जख्म है दर्द है तन्हाई है।

जख्म है दर्द है तन्हाई है | Shayari on zakhm

जख्म है दर्द है तन्हाई है

( Zakhm hai dard hai tanhai hai )

 

जख्म है दर्द है तन्हाई है।

न जाने कब मेरी सुनवाई है।।

 

रात को चैन से सो लेती है,

मुझसे अच्छी मेरी परछाई है।।

 

कत्ल करता है मेरी किश्तों में,

मेरा कातिल बहुत कसाई है।।

 

सांस का शुक्रिया अभी करदूं,

क्या पता कल का नहीं आयी है।।

 

बस वही लोग बुरा कहते हैं,

जिनके अन्दर बहुत बुराई है।।

 

तुम समन्दर हो शेष कहने के,

प्यास किसकी भला बुझाई है।।

लेखक: शेषमणि शर्मा”इलाहाबादी”

जमुआ,मेजा , प्रयागराज

( उत्तरप्रदेश )

यह भी पढ़ें :

चीर को तुम | Cheer ko tum


Posted

in

by

Comments

One response to “जख्म है दर्द है तन्हाई है | Shayari on zakhm”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *