गुरुदीन वर्मा की कविताएं | Gurudeen Verma Hindi Poetry

मुझसे नाराज कभी तू होना नहीं

मुझसे नाराज, कभी तू होना नहीं।
दूर मुझसे, कभी तू होना नहीं।।
तू है मेरी खुशी, तू है मेरा ख्वाब।
मुझसे बेवफा, कभी तू होना नहीं।।
मुझसे नाराज—————-।।

मेरी इस बात को, लतीफा तुम मत कहो।
झूठ मुझसे कभी भी, कोई तुम मत कहो।।
गर कभी तुमसे, हो जाऊँ मैं नाराज़।
ऐसे में दुश्मन मुझे तू , समझना नहीं।।
मुझसे नाराज़——————-।।

जो तुम्हें चाहिए, बोल देना वह मुझसे।
मत छुपाकर रखना, तू कोई दर्द मुझसे।।
देख नहीं सकता तुमको, मैं रोते हुए।
अपने आँसू कभी तू , बहाना नहीं।।
मुझसे नाराज़—————–।।

प्यार मैं करता नहीं हूँ , किसी और से।
मुझको मतलब है सिर्फ, एक तुम्ही से।।
तुझपे कुर्बान है, मेरा सब कुछ यार।
कोई शक मुझपे कभी तू , करना नहीं।।
मुझसे नाराज़———————।।

शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

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