हर तरफ़ उजाला है

हर तरफ़ उजाला है | Har Taraf Ujala Hai

हर तरफ़ उजाला है

( Har Taraf Ujala Hai )

आज जो हर तरफ़ उजाला है
मेरी ग़ज़लों ने रंग डाला है

रोज़ करता हूँ मैं ग़ज़ल गोई
शायरों का यही निवाला है

हमने पुरखों की इस विरासत को
जैसे तैसे भी हो सँभाला है

तब कहीं जाके शायरी आई
दिल के भीतर बहुत खँगाला है

लोग उड़ने लगें ख़यालों में
हमने मफ़हूम वो निकाला है

हर किसी को है आज हैरानी
हर ग़ज़ल में नया हवाला है

मुझको शोहरत ग़ज़ल ने दी इतनी
मुझसे मंसूब हर रिसाला है

सारी महफ़िल ही कह उठी साग़र
शेर तेरा हरेक आला है

Vinay
कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003
यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • बिना उनके | Ghazal Bina Unke

    बिना उनके ( Bina Unke ) बिना उनके हमारी आँख में सपना नहीं रहता हमारी ज़िन्दगी वह है हमें कहना नहीं रहता बहन अब बाँध दो राखी हमारे हाँथ में आकर बता दो पाक इससे अब कहीं रिश्ता नहीं रहता हवाएं चल पड़ी हैं आज कुछ ऐसी ज़माने में सुना इंसान का इंसान से नाता…

  • जानते हैं | Ghazal Jante Hain

    जानते हैं ( Jante Hain ) वो रहते कहाँ हैं पता जानते हैं । कि उनकी सभी हम अदा जानते हैं ।।१ लगा जो अभी रोग दिल को हमारे ।। न मिलती है इसकी दवा जानते हैं ।।२ मनाएं उन्हें हम भला आज कैसे । जिन्हें आज अपना खुदा जानते हैं ।।३ मिटेगा नहीं ये…

  • जुगनू दुबक रहे होंगे

    जुगनू दुबक रहे होंगे ये सर्द रात है जुगनू दुबक रहे होंगेहज़ारों दिल के दरीचे खटक रहे होंगे मुझे यक़ीन है महफ़िल में उनके आते हीहरिक निगाह में वो ही चमक रहे होंगे मैं सोचता हूँ हटा दूँ हया के पर्दों कोवो मारे शर्म के शायद झिझक रहे होंगे नज़र के तीर से जो ज़ख़्म…

  • सादगी अच्छी नहीं | Saadgi Shayari

    सादगी अच्छी नहीं ( Saadgi Achi Nahi )   हद से ज़्यादा सादगी अच्छी नहीं बेहिसों से बंदगी अच्छी नहीं। पास है दरिया समंदर मांगता देख इतनी तिश्नगी अच्छी नहीं। जानकर सब नासमझ बनता है वो बस अदा उसकी यही अच्छी नहीं तू न हो जिसमें तेरा जलवा न हो मौत सी वो ज़िंदगी अच्छी…

  • बहाने कितने | Bahane Kitne

    बहाने कितने ( Bahane Kitne )    मुस्कुराने के बहाने कितने फर्क क्या,आएं रुलाने कितने ॥ अब यकीं रूठ किधर जा बैठा रंग बदले हैं ज़माने कितने ॥ बेअसर ख़ार भी है अब उसको सह लिया तल्ख़ व ताने कितने ॥ होती उस सम्त निगाहें सबकी कह गईं, उसके दिवाने कितने ॥ उसकी गैरहाज़िरी में…

  • शिकायत न शिकवा | Ghazal Shikayat na Shikwa

    शिकायत न शिकवा ( Shikayat na Shikwa ) चलो अब रहा तुम से वादा हमारा, पलटकर ना तुमको देखेंगे दोबारा ! मुसीबत में डाले खुदी को खुद से, दिखाया मुहब्बत ने कैसा नज़ारा ! टूटे है कहाँ से कैसे हम बताये, हुआ कैसा दिल का ख़सारा ख़सारा ! नहीं है शिकायत न शिकवा किसी से,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *