एक ही रास्ता

एक ही रास्ता

“मम्मी जी, मैं बहुत दिनों से आपसे मन की बात कहना चाह रही थी।” पिंकी बोली।

“क्या बात है बेटा? बताओ मुझे। मुझसे बताने को भी इतना सोचना पड़ रहा है।” पिंकी की मम्मी बोली।

“मम्मी जी, आप पापा से कहो कि वह मेरे लिए इधर-उधर लड़का ना ढूंढे। मुझे एक लड़का पसंद है।”

“कौन है वह? तूने बताया क्यों नहीं अभी तक?”

“मम्मी जी, परिवार के सब सदस्य उसको जानते हैं। उसका नाम अतुल है।”

“कौन अतुल? हमारे गाँव का वही लड़का जिसके साथ तूने ग्रेजुएशन की है?”

“हाँ मम्मी जी, वही है। अतुल मुझे बहुत पसंद है। मैं उससे प्यार करती हूँ।”

“तू पागल तो नहीं हो गयी? तुझे अक्ल है भी या नहीं? सोचा है, क्या बोल रही है? आस-पड़ोस में रहने वाले लोग आपस में भाई बहन होते हैं। पड़ोस में ऐसे कैसे शादी हो सकती है?

तुम उससे कैसे प्यार कर सकती हो? बेटा, यह बड़ी गलत बात है। उसे भूल जा, वही हम सबके लिए अच्छा है। अगर मैंने अतुल का जिक्र तेरे पापा या भाई से भूलकर भी कर दिया तो वे तेरे साथ साथ मुझे भी जान से मार देंगे।

उन्हें यह सब बिल्कुल पसंद नहीं है। जहाँ तेरे पिता तेरा रिश्ता करेंगे, वहीं तुझे शादी करनी पड़ेगी। यह दिमाग में अच्छे से भर ले और अतुल को भूल जा। इसी में समझदारी भी है और दोनों की भलाई भी।” पिंकी की मम्मी ने फैसला सुनाते हुए कहा।

बेचारी पिंकी अपना सा मुँह लेकर रह गयी। कितने अरमान थे उसके अतुल से शादी करने के? लेकिन मम्मी भी उसका साथ ना देंगी, उसे क्या पता था?

पिंकी अपने परिवार की इकलौती संतान थी। उसके माता-पिता ने उसे बहुत प्यार और दुलार से पाला था। अतुल दूसरी कास्ट से ताल्लुक रखता था। एक गाँव के होने के बावजूद पिंकी और अतुल की मुलाकात कॉलेज में हुई थी, और जल्द ही वे एक दूसरे के प्यार में पड़ गए। पिंकी के माता-पिता चाहते थे कि पिंकी किसी अमीर लड़के से शादी करे, जो उनके परिवार को समृद्धि और सुरक्षा प्रदान कर सके।

मम्मी से दो टूक जवाब सुनकर पिंकी उदास हो गई। उसने फोन पर अतुल को मम्मी से हुई सारी बातों को बताया। अतुल और पिंकी तो एक दूसरे के होने की कसम खा चुके थे। इसलिए उन्होंने होशियारी से एक होने का प्लान बनाया ताकि साँप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे।

पिंकी ने उस दिन के बाद से अपनी मां से कभी भूलकर भी अतुल के बारे में कोई जिक्र ना किया। जब पिंकी को यह लगने लगा कि अगर वह कुछ दिन और घर पर रही तो.. निश्चित तौर पर उसके माता-पिता उसकी शादी कहीं और तय कर ही देंगे। यह सोचकर उसने अतुल से विचार विमर्श करके घर से भागने का प्लान बनाया।

पिंकी ने घर से जेवर चुराए और उनको बेचकर रुपयों का इंतजाम किया। अतुल और पिंकी दोनों ने अपना मोबाइल बेच दिया ताकि कोई उनके मोबाइल की लोकेशन ट्रेस न कर सके। बिना मोबाइल के वे भागकर सीधे इलाहाबाद पहुंचे और वहां उन्होंने वकील को पैसे देकर कोर्ट मैरिज कर ली।

इधर पिंकी और अतुल के मां-बाप उनके लिए बहुत परेशान रहे लेकिन मोबाइल न होने के कारण लोकेशन का कोई पता नहीं कर सके। पिंकी व अतुल 3 महीने तक घर से बाहर रहे और किसी की पकड़ में न आये। तीन महीने बाद अतुल ने अपने माँ बाप से बात की। अतुल ने उनको पिंकी से अपनी शादी के बारे में सब सच सच बता दिया।

अतुल के मां-बाप हर हाल में अपने बेटे को वापस पाना चाहते थे। वे पिंकी को अपनाने व बहू के रूप में स्वीकार करने को तैयार हो गए थे। यह जानकर अतुल व पिंकी ने गाँव में लौटकर जाना तय किया क्योंकि रुपये भी खत्म होने को थे।

अब सारी समस्या पिंकी के परिवार की थी। पिंकी के परिवार वालों ने अतुल पर लड़की को बहला फुसलाकर भगाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कर दिया था। वे हर हाल में अपनी लड़की को वापस पाना चाहते थे। उन्हें नहीं पता था कि अतुल और पिंकी ने कोर्ट मैरिज कर ली है।

पिंकी किसी भी कीमत पर अपने घर वापस जाना नहीं चाहती थी। अतः उसने अतुल व उसके परिवार के बचाव हेतु एक वीडियो बनाकर वायरल किया.. जिसमें उसने अपने मां-बाप के लिए एक मैसेज छोड़ा था। उस वीडियो में पिंकी बोल रही थी-

“मैंनें और अतुल ने एक दूसरे को अपना जीवनसाथी मानकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कोर्ट मैरिज कर ली है। एक होने का हमारे पास यही एक रास्ता बचा था। हमारे पास शादी के कागजात भी हैं। मैं अपनी मर्जी से अतुल से शादी करने को तैयार हुई हूँ। अतुल मुझे भगाकर नहीं लेकर गया, बल्कि मैं खुद उसके साथ अपनी मर्जी से गयी हूँ।

मैं बालिग हूँ। मैं सोच समझकर निर्णय लेने में सक्षम हूँ। मेरे पिता, चाचा और ताऊ गर्म दिमाग के व्यक्ति हैं। मुझे, मेरे पति और ससुराल पक्ष के लोगों को उनसे जान-माल का खतरा है। अगर मुझे, मेरे पति को कुछ होता है तो उसके जिम्मेदार पूर्ण रूप से मेरे मां-बाप, चाचा-ताऊ होंगे। मेरे ससुराल पक्ष वालों को परेशान ना किया जाए।”

यह वीडियो डालकर अपनी जान माल से बचाव हेतु पुलिस प्रोटेक्शन के साथ अतुल और पिंकी वापिस गांव आ गए और आराम से रहने लगे।

उधर पिंकी और उसके परिवार वालों ने पिंकी का वीडियो देखकर खुद को बहुत अपमानित महसूस किया। उन्हें पिंकी से ऐसी उम्मीद बिल्कुल न थी। कितने लाड़ प्यार से उन्होंने पिंकी को पाल पोसकर बड़ा किया था। लेकिन पिंकी का ऐसा भी रूप हो सकता था, इसका उन्हें अंदाजा न था। मात्र चंद दिनों के प्यार में उसने माँ बाप के प्यार व इज्ज़त के बारे में भी न सोचा।

पिंकी के माँ बाप समाज में, गांव में नजरे उठाकर चलने के काबिल ना रहे। वह घुट घुट के रहने लगे। भूले भटके जब उनकी नज़रे अतुल या पिंकी पर पड़ती तो उनका खून खौल उठता। लेकिन वह चाह कर भी उनका कुछ नहीं कर सकते थे, उनको मार नहीं सकते थे क्योंकि मारने से उनका खुद का परिवार मुसीबत में पड़ सकता था।

उन्होंने खुद जहर खाकर आत्महत्या करने का भी प्लान बनाया लेकिन बाद में यह प्लान केंसिल कर दिया क्योंकि उनकी मौत के बाद सब कुछ पिंकी को मिल जाता। वे यह हरगिज नहीं चाहते थे कि पिंकी उनके मरने के बाद उनकी संपत्ति पर मौज करे। उन्होंने पिंकी से सम्बंध विच्छेद करके, उसे उसके हाल पर छोड़ दिया था।

उसे उसके जीने मरने से कोई मतलब नहीं था। वे पिंकी को भूलना चाहते थे। उसकी नज़रों से हमेशा के लिए दूर हो जाना चाहते थे। अतः पिंकी के मां-बाप एक महीने बाद ही, गांव का अपना घर और जमीन बेचकर कहीं बहुत दूर वृद्धाश्रम में रहने लगे।

उन्होंने सम्पत्ति बेचकर प्राप्त रकम वृद्धाश्रम को दान दे दी थी। सिर्फ यही एक रास्ता था, जिससे दोनों सुकून से रह सकते थे। ऐसा क्यों होता है कि समाज की चिंता करते हुए माँ बाप अपनी इज्ज़त, बेइज्जती का ध्यान रखते हुए अपने बच्चों की खुशियों को दांव पर लगा देते हैं और फिर वही बच्चे बड़े होकर, प्रेम में पड़कर बागी बन जाते हैं और अपने माँ बाप के खिलाफ विद्रोह कर देते हैं।

वे अपने माँ बाप के उनके पैदा होने से लेकर जवानी तक के बच्चो को पालने पोसने में किये जाने वाले बलिदान, त्याग को भूल जाते हैं तथा अपने माँ बाप की परवाह, प्रेम, अपनापन आदि को भुलाकर चंद दिनों के प्यार को अपना सब कुछ मान लेते हैं।

वे ये भी नहीं सोचते कि माँ बाप पर इसका कितना बड़ा दुष्प्रभाव पड़ेगा, उन्हें कितना सदमा लगेगा? उन्हें कितना दर्द, दुःख होगा? वे समाज में खुद को कितना अपमानित महसूस करेंगे? लेकिन इस तरह की घटनाएं आजकल खूब घट रही हैं।

ये घटनाएं तभी बन्द हो सकती हैं जब हम अपनी सोच का स्तर उठाते हुए, समाज की परवाह न करते हुए, बच्चों की खुशी को ही अपनी खुशी समझें और उनकी जीवनसाथी चुनने की पसन्द को स्वीकार करें।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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