hirdayagan online kavi sammelan

डा0 अलका अरोड़ा के संचालन में हृदयांगन संस्था मुंबई का हुआ आनलाइन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हृदयांगन साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था मुंबई ने एक शाम देश के नाम कार्यक्रम 14 अगस्त 2021 को आयोजित किया जिसमे देश प्रेम तथा विविध गीतो की जमकर बरसात हुई।। कार्यक्रम की शुरूआत श्री सदाशिव चतुर्वेदी मधुर जी ने सरस्वती वंदना से की ।।

चार घंटे चले इस कवि सम्मेलन में उपस्थित कवियों में श्रीमती विद्युत प्रभा चतुर्वेदी मंजू देहरादून, श्रीमती तनुजा चौहान नवी मुंबई, कानपुर से डा0 श्री श्रीहरिवाणी डा0 प्रमिला पाण्डेय , डा0 कमलेश शुक्ला कीर्ती, श्रीमती संतोषी दीक्षित ,
मुंबई से
श्री नागेंद्र नाथ गुप्ता, श्री शारदा प्रसाद दुबे शरतचंद्र, श्री उमेश मिश्रा प्रभाकर ,श्री सदाशिव चतुर्वेदी
श्री हरीश तिवारी हास्य व्यंग्य
डा0 अरूण प्रकाश अनुरागी, श्री विनय दीप शर्मा सवैया कजरी के धनीकवि और पत्रकार, श्री रमेशचन्द्र महेश्वरी राजहंस बिजनौर तथा विधु भूषण त्रिवेदी संस्था अध्यक्ष ने अपनी कविताओं से समा बाधें रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ से श्री रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी प्रलयंकर जी ने की ।

उन्होने कालिदास द्वारा लिखित अभिज्ञान शाकुन्तलम जिस नाम से सभी कवि कवियत्रियों को सम्मानित किया जा रहा है उस अनुपम ग्रन्थ पर प्रकाश डालते हुए संस्था की इस विभूषण की सोच के बारे में भूरि भूरि प्रशंसा की ।

प्रथम सत्र के कवि सम्मेलन का संचालन देहरादून की डा0 अलका अरोड़ा जी ने और द्वितीय सत्र का संचालन मुंबई के श्री उमेश चंद्र मिश्र प्रभाकर जी ने बड़ी खूबसूरती और अपने सुपरिचित अंदाज से किया जिसकी आनलाइन जुड़े श्रोताओं ने काफी सराहना की ।

हृदयांगन संस्था के संस्थापक अध्यक्ष विधु भूषण विद्यावाचस्पति ने इस अवसर पर सभी कवि मनीषियों को अभिज्ञान शाकुन्तलम सम्मान 2021 शाल वस्त्र से सम्मानित कर सबका आभार प्रकट किया।

उन्होने कहा कि सामाजिक गतिविधियो के साथ संस्था साहित्यिक गतिविधियों में नये प्रतिभाशाली नये कवियों को मंच प्रदान कर तथा समय समय पर उनको सम्मानित कर उत्साहवर्धन करती रहती है तथा नियमित अंतराल में हम विशेष अवसरों पर ऐसे आयोजन करते रहेंगे। उन्होने उपस्थित पत्रकार कवि श्री विनय दीप शर्मा दीप के प्रति आभार व्यक्त किया जो संस्था की सभी गतिविधियों को मीडिया के द्वारा प्रसारित करते रहते है। आभार प्रदर्शन के बाद कार्यक्रम ने विराम लिया ।।

यह भी पढ़ें :

माँ | Maa

Similar Posts

  • मन मंदिर का दिव्य महल | Kavita man mandir

    मन मंदिर का दिव्य महल ! ( Man mandir ka divya mahal ) ***** मन मंदिर को अपने सुंदर सपनों से सजाओ प्यार लुटाओ इस पर अपना सुंदर महल बनाओ । इस महल में ना कोई हो राजा या रंक ना कोई किसी को मारे ज़हरीले डंक। सभी आदम की संतान को मिले समुचित सम्मान…

  • Ghazal | ख़्वाब में आकर सताये ख़ूब कोई

    ख़्वाब में आकर सताये ख़ूब कोई ( Khwab mein aakar sataye khoob koi )     ख़्वाब  में  आकर  सताये  ख़ूब  कोई नीद  से  इतना  जगाये  ख़ूब  कोई   नफ़रत की सुनली जुबां मैंनें बहुत है गीत उल्फ़त के  सुनाये  ख़ूब कोई   प्यासा हूँ मैं तो मुहब्बत का बरसो से प्यास उल्फ़त की बुझाये…

  • थोड़ा उदास हूँ

    थोड़ा उदास हूँ   पिछले कई दिनों से मन थोड़ा #उदास रहने लगा है समझ नहीं आ रहा कि क्या करें हम एक ही बात बार-बार #मन में हर बार आ रही है कि हर बार मेरे ही साथ ऐसा क्यूँ होता है..?   उन्हीं की बातों को #दिल से लगाकर विचारों की #मथनी चलती…

  • सड़क

    सड़क   पहुंच सुदूर क्षितिज धरा तक सुंदर रेखा मात्र दिखती हूं, श्याम वर्णी स्वस्थ सलोने गात दिन रात अटखेलियां खेलती हूं, पकड़ पगडंडी की राह पाया चतुर्भुज रूप चंचला आगे बढ़ती,संवरती हूं अनुपम अवतरित छटा, अव्यवस्थित पर अति आर्द्र शीत की उष्णता में तपती हूं।। अवस्थापन से हर्षातिरोक्ति हुयी कब जब मेरे कतरों की…

  • प्रियवर

    प्रियवर   मेरे तन मन प्रान महान प्रियवर। प्रात:सांध्य विहान सुजान प्रियवर।।   इस असत रत सृष्टि में तुम सत्य हो, नित नवीन अनवरत पर प्राच्य हो, मेरे अंतस में तुम्हारा भान प्रियवर।।प्रात:०   ललित वीणा तार तुमसे है सुझंकृत, ये षोडस श्रृंगार तुमसे है अलंकृत, प्रेयसी का मान स्वाभिमान प्रियवर।।प्रात:०   प्रणयिका बन चरण…

  • मुस्कुराहट का राज | Muskurahat ka Raaz

    मैंने अपने जीवन में कितने व्यक्तियों को देखा है जो हर हाल में हर स्थिति में प्रसन्न रहते है ऐसा नहीं है की उनके जीवन में दुःख नहीं है बल्कि वो अध्यात्म से ओत – प्रोत रहकर सम्भाव से अपना जीवन जीना जानते है । जब जिंदगी हमारी है तो क्यों न हम इसे प्रसन्नतापूर्वक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *