इन्वेस्टमेंट | Investment

इन्वेस्टमेंट

( Investment ) 

 

स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट में बड़ी रिस्क होती है,
किंतु हिंदी में निवेश में ज्ञान में वृद्धि होती है।

एक ही शब्द के अलग-अलग मायने नज़र आते हैं,
पर्यायवाची समानार्थी शब्दों में हम खो जाते हैं!

तुकांत अतुकांत कहानी कविता ग़ज़ल लिखते हैं,
दोहा छन्द चौपाई लेख धनाक्षरी में भी मन लगाते हैं।

जितना ज़्यादा इसमें समय हम लगाते हैं,
उतना ही अंदर हम डूबते चले जाते हैं।

स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने पर नुकसान भी होता है,
किंतु हिंदी में निवेश करने पर हमेशा मुनाफा ही होता है

 

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

यह भी पढ़ें :-

आडंबर | Adambar

Similar Posts

  • जब तक भला किया | Poem jab tak bhala kiya

    जब तक भला किया ( Jab tak bhala kiya )   जब तक भला किया,वो सहारा बना रहा। आँखों में हर किसी के,सितारा बना रहा।।   चाहा कि अपने वास्ते,दो पल जियूँ कभी अपनों का उस घड़ी से, किनारा बना रहा।।   रिश्तों को टूटने से बचाने के वास्ते, आकर विजय के पास, हारा बना…

  • क्या कहना

    क्या कहना     सरस सरगम सुधा सी सुंगधित बयार क्या कहना। चलन चपला सी चंचल छन छनन झंकार क्या कहना।।   विकट लट की घटा की छटा न्यारी, कशिश ऐसी अनुचरी प्रकृति है सारी, घूंघट पट अपट अनुपम निष्कपट श्रृंगार क्या कहना।।   कमल दल विकल लखि अधरन की आभा, रंक जग है तुम्हारा…

  • निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता?

    निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता? गुलिस्तां जो थे सुनसान हो गए।पंछी पेड़ों से अनजान हो गए॥ आदमी थे जो कभी अच्छे-भले,बस देखते-देखते शैतान हो गए॥ सोचा ना था कभी ज़ख़्म महकेंगे,गज़लों का यू ही सामान हो गए॥ निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता?दिल सभी के बेईमान हो गए॥ पूछते हैं काम पड़े सब हाल मियाँ,मतलबी अब…

  • शक | Hindi Poem Shak

    शक ( Shak )   बिना पुख़्ता प्रमाण के शक बिगाड़ देता है संबंधों को जरा सी हुई गलतफहमी कर देती है अलग अपनों को काना फुसी के आम है चर्चे तोड़ने में होते नहीं कुछ खर्चे देखते हैं लोग तमाशा घर का बिखर जाता है परिवार प्रेम का ईर्ष्या में अपने भी हो जाते…

  • सांता आया | Santa Aya

    सांता आया ( Santa Aya ) सांता आया सांता आया संग खिलौने लाया है पहनें टोपी रंग बिरंगी सबके मन को भाया है। हंसते गाते आता है करतब खूब दिखाता है हम बच्चों के संग खेलता हम पर प्यार लुटाता है खुद हंस कर भी हमें हंसाकर गीत खुशी का गाया है, सांता आया सांता…

  • मेरी संस्कृति | Poem meri sanskriti

    मेरी संस्कृति ( Meri sanskriti )   है अलग मेरी संस्कृति नहीं उसमें कोई विकृति चुटकी भर सिंदूर तेरा मौन मेरी स्वीकृति गरिमा बढ़ाती लाल बिंदिया। विदेशी कर रहे अनुकृति पायलेे पैरों में मेरे सुनो उसकी आवृत्ति तुलसी पर जल चढ़ाएं यही हमारी प्रकृति रिश्तो की प्यारी प्रक्रिया फैला रही है जागृति हार जाए तो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *