहुंचा हूं यहांतक हमने देखी ही अपनी परछाई इसीलिए रहता हूं हरदम औकात मे अपनी और,कुछ लोग इसी से मुझे नादान भी कहते हैं ,…. अक्सर चेहरे पर बदलते रंग और हर रंग पर बदलते चेहरे से वाकिफ रहा हूं मैं देखे हैं उनके हस्र भी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *