Ghar ka Vaidya

अपनें घर का वैद्य | Ghar ka Vaidya

अपनें घर का वैद्य

( Apne ghar ka vaidya )

 

इन घरेलू नुस्खों को सब लोग आजमाकर देखना,
अपने अपने घर का वैद्य आप ख़ुद ही बन जाना।
हालात चाहें कैसे भी हो न बीमारियों से घबाराना,
सवेरे जल्दी-उठकर हल्के व्यायाम ज़रुर करना।।

खाॅंसी में काली-मिर्च और शहद मिलाकर चाटना,
जलने पर मैथीदानें का यह लेप पीसकर लगाना।
धूम्रपान छुड़ाने हेतु सौंप घी में सेक कर खिलाना,
उल्टी है तो लौंग-उबालकर पानी जिसे पिलाना।।

पेट के दर्द में अजवाइन-नमक मिलाकर के पीना,
अगर‌ बुखार पुराना है तो ये जीरा गुड़ संग खाना।
मोच आने पे गर्म पानी में नमक डालकर पी लेना,
जोड़ों के दर्द में अदरक रस गर्म कर-के लगाना।।

मूत्र-जलन में छोटी-इलायची चूर्ण पानी संग लेना,
चक्कर आनें पर सौंप में चीनी-डालकर ये खाना।
कब्ज़ दूर करने के लिए हरड़ खाकर दूध पी लेना,
माता निकलने पे लौंग चूर्ण शहद के संग खाना।।

अगर निमोनिया है तो हींग पानी में घोलकर लेना,
हिचकी रोग में अदरक डली मुॅंह में लेकर चूसना।
मौसम परिवर्तन में काली-मिर्च सब्जियों में खाना,
तोतलापन में दाल चीनी चबाकर के तुम चूसना।।

अगर सेहतमंद रहना है तो हॅंसते ज़रुर तुम रहना,
अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर रखना।
हॅंसने से होती है अंदरुनी हिस्से-पुर्जों की कसरत,
हॅंसकर ही हाई-बीपी डायबीटिज कंट्रोल करना।।

इन सबका ध्यान रखना क्यों कि पेट है ये अपना,
थोड़ा कम खा लेना लेकिन पेट को बढ़ने न देना।
इन होटल-ढाबों का खाना कोई कभी नही खाना,
क्यों कि नक़ली सामान है मिलावट का जमाना।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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