Glaani

ग्लानि | Glaani

ग्लानि

( Glaani ) 

 

दूरी मे बढ़ न जाए और दूरी
करें प्रयास खत्म करने का
होगा कल का वक्त और ही
करें कोशिश आज को बदलने का

बढ़ने न दो जख्म को बातों से
यादों को नासूर न होने दो कभी
उठे न दीवार की गिर ही न पाए
कुछ जगह जोड़ की भी रहे कभी

संभव है न हों गलत आप भी
संभव है न हो गलत वह भी
गैर बातें भी होती हैं दरार की वजह
संभव है हो किसी बात का वहम भी

सूखे पेड़ भी हो जाते हैं हरे भरे
सुखी जड़ों में हरियाली नही आती
निकल भी आए सूरज भोर मे तो
कुहासों मे उसकी लाली नही आती

सोचिए जरा देखकर भी कभी
किसे क्या मिला है अपनों से अलग हो
सिसकता है सम्मान भी हृदय का
ग्लानि तो होती ही है जब ऐसा वक्त हो

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

मुश्किल है | Mushkil Hai

Similar Posts

  • एकांत | Ekant

    एकांत ( Ekant ) यह एकांत जो हमें ,हमसे मिलाता है ।यह एकांत जो हमें ,जीना सिखाता है ।यह एकांत जो हमें ,शक्तिशाली बनाता है ।यह एकांत जो हमारे ,गुणों को बाहर लाता है ।यह एकांत जो हमारे ,ह्रदय में चैन लाता है ।और धीरे धीरे यह ,हमारे जीवन का ,महत्वपूर्ण भाग बन जाता है…

  • फुटपाथ | Footpath par kavita

    फुटपाथ ( Footpath )   सड़क के दोनों ओर, होती एक फुटपाथ। पैदल चलना हमे, राह अपनाइए।   नीति नियम से चले, जिंदगी की जंग लड़। फुटपाथ पे जो आए, ढांढस बताइए।   धन दौलत का कभी, मत करना गुमान। महलों से फुटपाथ, दूर ना बताइए।   फुटपाथ की जिंदगी, संघर्ष भरा पहाड़। मेहनत के…

  • बापू से गुहार | Bapu se Guhar

    बापू से गुहार ( Bapu se guhar ) प्यारे बापू आज अगर तुम इस युग में जिंदा होते।हम जैसे निष्क्रिय लोगों के बीच में तुम जिंदा होते ।देख के सारी चाल कुचालें तुम बापू,निश्चय ही हम सब से तुम शर्मिंदा होते । 1 आओ बापू अब फिर से तुम भारत में आओ।आज के नेताओं को…

  • नवरात्रि पर्व (चैत्र) सप्तम दिवस | Chaitra Navratri Parv

    नवरात्रि पर्व (चैत्र) ( Navratri Parv ) सप्तम दिवस भुवाल माता का स्मरण सदा साथी इस जग में कोई दूसरा न साथी है । भुवाल माता पर श्रद्धा मानो दीपक में है यदि स्नेह भरा तो जलती रहती बाती है । उसके अभाव में लौ अपना अस्तित्व नहीं रख पाती है । इस जग में…

  • आश्चर्य नहीं होता | Roohi Quadri Kavita

    ” आश्चर्य नहीं होता “ ( Ashcharya nahi hota )   “आश्चर्य नहीं होता” आश्चर्य नहीं होता…. जब देखती हूं तुम्हें असहज परिस्थितियों में भी सहजता से मुस्कुराते हुए। हार -जीत के मन्थन से परे, परिवार के सुख के लिए अपने सपनों को गंवाते हुए। आश्चर्य नहीं होता….. जब तुम रखती हो अपनी अभिलाषाओं की…

  • वो बचपन की यादें | Bachpan par kavita

    वो बचपन की यादें ( Wo bachpan ki yaddein )     याद है मुझे आज भी बचपन की वो अठखेलियाँ बारिश के पानी नाचते कूदते भीगना संग साथियाँ   सबका साथ साथ रहना खाना पीना सोना बैठना दादा दादी नाना नानी से सुनते हुए हम कहानियाँ   भाई बहनों और दोस्तों के साथ मौज…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *