Geet sang hamen rahana hai

संग हमें रहना है | Geet sang hamen rahana hai

संग हमें रहना है

( Sang hamen rahana hai )

 

हर मुश्किल संघर्षों को मिलकर हमें सहना है।
कुछ भी हो जाए जीवन में संग हमें रहना है।
संग हमें रहना है

 

प्रीत की धारा बह जाए प्रेम सुधारस हम बहाये।
प्यार के मोती लुटाए अपनापन अनमोल बढ़ाए।
हमारी हर खुशियों का दिल का विश्वास गहना है।
महक उठे ये प्रेम हमारा सदा संग हमें रहना है।
संग हमें रहना है

 

जिंदगी में प्रेम बरसे खुशियों के दीप जलाना है।
रूठ गए जो अपने हमसे जाकर उन्हें मनाना है।
मधुर मधुर गीत प्यारे मीठे वचनों को कहना है।
सद्भावों की गंगा उमड़े सदा संग हमें रहना है।
संग हमें रहना है

 

हार जीत की बात नहीं समझौता तकरार नहीं।
आपस की है समझ हमारी गठबंधन करार नहीं।
समझदारी सद्भावों से अब नफरतों को ढहना है।
प्रेम दीप जलाए दिलों में सदा संग हमें रहना है।
संग हमें रहना है

 

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

आंखे हंस दी दिल रोया | Kavita aankhe hansdi dil roya

Similar Posts

  • दी गर्दन नाप | Di Gardan Naap

    दी गर्दन नाप ( Di Gardan Naap ) चार चवन्नी क्या मिली, रहा न कुछ भी भान। मति में आकर घुस गए, लोभ मोह अभिमान।। तन मन धन करता रहा, जिस घर सदा निसार। ना जानें फिर क्यों उठी, उस आँगन दीवार।। नहीं लगाया झाड़ भी, जिसने कोई यार। किस मुँह से फिर हो गया,…

  • भूल गए सावन के झूले | Sawan ke Jhoole

    भूल गए सावन के झूले ( Bhool gaye sawan ke jhoole )    भूल गए सावन के झूले, भूल गए हर प्रीत यहां। भाईचारा प्रेम भूले, हम भूल गए हैं मीत यहां। भूल गए सावन के झूले मान सम्मान मर्यादा भूले, सभ्यता संस्कार को। रिश्ते नाते निभाना भूले, अतिथि सत्कार को। गांव की वो पगडंडी,…

  • हे, मनुज अब तो कुछ बोल | Kavita Hey Manuj

    हे, मनुज अब तो कुछ बोल ( Hey manuj ab Kuch to bol )   मसल रहे है, कुचल रहे है, पंख कलियों के जल रहे है, उजड़ रहा है यह हरा भरा, चमन अमन का डरा डरा, मदारी इशारो पे नचा रहा, यहां कागा शोर मचा रहा, कब तक नंगा नाच चलेगा, कब तक…

  • गिनती की सांसे | Poem Ginti ki Saanse

    गिनती की सांसे ( Ginti ki Saanse )   फूटल कौड़ी साथ में केहू न लेके जाई, लूटा मत दुनिया के सुना मेरे भाई। पाप और पुण्य कै ई बाटे दुई डगरिया, दुई दिन कै जिनगी बा, छूटी ई बजरिया। सोनवाँ जस देहियाँ के दीहैं लोग जलाई, लूटा मत दुनिया के सुना मेरे भाई। फूटल…

  • मुझे हक है | Poem Mujhe Haq Hai

     मुझे हक है ( Mujhe Haq Hai )   दिल के सारे राज जानूं कैसी दिल की धड़कन है। मनमंदिर में पूजन कर लूं दीपक ले मेरा मन है।   सुबह शाम जब देखूं दिल में होती धक धक है। तेरा प्रेम मेरी जिंदगी है प्रियतम मेरे मुझे हक है।   डगर डगर पे तेरे…

  • उसूल | Usool

    उसूल ( Usool )   हर हर मोड़ पर तुम्हें साथी नहीं मिलेंगे परिचितों के कुनबे में पहचान तुम्हें ही बनानी होगी कुछ के साथ तुम्हें चलना होगा और कुछ को अपने साथ चलाना होगा जन्म से पहले तुम्हें कौन जानता था शुरुआत तुम्ही ने की थी कभी मुस्कराकर कभी रोकर लोग जुड़ते गए तुमसे…

One Comment

  1. अद्भुत पढ़ने योग्य, वाकई ऐसी कृतियों की आज समाज को जरूरत है। सभी लेख पढ़ने योग्य है जो समाज के हर व्यक्ति को प्रस्तुत करता है। ऐसी अद्भुत लेखक और उनकी लेखन पद्यति को प्रणाम।👍👍👌👌

Leave a Reply to अमित शर्मा Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *