टूट जाता है

टूट जाता है | Ghazal Toot Jata Hai

टूट जाता है

( Toot Jata Hai )

बिना जज्बात के रिश्ता सभी का टूट जाता है
अगर मतभेद हो घर में सयाना टूट जाता है

खिलौना दिल बनाकर जो किया था पेश दिलवर को
कहा उसने तुम्हारा ये खिलौना टूट जाता है

नही है शौक दर्पण को कि पत्थर से कभी खेले
उसे मालूम है अस्तित्व उसका टूट जाता है

वफ़ा की जाति पर बिल्कुल भरोसा अब नही करना
उसी से हार कर सुन लो सयाना टूट जाता है

महल हमनें बनाएँ थे रहेंगे अब खुशी से हम
इसी विश्वास में दिल आज अपना टूट जाता है

भरोसा मत कभी करना किसी की बात पर भी तुम
यहाँ अपनों की बातों में ही अपना टूट जाता है

जिसे चाहा प्रखर ने है यहाँ पर जान से ज्यादा
उसी की बात से दिल अब हमारा टूट जाता है

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

मुहब्बत हो गई | Ghazal Muhabbat Ho Gayee

Similar Posts

  • बड़ा ही नेक | Bada hi Nek

    बड़ा ही नेक बड़ा ही नेक वो परिवार होगातभी अच्छा मिला संस्कार होगा कभी हमने न सोचा अपने घर मेंमुझे करना खड़ी दीवार होगा जमीं तो बाँट ली तुम सबने मेरीलवारिस अब हमारा प्यार होगा घरों की बात थी इतना न सोचायही कल भोर का अख़बार होगा अदब से बात जो करते हैं बच्चेउन्हीं का…

  • किसी के लिए | Kisi ke Liye

    किसी के लिए ( Kisi ke Liye ) कौन मरता जहाँ में किसी के लिएमर मिटे हम मगर दोस्ती के लिए तुग़लक़ी देते फ़रमान वो हैं सदामारे निर्दोष भी बंदगी के लिए ग़ैर की बाँह में प्यार को देखकरचाँद रोता रहा चाँदनी के लिए आज छाई उदासी चमन में बहुतकोई भँवरा मरा है कली के…

  • ग़लती हमारी थी | Galti Hamari thi

    ग़लती हमारी थी ( Galti hamari thi )   हुआ जो हादसा ए इश्क़ वो गलती हमारी थी खड़ी सरकार के हक़ में लड़ी आवाम सारी थी। लगेंगी तोहमतें हम पर बहुत ये इल्म़ था हमको वही अच्छे वही सच्चे हमें ये जानकारी थी। वफ़ा करके भी हम हरदम खटकते हैं नज़र में क्यूं यही…

  • बिठा तब है मज़ा

    बिठा तब है मज़ा पास मुझको तू बिठा तब है मज़ाजाम आँखों से पिला तब है मज़ा प्यार करता है मुझे तू किस तरहबात यह खुलकर बता तब है मज़ा बज़्म में आते ही छा जाता है तूयह हुनर मुझको सिखा तब है मज़ा डस रहीं हैं मुझको यह तन्हाइयांइनसे तू आकर बचा तब है…

  • हम रोते हैं | Hum Rote Hain

    हम रोते हैं ( Hum Rote Hain ) दुख में तन्हा हम रोते हैंसुख में शामिल सब होते हैं खार ही खार दिखे हैं हर सूहम हर सू जब गुल बोते हैं फ़सलों पर हक़ ग़ैर जतायेंखेत तो जब हमने जोते हैं लालच के रथ पर जो बैठेंअपना भी वो धन खोते हैं उनके आँसू…

  • हमको नसीब अपना यहाँ ग़मज़दा मिला

    हमको नसीब अपना यहाँ ग़मज़दा मिला हमको नसीब अपना यहाँ ग़मज़दा मिलाहर रोज़ इक नया ही हमें मसअला मिला उल्फ़त कहाँ थी अपनों से तेग़-ए-जफ़ा मिलाचाहत बहुत थी यार न हर्फ़-ए-दुआ मिला नालायकों को जब किया घर से है बेदखलअपना ही ख़ून हमको ये फिर चीख़ता मिला बूढ़े शजर को छोड़ के सब लोग चल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *