Kavita Parampara

परंपरा | Kavita Parampara

परंपरा

( Parampara )

यह कैसी परंपरा आई, दुश्मन हो रहे भाई-भाई।
घर-घर खड़ी दीवारें घनी, मर्यादा गिर चुकी खाई।

परंपराएं वो होती, संस्कारों की जलती ज्योति थी।
अतिथि का आदर, खिलखिलाती जिंदगी होती थी।

होली दिवाली पर्व पावन, सद्भावो की धाराएं भावन।
गणगौर तीज त्योहार, खुशियों का बरसता सावन।

परंपराएं जीवंत रखती है, मान मर्यादा संस्कारों को।
पुरखों की आन बान शान, रीति रिवाज परिवारों को।

बड़ों के चरण छू लेना, गुरुजनों का आदर करना।
बुजुर्गों की सेवा भरपूर, आशीशों से झोली भरना।

पावन परंपराएं निभा लेना, सुख समृद्धि घर आती।
यश वैभव कीर्ति पताका, सारी दुनिया में लहराती।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

रमाकांत सोनी की कविताएं | Ramakant Soni Hindi Poetry

Similar Posts

  • भारत के | सजल

    भारत के ( Bharat ke ) तुम हो वीर सपूत महान भारत के बढाते हो तुम्हीं सम्मान भारत के ।।1। निछावर करते प्राण, मोह नहीं करते तुम विश्व-गुरु अभियान हो भारत के ।।2। मौत का कफन बांध लडते हो वीर तुम भारती-सपूत लाल महान भारत के ।।3। मातृभूमि की मिट्टी लगे सबसे अनमोल, कण-कण है…

  • मेरे भोले की महिमा | Poetry on Lord Shiva in Hindi

    मेरे भोले की महिमा ( Mere bhole ki mahima )   जो दाता हैं सब लोकों के, मैं क्या उनका गुणगान करूं। मैं तुच्छ जीव, में अभिमानी, मैं बस शिव का ही नाम जपूं। हे नीलकंठ ,हे विश्वेश्वर, तुम आदि ,अनंत अनंता हो। है आपसे ही सारी सृष्टि, प्रभू आप ही इसके रचयिता हो। हे…

  • ढलने लगी धीरे-धीरे जवानी

    ढलने लगी धीरे-धीरे जवानी ढलने लगी धीरे-धीरे जवानीबदलने लगी धीरे-धीरे कहानीभरोसा दिलों का अब घटने लगापिघलने लगी धीरे-धीरे रवानी।। बुढ़ापा बदन पर छाने लगाचांद सा चेहरा मुरझाने लगाचेहरे पर दिखती नही कोई रौनकसचमुच बुढ़ापा अब आने लगा।। वो मौसम दिखे ना फिजाएं दिखेहरी भरी दिलकश हवाएं दिखेदिखता नहीं है जुनून दिल में कोईनजरों में अब…

  • कोई तो है | Koi to Hai

    कोई तो है (मां पर कविता)    मन में जीवन में जीवन भर सदा के लिए दिल में बसी,                कोई तो है।   हर एक दुख में दर्द में सामने खड़ी हो जाती है ममता की मरहम लिए और हवा की सांसों सी सहला जाती है वह…..                 कोई तो है।  …

  • हमने पढने पर कब रोक लगाई है

    हमने पढने पर कब रोक लगाई है     हमने पढने पर कब रोक लगाई है। कपड़े सही कर लो इसीलिए तो ड्रेस लगाई है।।   मैं नहीं कहता कि पश्चिम की कल्चर छोड़ दे। बस जरा खुले तन पर तू ओड ले।।   आपत्ति नहीं है हमें तेरे जींस पर ,बस तू उसको फुल…

  • मेरा परिचय | Sumit ka Parichay

    मेरा परिचय ( Mera Parichay )   सुमित मानधना ‘गौरव’ नाम है, व्यापार करना मेरा मूल काम है। लेखक शायर कवि हूँ मैं बाय प्रोफेशन, कहानी शायरी कविता लिखना है पैशन। पैरोडी सोंग्स भी मैं अक्सर बनाता हूँ, स्टैंड अप कॉमेडी से सबको हँसाता हूँ । एक्टिंग व राइटिंग के ऐप्स रहते मेरे संग है,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *