Poem Udti Patang si Fitrat

उड़ती पतंग सी फितरत | Poem Udti Patang si Fitrat

उड़ती पतंग सी फितरत

( Udti patang si fitrat ) 

 

व्योम तलक उड़ाने उंची आसमां तक छा जाऊं।
मन करता दुनिया घूम लूं पंख लगा उड़ पाऊं।

उड़ती पतंग सी फितरत डोर को थामे रखना।
दुनिया के रंग निराले खुशियों की शामे रखना।

उड़ती रहे नील गगन में विविध भांति रंग लिए।
अटकलें आसमानों में खिलाती बलखाती पिये।

सैर सपाटा संसार में जमीन से जुड़े रहो कहती।
पतंग सी फितरत मेरी दिल में धरती मां बसती।

परवाज हौसलों की भर मंजिलों की ओर चलें।
देशभक्ति जोश जज्बा मन में कई अरमान पले।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मैं धरती पर बोझ क्यों बनूं | Geet Bojh Kyon Banoon

 

Similar Posts

  • योग

    योग ( दोहा आधार छंदगीत ) श्वास और प्रश्वास से, समता भाव निखार।।योग मिलन है मुक्ति है, योग ही शाश्वत सार। समय निकालो योग का, करिए प्राणायाम।स्वस्थ्य शरीर रहे सदा, चित्त वृत्ति परिणाम।।ध्यान धारणा यम-नियम, आसन प्रत्याहार।योग मिलन है मुक्ति है, योग ही शाश्वत सार। चित्तवृत्ति को साधकर, स्थिर करता योग।आसन विविध प्रकार के, रखते…

  • वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी

    वनिता सुरभि,पारिजात ललांत सी   कोमल निर्मल सरस भाव, अंतर प्रवाह विमल सरिता । त्याग समर्पण प्रतिमूर्ति, अनंता अत्युत्तम कविता । सृजन उत्थान पथ पर, महिमा मंडित सुकांत सी । वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी ।। स्नेहगार ,दया उद्गम स्थल, अप्रतिम श्रृंगार सृष्टि का । पूजनीय कमनीय शील युत, नैतिक अवलंब दृष्टि का । उमा…

  • बोझ स्वाभिमान का | Bojh Swabhiman ka

    बोझ स्वाभिमान का ( Bojh swabhiman ka )   भर लिए भंडार ज्ञान का सर पर लादे बोझ स्वाभिमान का दब गई बेचारी विनम्रता संशय हर बात पर अपमान का बढ़ गई अकड़ दंभ से मिलने का मन बहुत कम से आंकने लगे कीमत और की बढ़ी औकात खुद की सबसे अदब, लिहाज सब छोटे…

  • ईद मुबारक़ | Kavita Eid Mubarak

    ईद मुबारक़ ( Eid Mubarak )   ईदुल फ़ितर मुबारकबाद अल्लाह रखे आबाद ईदुल फ़ितर मुबारकबाद अल्लाह रखे शादाब माहे पाक रमज़ान में रोज़े रखे अ़क़ीदत से बड़े स़िदक़ से रखे वक़्त पर स़िह़री इफ़्तार का ख़्याल ईमान नही होने दिया ज़रा पायमाल आई ईद ख़ुशियां लाई ईद मुबारक़ दीन की दावत लाई ईद मुबारक़…

  • भाई दूज पर्व | Bhai Dooj Parv

    भाई दूज पर्व ( Bhai dooj parv )    यम यमुना सा पावन, भाई बहन का प्यार कार्तिक मास शुक्ल द्वितीया, तिथि अद्भुत अनूप विशेष । सृष्टि रज रज विमल प्रवाह, भाई दूज खुशियां अधिशेष । परस्पर मंगलता कामना अथाह, शीर्ष वंदित परंपरा संस्कार । यम यमुना सा पावन, भाई बहन का प्यार ।। भाई…

  • पुरुष | Hindi Poem on Purush

    पुरुष ( Purush )    इनके आंखों में होती नहीं नमी पर जज्बातों की होती नहीं कमी   फिक्र रहती है इन्हें हमारी सदा प्यार जताते हैं हम पर यदा-कदा   गुस्सा क्रोध ,नाराजगी ,इनका अस्त्र है बिटिया, बेटा, सुनो जरा, इनका सस्त्र हैl   दिनभर दौड़ते हैं कभी रुकते नहीं काम करते-करते यह थकते…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *