Shaan Tiranga

गीत तिरंगा के | Geet Tiranga Ke

गीत तिरंगा के

( Geet Tiranga Ke )

तीन रंग तिरंवा के शान बाटे गोरिया

तीन रंग तिरंवा के शान बाटे गोरिया,
हमार रंग आपन,
जान बाटे गोरिया, हमार,,,,।

तीन रंग तिरंगवा के दिहीं सलामी
एतना सतवलस अंगरेजवा हरामी
लागल एह में परान बाटे गोरिया, हमार,,,।

खुदी शेखर के बा जोड़ी दिआइल
ललना करेजवा के छोड़ी दिआइल
एके ना बहुते परमान बाटे गोरिया, हमार,,,,।

मटिया के गरब बढ़ावे के खातिर
आपन ललनवा पढ़ावे के खातिर
जियरा भइल हलकान बाटे गोरिया, हमार,,।

अपने जे फूटलन त अपने सँवरलन
कुँअर के तेगवा पर ढेरे हबकुरलन
छतिया प कइल नेहान बाटे गोरिया, हमार,,।
आज दिन आपन दलान बाटे गोरिया, हमार,

Vidyashankar vidyarthi

विद्या शंकर विद्यार्थी
रामगढ़, झारखण्ड

यह भी पढ़ें :-

बहिनिया पुकारे | Bahiniya Pukare

Similar Posts

  • आयल फगुनवाँ घरे-घरे | Bhojpuri Holi Geet

    आयल फगुनवाँ घरे-घरे! ( Ayal fagunwa ghare – ghare )    आयल फगुनवाँ घरे -घरे, चोलिया भीगै तरे -तरे। (2) होली है…….. बाजै लै ढोल औ बाजै मृदंग, उड़े ग़ुलाल लोग पीते हैं भंग। कोई न होश, न कोई बेहोश, मारे पिचकारी खड़े -खड़े। आयल फगुनवाँ घरे -घरे, चोलिया भीगै तरे -तरे। (2) होली है……..

  • जरल | Jaral Bhojpuri kavita

    ” जरल “ ( Jaral )    पहिले अपना के झांक तब दुसरा के ताक काहे तु हसतारे कवन कमी तु ढकतारे घुट-घुट के मरतारे दुसरा से जरतारे तोहरों में बा कुछ अच्छा ज्ञान खोज निकाल अउर अपना के पहचान मेहनत के बल पे आगे बढ़ जवन कमी बा ओकरा पुरा कर ना कर सकेले…

  • रोटि | Roti par Bhojpuri Kavita

    ” रोटि “ ( Roti )    बड़ी अजीब दुनिया बा रोटी उजर तावा करिया बा केहु पकावे केहु खाये कुर्सी पे ब‌इठ हाथ हिलाये जे पकाय जरल खाये सुन्दर रोटी कुर्सी के भाये खुन जरे पसिना आये तावा पे जाके सुन्दरता लाये जे खुन जराये पसिना लाये ओके खाली दुख भेटाये ।   कवि –…

  • समय | Samay par Bhojpuri Kavita

    ” समय ” भोजपुरी कविता ( Samay par Bhojpuri Kavita )   झकझोर देलऽक दुनिया ओके झोर के लूट लेलऽक मिठ ओ से बोल के अउर तुडलक ओके मडोड के आज हसेला लोग देख के ओके जोर से झकझोर देलक दुनिया ओके झोर के सब केहू ग‌इल ओके छोड़ के दरद ओके खायेला खोर-खोर के…

  • श्मशान | Shamshan par Bhojpuri Kavita

    ” श्मशान ” भोजपुरी कविता ( Shamshan )    चार कंधा पे पड़ाल एगो लाश रहे फूल ,पईसा के होत बरसात रहे राम नाम सत्य ह सब केहू कहत जात रहे केहु रोआत रहे केहू चिल्लात रहे भीड़ चलत रहे ओके साथ मे जे समाज से अलग रहे, आज हांथ में आग ले सब कुछ…

  • |

    पहचान | Pahchan par Bhojpuri Kavita

    पहचान ( Pahchan )    हम बिगड़ ग‌इल होती गुरु जी जे ना मरले होते बाबु जी जे ना डटले होते भ‌इया जे ना हमके समझ‌इते आवारा रूप में हमके प‌इते बहिन जे ना स्नेह देखाइत माई जे ना हमके खियाइत झोरी में ना बसता सरीयाइत आवारा रूप में हमके पाइत सुते में हम रहनी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *