Ghazal Kya Lena

क्या लेना | Ghazal Kya Lena

क्या लेना

( Kya Lena )

 

है रौशनी तो मुझे तीरगी से क्या लेना
चमक यूँ क़ल्ब में है चाँदनी से क्या लेना

हर एक तौर निभाता हूँ दोस्ती सबसे
मुझे जहाँ में कभी दुश्मनी से क्या लेना

बुझा न पाये कभी तिश्नगी मेरे दिल की
तो अब भला मुझे ऐसी नदी से क्या लेना

जो मुश्किलों में मेरे काम ही नहीं आया
सहीह ऐसे मुझे मतलबी से क्या लेना

जो बादशाह बना बैठा है सिहासन पर
भला उसे किसी की मुफ़लिसी से क्या लेना

उतर न पाये कभी पढ़के शायरी दिल में
ऐ “मौज” ऐसी मुझे शायरी से क्या लेना

D.P.

डी.पी.लहरे”मौज”
कवर्धा छत्तीसगढ़

यह भी पढ़ें:-

बहू निकली है पुखराज | Ghazal Bahu

Similar Posts

  • बेवफ़ा ही सब मिले है | Bewafa hi Sab Mile Hai

    बेवफ़ा ही सब मिले है ( Bewafa hi sab mile hai )    है गिला उस दोस्ती से ? दिल भरा नाराज़गी से वो नज़र आया नहीं है आज गुज़रा उस गली से छोड़ दें नाराज़गी सब तू गले लग जा ख़ुशी से ये वफ़ा देती नहीं है मोड़ लें मुंह आशिक़ी से गुल उसे…

  • मगर दिल मे प्यार है | Magar Dil me Pyar Hai

    मगर दिल मे प्यार है ( Magar dil me pyar hai )         मेरी आखों मे है जलन, मगर दिल मे प्यार है। कलम उठाऊं या हथियार, दोनो मे धार है ।। कहते है कुछ और , करते है कुछ और सियासत बन गई देखो व्यापार है। कलम उठाऊं या हथियार, दोनो मे…

  • उलझे हुए हैं | Uljhe Hue Hain

    उलझे हुए हैं ( Uljhe Hue Hain ) अपने जज़्बात में उलझे हुए हैं इक मुलाकात में उलझे हुए हैं दर्द की तान, बसी है जिनमें, ऐसे नग़मात में उलझे हुए हैं चाँदनी की सी चमक है जिस में सब उसी गात में उलझे हुए हैं इससे हासिल तो नहीं होता कुछ, फिर भी सब…

  • देखना है | Dekhna Hai

    देखना है ज़ब्त अपना आजमाकर देखना है,उसे सितमगर को भुला कर देखना है। ज़र्फ़ की उसके मिसालें लोग देते,बस जरा गुस्सा दिला कर देखना है। चंद सिक्कों में सुना बिकती मोहब्बतपर कहाॅं बाजार जाकर देखना है। वह ख़ुदा रहता हमारे ही दिलों मेंबुग़्ज़ की ऐनक हटाकर देखना है। इश्क़-ए-दुश्वारी में लज्ज़त है अगर तो,फिर हमें…

  • सितम का वार है | Sitam ka Vaar Hai

    सितम का वार है ( Sitam ka Vaar Hai ) उसकी जानिब ही सितम का वार हैआदमी जो वक़्त से लाचार है जिसको रब की नेमतों से प्यार हैवो ख़िजाँ में भी गुल-ओ-गुलज़ार है जिसके दम से हैं बहारें हर तरफ़अब उसी की सिम्त हर तलवार है लुट रही सोने की चिड़िया जा ब जाआज…

  • क्या कहूँ | Kya Kahoon

    क्या कहूँ क्या कहूँ दिल ने मुझे उल्फ़त में पागल कर दियाथोड़ा में पहले से था उसने मुकम्मल कर दिया अपनी आँखों का सनम तूने तो काजल कर दियाआँख से छूकर बदन को तूने संदल कर दिया शह्र में चर्चे बड़े मैला ये आँचल कर दियाक्या कहें दिल रूह को भी मेरी घायल कर दिया…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *