Ishq Dard Hai

इश्क दर्द है | Ishq Dard Hai

इश्क दर्द है 

( Ishq Dard Hai )

 

इश्क दर्द है
इश्क जवानी है
इश्क में हो रहा

…. पानी-पानी है

इश्क जान है
इश्क जहान है
इश्क महसूस करो तो
इश्वर, अल्लाह, भगवान है

इश्क न काला है
इश्क न गोरा है
इश्क में ………. ने
बेदर्दी से खुद को पाला है

इश्क आत्मा है
इश्क प्राण है
इश्क लगता
रत्न आभूषण समान है

इश्क न दिखता
इश्क में न जान है
फिर भी इश्क
कितना महान है

इश्क सुबह है
इश्क शाम है
इश्क बिना
बौना दुनिया जहान है

इश्क वेदना है
इश्क चित्कार है
इश्क में लिखा
किताब हजार है

इश्क का न भाषा
इश्क का न पोषाहार है
इश्क को पढ़ न सकोगे
इश्क वह संसार है

इश्क झकझोर देगा
वह पक्की दीवार है
इश्क , इश्क नहीं
इश्क फुल माली सा अद्भुत प्यार है

इश्क दर्द है,,,,,,,,,,

Sandeep Kumar

संदीप कुमार

अररिया बिहार

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/kavita-nahi-ghabrana-hain/

Similar Posts

  • सृष्टि की अत्युत्तम रचना है नारी | Nari par Kavita in Hindi

    सृष्टि की अत्युत्तम रचना है नारी ( Srishti ki ati uttam rachna hai nari )    कोमल निर्मल सरस भाव, उरस्थ विमल सरिता । त्याग समर्पण प्रतिमूर्ति, अनंता अनूप कविता । सृजन उत्थान पथ पर, सदा शोभित महिमा भारी । सृष्टि की अत्युत्तम रचना है नारी ।। स्नेहगार ,दया उद्गम स्थल, अप्रतिम श्रृंगार सृष्टि का…

  • सुुुनो | Poem suno

    सुुुनो ( Suno )   सुुुनो… वो बात जो थी तब नहीं है अब जब आँखों में छिपी उदासियाँ पढ़ लेते थे लबों पर बिछीं खामोशियाँ सुन लेतेे थे ….तुम फुर्सतों में भी अब वो बात नहीं वो तड़प, वो ललक नहीं है  मसरूफियात में भी हमारी याद से लरज़ जाते थे जब…..तुम सुनो… तब…

  • पुलिस स्मृति दिवस

    पुलिस स्मृति दिवस मुॅंह से आज भी बोलती है उन वीरों की तस्वीरें,देश के लिए अपनी जान गंवाए वो ऐसे थें हीरे।कोई शब्द नही है उन वीरों के लिए पास हमारे,फिर भी कविता-लिखता हूॅं मैं उदय धीरे-धीरे।। २१ अक्टूब‌र दिन था वो १९५९ की काली-रात,तीसरी बटा की कंपनी हाॅट स्प्रिंग मे थी तैनात।सीमा सुरक्षा जिम्मेदारी…

  • गुनगुनाती धूप | Gunagunati Dhoop

    गुनगुनाती धूप ( Gunagunati dhoop )    गुनगुनी धूप में बैठो तुम जरा, जिंदगी सुहानी है मजा लीजिए। सर्दी सताए जब भी कभी, खुद को धूप से सजा लीजिए। धूप लगती प्यारी ठंडक में हमें, सर्दी सारी अब भाग दीजिए। राहत देती हमें ताजगी से भरी, थोड़ा धुप में भी सुस्ता लीजिए। रोगों से रक्षा…

  • बचपन के दिन | kavita

    बचपन के दिन ( Bachapan ke din ) पलकों  पे  अधरों  को  रख कर, थपकी देत सुलाय। नही रहे अब दिन बचपन के, अब मुझे नींद न आय।   सपने  जल गए भस्म बन गई, अब रोए ना मुस्काए, लौंटा दो कोई  बचपन के दिय, अब ना पीड़ सहाय।   किससे मन की बात कहे,…

  • काले बादल | Kale badal kavita

    काले बादल ( Kale badal )   घिर आये सब बादल काले ठंडी ठंडी बूंदों वाले ताल तलैया सब भर जाओ मेघ तुम घटाओ वाले   चहक उठे चमन सारे प्रेम की बहती हो बहारें खेतों में हरियाली छाई खूब बरसो मेघा प्यारे   अधरों पर मुस्कान देकर बूंदों से तन मन भिगोकर मन मयूरा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *