गजगामिनी

Kavita | गजगामिनी

गजगामिनी

( Gajagamini )

 

मन पर मेरे मन रख दो तो,मन की बात बताऊं।
बिना  तेरा  मै  नाम  लिए ही, सारी बात बताऊं।
महफिल में कुछ मेरे तो कुछ,तेरे चाहने वाले है,
तेरे बिन ना कटते दिन, हर रात की बात बताऊं।

 

संगेमरमर  पर  छेनी  की,  ऐसी  धार ना देखी।
मूरत जैसे सुन्दर रूप को, पहले कभी ना देखी।
कटि धनुष सी नैन कटारी,पल पल झपक रहे है,
थम थम चाल चले गजगामिनी,ऐसी नार ना देखी।

 

लट  घुघरालें  केशु  है काले, मन.गजरा पे मोहत।
एक  कोर  से दूजे कोर तक, काजल नैनन सोहत।
काम कमान सी दौंव भौंहे के मध्य में बिदिंया चंदा,
ऐसे  जैसे  रति   यौवन  में,  कामदेव  को  खोजत।

 

आचंल सिर से सरकर मानों, उन्नत अंग दिखाए।
सांसों की गति घटती बढती, शेर हृदय बंध जाए।
हे  मृगनयनी सुनों चंचला, तुम षोड़सी सुकुमारी,
उसपर अधरों के कंम्पन से, मेघ मचल कर आए।

 

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें : –

Lokgeet | चैती

Similar Posts

  • कह देना चाहिए | Kah Dena Chahiye

    कह देना चाहिए ( Kah dena chahiye )    जीवन में कह देना चाहिए हां बहुत प्यार करते हैं हम बच्चों को बहुत डांटते गुस्सा तो कभी चिल्लाते हैं हर काम पर उनके हम सदा कमियां निकालते हैं पर वह कब बड़े हो जाते हैं वह बिगड़ ना जाए इसलिए हम प्यार का इजहार करने…

  • शादी की सालगिरह | Shaadi ki Salgirah par Kavita

    शादी की सालगिरह ( Shaadi ki salgirah )    आज हमारी है साथियों वो शादी की सालगिरह, जोड़ी सलामत रहें हमारी दुआएं देना इस तरह। कभी ना उतरे हम दोनों का चढ़ा प्रेम का बुखार, खुशियों का यह सांसारिक मिलन रहें इस तरह।। ग़म का साया कभी न आएं खुशियों बीच हमारे, हर दिन नई…

  • दो दिन की जिंदगानी | Do Din ki Zindagani

    दो दिन की जिंदगानी ( Do din ki zindagani )    दो दिन की जिंदगानी प्यारे झूठा यह संसार है। तन बदन है माटी का प्यारे सांसे सभी उधार है। चंद सांसों का खेल सारा पंछी को उड़ जाना है। ये दुनिया है आनी जानी आगे और ठिकाना है। माटी के पुतले को फिर माटी…

  • और क्रंदन

    और क्रंदन     थकित पग में अथक थिरकन  और क्रंदन। आंसुओं का बरसा सावन और क्रंदन।।   हृदय से उस चुभन की आभास अब तक न गयी। सिंधु में गोते लगाये प्यास अब तक न गयी ।।   बढ़ रही जाने क्यूं धड़कन और क्रंदन । थकित बालक समझ मुझको धूल ने धूलित किया…

  • चक्र समय का चलता है | Kavita

    चक्र समय का चलता है ( Chakra ka samay chalta hai )   परिवर्तन नित निरंतर होता जग का आलम बदलता है नई सोच नई उमंगे भर चक्र समय का चलता हैं   सुख दुख जीवन के पहलू आंधी तूफान आते जाते जो लक्ष्य साध कर चलते व़ो मंजिलों को पा जाते   शनै शनै…

  • मोह | Kavita Moh

    मोह ( Moh ) दौड़ रहा वीथिका-वीथिका, सुख सपनों की मृगमरीचिका, थोड़ी देर ठहर ले अब तू, कर ले कुछ विश्राम। भले पलायनवादी कह दें, रखा नहीं कुछ मोह में। सारी दुनिया नाच रही है, जग के मायामोह में। मोह बिना अस्तित्व नहीं है, बात पुरानी नई नहीं है। सारा जगत इसी पर निर्भर, कितनों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *