वक्त की आज हार हो जाए

वक्त की आज हार हो जाए

वक्त की आज हार हो जाए

वक्त की आज हार हो जाए ।
कश्ती तूफां में पार हो जाए ।।१

आज दीदारे- यार हो जाए ।
ख़त्म यह इंतज़ार हो जाए ।।२

यह जो दुनिया हमें दगा देती ।
कुछ तो इसमें सुधार हो जाए ।।३

ज़ीस्त भर दोनों साथ साथ चलें
गर उन्हें ऐतबार हो जाए ।।४

इक नज़र देख लें जिधर मुड़कर ।
उनका ही इख्तियार हो जाए ।।५

प्यार इतना किया करो मुझसे ।
रूह तक बेकरार हो जाए ।।६

जैसे क़ुर्बान हूँ प्रखर उस पर
वो भी मुझ पर निसार हो जाए ।।७

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

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