Ghazal Sanam ka Haal

सनम का हाल | Ghazal Sanam ka Haal

सनम का हाल

( Sanam ka Haal )

बह्र : बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम
अरकान: मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन

मात्रा भार : 1222 1222 1222

 

हसीं चेहरा गुलाबी गाल अच्छा है,
हाथों तूने लिया रुमाल अच्छा है !

मचलती इस जवानी पर खिला यौवन,
तेरी जुल्फों का बिखरा हाल अच्छा है !

मेरे जैसे दिवाने को फ़साने का,
बुना तूने ये माया-जाल अच्छा है !

फ़िज़ाओं में नशा मौसम बहारों का,
सुना तेरे लिए ये साल अच्छा है !

पूछे कोई जो कह देता हूँ उनसे मैं,
मुहब्बत में सनम का हाल अच्छा है !

सजाया खुद को है दुल्हन की जैसे ये,
जोड़ा उसने जो पहना लाल अच्छा है !

कहा जाए जो भी कम है बड़ाई में,
मुहब्बत में कहे तो ख्याल अच्छा है !!

DK Nivatiya

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

जब इश्क का फूल खिलता है

Similar Posts

  • पहली दफ़ा | Pehli Dafa

    पहली दफ़ा ( Pehli Dafa )   जबसे तुम्हें देखा है जीने की हसरत हुई है, पहली दफ़ा ख़ुद से हमको मोहब्बत हुई है, सुन ज़रा तू ऐ मेरे हमराज़ ऐ मेरे हम-नशीं, तेरे आने से मुर्दा-ए-दिल में हरकत हुई है, तू पास है दिलमें जश्न-ए-बहारां हर रोज़ है, तेरे बिन तो फ़क़त ख़िजाँ की…

  • बेहुनर से लोग | Behunar se Log

    बेहुनर से लोग ( Behunar se log )    कितने अजीब आज के दस्तूर हो गये कुछ बेहुनर से लोग भी मशहूर हो गये जो फूल हमने सूँघ के फेंके ज़मीन पर कुछ लोग उनको बीन के मग़रूर हो गये हमने ख़ुशी से जाम उठाया नहीं मगर उसने नज़र मिलाई तो मजबूर हो गये उस…

  • सीखी है अय्यारी क्या

    सीखी है अय्यारी क्या सीखी है अय्यारी क्याइस में है फ़नकारी क्या सब से पंगा लेते होअ़क्ल गई है मारी क्या ऐंठे-ऐंठे फिरते होशायर हो दरबारी क्या लगते हो भारी-भरकमनौकर हो सरकारी क्या जाने की जल्दी में होकरली सब तय्यारी क्या तोपें खींचे फिरते होकरनी है बमबारी क्या सबको धोखा देते होअच्छी है मक्कारी क्या…

  • हमने देखी है | Hamne Dekhi Hai

    हमने देखी है ( Hamne Dekhi Hai ) वह्म जैसी कोई बला ही नहीं।इस मरज़़ की कहीं दवा ही नहीं। हमने देखी है हम बताएंगे।हिज्र जैसी कोई सज़ा ही नहीं। लाख कोशां रहे अ़दू लेकिन।क़द हमारा कभी घटा ही नहीं। ज़ुल्म ढाता है रात दिन फिर भी।उसकी नज़रों में ये ख़ता ही नहीं। अ़हदे ह़ाज़िर…

  • अजब दोस्ती के गजब चर्चे

    अजब दोस्ती के गजब चर्चे मुकद्दर से मिली छाह दोस्ती की lजिंदगी से बुलंद राह दोस्ती की ll मौत से भी छीन कर लाएँगे lदोस्त की दोस्ती सभ में जगाएँगे ll वफ़ा और दोस्ती का कोई मोल नहीं lजब पता चला तो ओ मेरे पास नहीं ll फिर से खड़ी हुई दुनिया मेरी lपहला दर्पण…

  • निगाहें मिलाकर | Ghazal Nigahen Mila Kar

    निगाहें मिलाकर ( Nigahen Mila Kar )   देखों ना सनम तुम यूँ नज़रे घुमाकर करों ना सितम यूँ निगाहें मिलाकर ! करोगी कत्ल तुम कई आशिको का, ये जलवें हसीं यार उनको दिखाकर ! घटाओं सी जुल्फ़े बनाती है कैदी, करोगी हमें क्या कैदी तुम बनाकर ! ज़रा सा ये दिल है इसे बख़्श…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *