इंतज़ार किया | Emotional Intezaar Shayari

इंतज़ार किया

( Intezaar kia )

पूरा तेरा हरिक क़रार किया
हमने पतझड़ को भी बहार किया

उसके आगे किसी की क्या चलती
वक़्त ने जिसको ताजदार किया

ज़ख़्मी होकर भी मैं रहूँ ज़िन्दा
किस हुनर से मेरा शिकार किया

दुखती रग पर ही तुम ने हाथ रखा
हाय क्या मेरे ग़मगुसार किया

बात उसकी सदा ही रखने को
सारी बातों को दरकिनार किया

प्यासा लौटा था मैकदे से मगर
ख़ुद को मशहूर मयगुसार किया

हो गये हम किसी के फिर साग़र
तेरा कितना ही इंतज़ार किया

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

वो लाजवाब है | Ghazal Wo Lajawab Hai

Similar Posts

  • बस आज बस | Bas Aaj

    बस आज बस ( Bas aaj bas )    जद्दोजहद दुश्वारियां कुछ कश्मकश बस आज बस मैं गुनगुनाना चाहती बजने दो कोई साज़ बस। वो फ़िक्र रंजो गम ज़फा तन्हाइयों की बात को तुम छोड़ दो जो हैं ख़फा रहने दो अब नाराज़ बस। हो गुफ्तगू तो बात कुछ लग जाती है उनको बुरी हमने…

  • परी आसमान की | Pari Aasman ki

    परी आसमान की ( Pari aasman ki )    जब बात चल रही थी वहाँ आन-बान की लोगों ने दी मिसाल मेरे खानदान की मैं हूँ ज़मीन का वो परी आसमान की कैसे मिटेगी दूरी भला दर्मियान की देखूं मैं उसके नखरे या माँ बाप की तरफ़ सर पर खड़ी हुई है बला इम्तिहान की…

  • इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो

    इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करोइस कदर जाने की जल्दी है तो आया मत करो। जानते हम अहमियत अपनी तुम्हारे सामनेतो ये किस्से बेक़रारी के सुनाया मत करो। मुस्कुराने पे बहुत दिलकश लगा करते हो तुममहफिलों में बेवजह तब मुस्कुराया मत करो। एक दूजे के…

  • धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की

    धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की।खिल उठी हर कली मुह़ब्बत की। शम्अ़ नफ़रत की बुझ गई फ़ौरन।बाद जब भी चली मुह़ब्बत की। उड़ गए होश सब रक़ीबों के।बात ऐसी उड़ी मुह़ब्बत की। बाद मुद्दत के आज देखी है।उनके रुख़ पर हंसी मुह़ब्बत की। लाख शोअ़ले उठे बग़ावत के।पर न सूखी नदी…

  • होली में

    होली में किया जख़्मी उसी ने है मुझे हर बार होली मेंगुलो के रंग से मुझपर किया जो वार होली में नही रूठों कभी हमसे भुला भी दो गिले सारेतुम्हारे ही लिए लाएँ हैं हम यह हार होली में रही अब आरजू इतनी कि तुमसे ही गले लगकरबयां मैं दर्द सब कर दूँ सुनों इस…

  • तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी

    तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दीबुलंदी की हर इक निशानी लुटा दी ख़ुदा ने सँवारा सजाया चमन कोगुलों पे सभी मेहरबानी लुटा दी फ़िजाओं में नफ़रत का विष घोल कर केमुहब्बत की सारी कहानी लुटा दी ख़ज़ाना किया सारा खाली उन्होंनेकि हासिल हुई राजधानी लुटा दी करें रोज़ क़ुदरत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *