मुझे उड़ने दो

मुझे उड़ने दो | Women’s day special kavita

मुझे उड़ने दो

( Mujhe udne do : Hindi poem )

 

मैं तितली हूं..

मुझे उड़ने दो ।

 मुझे मत रोको,

मुझे मत टोको,

 मुझे नील गगन

 की सैर करने दो ।।

मेरे पंखों को मत कतरो,

मेरे हौसलों को मत तोड़ो,

 मेरी ख्वाहिशों को हौसला दो

 मुझे ऊंचाइयों को छूने दो ।

 मैं तितली हूं, मुझे उड़ने दो

 मुझे उड़ने दो, मुझे जीने दो ।।

लेखिका : अर्चना

                                                                   

यह भी पढ़ें :-

इंसान बनो | Insan bano kavita

Similar Posts

  • 222 वां आचार्य श्री भिक्षु चरमोत्सव दिवस

    222 वां आचार्य श्री भिक्षु चरमोत्सव दिवस प्रातः स्मरणीय क्रांतिकारी वीर भिक्षु स्वामी को आज उनके 222वें चरमोत्सव दिवस पर भाव भरा वंदन । महामना आचार्य श्री भिक्षु को शत – शत श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए चरमोत्सव दिवस पर मेरे भाव……..…. करे तन्मय बनकर भिक्षु स्वामी का स्मरण । इससे बढ़कर और कोई दूसरा नहीं…

  • उफ्फ ये गर्मी | Uff ye Garmi

    उफ्फ ये गर्मी ( Uff ye garmi )   तपन भरी धरा हुई, गगन हुआ बेहाल। उफ ये गर्मी कैसी, मौसम ने बदली चाल। बदल गई दिनचर्या सारी, बदला सारा खानपान। तन मन को शीतल करे, मधुर ठंडे पेय श्रीमान । कुदरत रंग बदलती, तेज पड़ रही है धूप। दोपहरी में लूएं चलती, पीओ जलजीरा…

  • हे गगन के चन्द्रमा | Kavita

    हे गगन के चन्द्रमा ( He gagan ke chandrama )   तुम हो गगन के चन्द्रमा, मै हूँ जँमी की धूल। मुझको तुमसे प्रीत है, जो बन गयी है शूल। तेरे बिन ना कटती राते, दिल से मैं मजबूर, हे गगन के चन्द्रमा, तू आ जा बनके फूल।   रात अरू दिन के मिलन सा,क्षणिक…

  • होली के दिन | Poem Holi Ke Din

    होली के दिन ( Holi ke din )   छोड़िए शिकवे गिले खटपट सभी होली के दिन। अच्छी  लगती  है  नहीं ये बेरुखी होली के दिन।। वो  हमारे  पास आकर कान में ये कह गये, आदमी को मानिए न आदमी होली के दिन।। चार  दिन  की  जिन्दगी ही पाई है हमने, सभी, इश्क के रंग…

  • स्वतंत्रता

    स्वतंत्रता   नभ धरातल रसातल में ढूंढ़ता। कहां हो मेरी प्रिये  स्वतंत्रता।। सृष्टि से पहले भी सृष्टि रही होगी, तभी तो ये बात सारी कहीं होगी, क्रम के आगे नया क्रम फिर आता है, दास्तां की डोर बांध जाता है।। सालती अन्तस अनिर्वचनीयता।।                        …

  • जिंदगी की किताब | Zindagi ki Kitaab

    जिंदगी की किताब  ( Zindagi ki kitaab )    एक दिन पढ़ने लगा जिंदगी की किताब, पलटने लगा पल पल के पन्नों को और समझने लगा बीती दास्तां। खोता गया अतीत के शाब्दिक भाव में, मन में उभरने लगा अक्षरता एक चित्र। लोग इकट्ठा थे बोल रहे थें बलपूर्वक जोर शोर से, हां हां…. थामो……..

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *