जाऊँ क्यों मैं घूमने

जाऊँ क्यों मैं घूमने

जाऊँ क्यों मैं घूमने ( कुण्डलिया )

जाऊँ क्यों मैं घूमने, सारे तीरथ धाम।
कण-कण में हैं जब बसे, मेरे प्रभु श्री राम।

मेरे प्रभु श्री राम, बहुत हैं मन के भोले।
खाये जूठे बेर, बिना शबरी से बोले।

सच्ची हो जो प्रीत, हृदय में तुमको पाऊँ।
तुम्हें ढूंढने और, कहीं मैं क्यों कर जाऊँ।

डाॅ ममता सिंह
मुरादाबाद

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • सतत विद्रोही | Satat Vidrohi

    सतत विद्रोही ( Satat Vidrohi )  सतत् विद्रोही-मैं सतत्,सनातन, निरपेक्ष, निर्विकार, निर्भीक’ विद्रोही’ मैंने गान सदा, सत्य का ही गाया धन- यश, वैभव, सत्ता सुंदरी का आकर्षण मेरे मन को तनिक डिगा नहीं पाया… धन -कुबेरों की अट्टालिकाओं को देख मेरा हृदय कभी नहीं अकुलाया क्रांतिवीरों के यशोगान में ही मैंने जीवन का सब सुख…

  • जय जय भोलेनाथ | Jai Bholenath

    जय जय भोलेनाथ ( Jai Jai Bholenath )    काशी के वासी अविनाशी, भूतनाथ महादेव। नीलकंठ शिवशंकर भोले, सब देवों के देव। जय जय भोलेनाथ, जय जय भोलेनाथ त्रिनेत्र त्रिशूल धारी, जटा में बहती भगीरथी धारा। डम डम डमरू कर में बाजे, नटराज नृत्य प्यारा। भस्म रमाए भोले बाबा, कैलाशी शिव शंभू नाथ। भर देते…

  • अफसाने तेरे नाम के -hindi poems

    अफसाने तेरे नाम के   मेरी वफा का सिला यही वो मुझपे मरता है  मिलता है जब भी जख्म हरा जरूर करताहै जाने कहां से सीखा जीने का यह सलीका कत्ल मेरा काँटे से नहीं वो फूल से करता है। वक्त को रखता हमेशा अपनी निगेहबानी में वो जिनदगी को बडे गुरुर से जीता है…

  • तुम्हारा साथ और तुम

    तुम्हारा साथ और तुम मैंने हमेशा प्रयत्न किया,अपने अनुराग को पारावार देने का,एवं उसकी नीरनिधि में समाने का,तुम्हारे चेहरे की आभा,और उस पर आईहँसी कोकायम रखने का,किन्तु-मैं हमेशानाकामयाब रही,क्योंकि–तुम मुझे एवं मेरे प्यार कोसमझ ही नहीं पाये।तुम मेरीभावनाओं में लिप्त,परवाह कोभांप न सके,मालूम है कि-हमेशा साथ संभव नही,फिर भी मैंने हमेशा ढूंढ़ी तलाशी,तुम्हारे साथ रुक…

  • मैं चाहता हूं बस तुमसे | Prem kavita in Hindi

       मैं चाहता हूं बस तुमसे ( Main chahta hun bas tumse )   मैं चाहता हूं बस तुमसे थोड़ा सा प्यार थोड़ा-सा मन थोड़ा-सा सुकून थोड़ा-सा अहसास।   मैं तुमसे चाहता हूं बस थोड़ी-सी हँसी थोड़ी-सी खुशी थोड़ी-सी बातें थोड़ी-सी शान्ति।   मैं तुमसे चाहता हूं बस थोड़ा-सा दर्द थोड़ा-सी तकलीफ़ थोड़ी-सी बैचेनी थोड़ी-सी…

  • शेर सिंह हुंकार की कविताएं | Sher Singh Hunkaar Poetry

    पीड़ा ना छेड़ो हमें हम सताए हुए हैं।कई राज दिल में छुपाए हुए हैं।ये सदियों की पीड़ा उभरने लगी हैं,जो हिन्दू हृदय में दबाए हुए हैं। हमे ना सीखाओ हमे ना दिखाओ।जुल्म क्या हैं होता हमें ना बताओं।जो हमने सहा हैं कहाँ वो लिखा हैं,मगर सच हमारा जहाँ को बताओ। जो दिल मे जख्म हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *