बेवफ़ा ही सब मिले है | Bewafa hi Sab Mile Hai

बेवफ़ा ही सब मिले है

( Bewafa hi sab mile hai ) 

 

है गिला उस दोस्ती से ?
दिल भरा नाराज़गी से

वो नज़र आया नहीं है
आज गुज़रा उस गली से

छोड़ दें नाराज़गी सब
तू गले लग जा ख़ुशी से

ये वफ़ा देती नहीं है
मोड़ लें मुंह आशिक़ी से

गुल उसे दें मैं न पाया
दिल भरा है बेबसी से

लें न पाया हूँ दवाई
आज पैसे की कमी से

प्यार में धोखा मिला है
आंख में आंसू तभी से

बेवफ़ा ही सब मिले है
क्या कहूँ आज़म किसी से

 

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

तिरंगो से सज़ा देखो वतन है | Tirango se Saja

Similar Posts

  • गमज़दा दिल | Ghamzada Shayari

    गमज़दा दिल ( Ghamzada dil )    फूल शबनम छोड़ कर कुछ और ही मौज़ू रहे अब सुखन में भी ज़रा मिट्टी की कुछ खुशबू रहे। हो चुकी बातें बहुत महबूब की बाबत यहां ज़िक़्र उनका भी करें जो मुल्क़ का बाज़ू रहे। गमज़दा दिल कर सकूं आज़ाद ग़म की क़ैद से काश मेरे पास…

  • पगडंडियाँ | Ghazal Pagdandiya

    पगडंडियाँ ( Pagdandiya )   जिनके पांव जिंदगी के पगडंडियों पर नहीं चलते राहें राजमहल का ख्वाब सब्जबाग जैसा उन्हें दिखता जिनके सपने धरा की धूलों को नहीं फांकते साकार नामुमकिन सा उन्हें हो जाता है जिन्दगानी में समर की इबारत न लिखी जरा सुहाने सफर की कल्पना थोती रह जाती है मुस्कान की अरमान…

  • मेरे ख़ुलूस को | Mere Khuloos ko

    मेरे ख़ुलूस को मेरे ख़ुलूस को चाहो अगर हवा देनामेरे ख़िलाफ़ कोई वाक्या सुना देना कभी तो आके मेरी ख़्वाहिशें जगा देनावफ़ा शियार हूँ तुम भी मुझे वफ़ा देना तमाम उम्र ये मंज़र रहेगा आँखों मेंनज़र मिलाते ही तेरा ये मुस्कुरा देना जिधर भी देखिए रुसवाइयों के पहरे हैंमेरे ख़ुतूत मेरे साथ ही जला देना…

  • बिठाये पहरे हैं | Bithaye Pahre Hain

    बिठाये पहरे हैं ( Bithaye Pahre Hain ) दर पे मुर्शिद बिठाये पहरे हैंइन के सर पर भी अब तो ख़तरे हैं दाग़ दामन पे लाख हों इनकेफिर भी उजले सभी से चेहरे हैं जब्र करता है इसलिए जाबिरलोग गूंगे हैं और बहरे हैं तुम भी दिल में हमारे बस जाओइसमें कितने ही लोग ठहरे…

  • आज बीमार दिल की दवा ही नहीं

    आज बीमार दिल की दवा ही नहीं आज बीमार दिल की दवा ही नहीं ।क्या लबों पे किसी के दुआ ही नहीं ।। बन गये आज हैं वहसी इंसान सब ।क्या कहूँ आज उनमें खुदा ही नहीं ।। खत लिखे प्रेम के लाख जिसके लिए ।बाद उसमें सुना फिर वफ़ा ही नहीं ।। बात मेरी…

  • आसां नहीं होता | Ghazal Aasan Nahi Hota

    आसां नहीं होता ( Aasan Nahi Hota )   बज़ाहिर लग रहा आसां मगर आसां नहीं होता बहुत दुश्वार उल्फ़त का सफ़र आसां नहीं होता। ज़मीं एहसास की बंजर अगर इक बार हो जाये लगाना फिर मुहब्बत का शजर आसां नहीं होता। सुनो अहदे वफ़ा करना अलामत इश्क़ की लेकिन निभाना अहद यारों उम्र भर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *