मन की दीवार | Man ki Deewar

मन की दीवार

( Man ki deewar )

 

मर सी जाती हैं भावनाएं
दिन रात की नित तकरार से
हो जाता है खत्म सा सफर
शुरू करते हैं जिसे प्यार से

कभी शक की खड़ी दीवार
कभी बदलते विचारों की भिन्नता
कभी किसी का बढ़ता प्रभाव
उपजा ही देते हैं मन में खिन्नता

कभी रुपयों की खींचा तानी
कभी बच्चों की हो रही मनमानी
कभी बोझ जिम्मेदारियों के
हिल जाती है नींव दरार से

रहती है कसक फिर भी प्यार की
बदलता रूप भी चाहता है निखरना
टीस तो उठती ही है लगाव की
जीता है पति मानो जिंदगी उधार से

मर सी जाती हैं भावनाएं
करते हैं शुरू जिसे प्यार से

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

लहर | Lehar

Similar Posts

  • पापा | Poem on papa in Hindi

    पापा ( Papa )   हर घड़ी याद आ रही पापा रोज़ आँखों में है नमी पापा   रात दिन दिल उदास है मेरा आपकी है यहां कमी पापा   छोड़कर ही तन्हा गये जब से आपके बिन नहीं हंसी पापा   आपके जाने से यहां दिल में एक पल भी न है ख़ुशी पापा…

  • कोणार्क सूर्य मंदिर | Kavita Konark Mandir

    कोणार्क सूर्य मंदिर ( Konark Surya Mandir )    वास्तुकला व डिजाइन का वो है ऐसा उदाहरण, समय की गति को दर्शाता सुंदर वहां पर्यावरण। काला पगोड़ा भी कहते इसे गहरे रंग के कारण, एस्ट्रोनोमी, आर्किटेक्चर का अद्भुत उदाहरण।। सूर्य देव की प्रथम किरण आती है इस मंदिर में, ७७२ वर्ष पुराना मंदिर है जो…

  • हे सूरज देवा | छठलोकगीत

    हे सूरज देवा पानी के पियासल तिरिया,जोहत बाटिन बांट हो,हे सूरज देवा,जल्दी जल्दी आवा हमरे घाट हो,हे सूरज देवा –2 रहम करा तीन दिन से,बाटी हम भूखल पियासल,बदरी में जाके काहे,करत हौआ लुकाछिपल,अब ना सतावा जल्दी हेन्हें आवा हो,हे सूरज देवा।जल्दी जल्दी आवा हमरे घाट होहे सूरज देवा—2। अबकी बरस हम कईले बानी छठ पूजा,बनउले…

  • जल ही है जीवन का संबल

    जल ही है जीवन का संबल   जल ही है जीवन का संबल, जल ही जीवन का संचार! वन्य जीव फसलें जीवित सब, जल ही है सुख का आधार!! जल विहीन हो जीना चाहें, ऐसा संभव नहीं धरा पर! जल संचय करना हम सीखें, बर्बादी को रोकें परस्पर!! पर्यावरण प्रदूषित ना हो, वृक्ष से करें…

  • मौन | Kavita maun

    मौन ( Maun )   एक समय के बाद बहुत उत्पीड़न अन्तत: मौन की ओर हमें ले जाता है। और मौन? निराशा की ओर। निराशा किसी अपने से नहीं, ईश्वर के किसी निर्णय से नहीं। मात्र खुद से। अकेले रहते रहते हमारी आत्मा इतनी कुण्ठित होती जाती है, कि हमारा क्रोध, प्रतिशोध, आकाँक्षायें सब कुछ…

  • महावीर जयंती पर विशेष | Mahavir jayanti par Kavita

    महावीर जयंती पर विशेष ( Mahavir jayanti par vishesh )    त्याग तपस्या भरा स्वामी महावीर का जीवन। अहिंसा के मूर्तिमान वो किया प्रभु का चिंतन। जैन धर्म के तीर्थंकर वो महावीर बुद्ध कहलाए। सिद्धार्थ घर जन्मे स्वामी वर्धमान रूप में आये। जाति पांति भेदभाव को जड़ से चले मिटाने। पंच महाव्रत धर्म चलाया अचलेश्वर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *