Jamuni Rang par Kavita

जामुनी रंग | Jamuni Rang par Kavita

जामुनी रंग

( Jamuni rang ) 

 

निडरता वफादारी का रंग जामुनी भाता है।
ताजगी तरूणाई को सुंदरता से सजाता है।

हदय रोगों में गुणकारी धड़कने गुण गाती है।
कैंसर भी कम हो जाता नई जवानी आती है।

आलू बुखारा जामुन का सोच समझ सेवन करें।
मधुमेह शमन करें जामुनी काया कंचन सी बने।

दूरदर्शी होते वो लोग जामुनी रंग जिनको प्यारा।
क्या नफा क्या नुकसान पारदर्शी बने सितारा।

भीड़ का हिस्सा नहीं विलक्षणता को दर्शाते हैं।
जिम्मेदारी परेशानी से पल-पल वो घबराते हैं।

नकल नहीं करें औरों की हटकर वो दिखलाते हैं।
याद करती सारी दुनिया काम प्रखर कर जाते हैं।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

सांवरिया बेगो आज्या रे | Saawariya Rajsthani Geet

Similar Posts

  • .खुद से जंग लड़ने लगा हूं | Khud se

    .खुद से जंग लड़ने लगा हूं ( Khud se jang ladne laga hoon )    मैं आज कल खुदसे जंग लड़ने लगा हूं, मैं कितना काबिल हू इसी कोशिश में खुदको आजमाने लगा हूं, काँच जैसा चमकने के लिये, बिखरने लगा, चाँद जैसा निखरने केलीये, आजकल मैं खुदसे लड़़ने लगा हूं। कामियाबी हासिल करने के…

  • भारत की बुलंद तस्वीर

    भारत की बुलंद तस्वीर पढ़ा था अखबारों मेंसुना था समाचारों में हम देश को विकसितकर चुके हैं सब के भविष्य कोसुरक्षित कर चुके हैं आज देखा मैंने दिल्लीकी कड़कती धूप पर नन्हे मुन्ने घूम रहे थेनंगे पांव उसे पथ पर दिल्ली की सड़कों पर अड़ेकड़क धूप पर खड़े दिल्ली की सड़कों पर अड़ेकड़क धूप पर…

  • मुझे भी याद कर लेना | Geet

    मुझे भी याद कर लेना ( Mujhe bhi yaad kar lena )   मेरे आँगन का सावन जब लिये बरसात आयेगा इस फुलवारी में आकर के गुलो गुलशन महकायेगा मैं तुझको याद करूंगी तुम्हारे दर पर आँधी की जब होंगी दस्तक बेशुमार दबाकर सारी हलचल तुम मुझे बस गुनगुना लेना मुझे भी याद कर लेना…

  • जमील अंसारी की कविताएं | Jameel Ansari Hindi Poetry

    बेटियां चंपा,गुलाब,मोगरा,चंदन है बेटियां। रिश्तों को जोड़ देने का बंधन है बेटियां। लाल,ओ,गोहर,अक़ीक़ है कंचन है बेटियां। बाबुल का हंसता, खेलता आंगन है बेटियां। पी,टी उषा हो सानिया या चावला,किरण। दुनिया के कैनवास पे रौशन है बेटियां। इज़्ज़त है आब्रु है ये ज़ीनत घरों की है। किरदार और खुलूस का दर्पण है बेटियां। आयत है…

  • विजयादशमी | Vijayadashami Kavita

    विजयादशमी ( Vijayadashami kavita ) ( 10 )    जागो रावण आए साल तूझे यूं खामोशी से जलता देख हे रावण,मुझे तो तुझ से इश्क़ हो चला है कभी तो पूछ उस खुदा से, क्या इन्साफ है तेरा मरने के बाद भी ,सदियों ज़माना क्यूं सज़ा देता चला है सोने की लंका थी मेरी ,शिव…

  • नव वर्ष 2021

    नव वर्ष 2021     –> नये साल 2021 की सब अपनों को, पहुँचे ढ़ेरों बधाई     1.जैसा गुजरा अच्छा गुजरा, अब देना है विदाई | हम सब मिलकर करते हैं, 2020 से आज जुदाई |     याद रहेगा अनंत काल तक, कोरोना ने फैलाई चटाई | विदा करो बड़ी धूम-धाम से, मत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *