Jeevan Sara

जीवन सारा बीत गया | Jeevan Sara

जीवन सारा बीत गया

( Jeevan sara beet gaya ) 

 

बीत गई वो भोर सुहानी
सुंदर सब शामें बीत गई
जीवन ये सारा बीत गया
सांसे डोर थामे बीत गई

बीत गई वो मस्त बहारें
रैना अंधियारी बीत गई
उमड़ा आता प्रेमसागर
वो बातें सारी बीत गई

बीत गए वो ख्वाब सुरीले
नयनों की ज्योति बीत गई
धरा नापते डग भर भर के
वो तन की शक्ति बीत गई

बीत गई मुस्कान अधर की
बहती वो रसधारें बीत गई
बीत गई है श्रवण की शक्ति
मांझी पतवारें सब बीत गई

 

कवि : रमाकांत सोनी
नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

बेटा कब आएगा तू | Beta Kab Aayega

 

 

Similar Posts

  • ️️आओ गणेश जी️ | Aao Ganesh Ji

    ️ आओ गणेश जी  ( Aao Ganesh Ji )   –>आओ मेरे गणराजा………..|| 1.आओ मेरे महराज गजानन, स्वागत है अभिनन्दन है | ऋद्धि-सिद्धि को साथ मे लाना, उनका भी सत-बन्दन है | सालों से तुम अपने भक्तों के, दूर दुखों को करते हो | निर्बल और पीडित भक्तों की, पीडा को तुम हरते हो |…

  • चूल्हे की रोटी | Chulhe ki Roti

    चूल्हे की रोटी ( Chulhe ki roti )   गर्मा गर्म चूल्हे की रोटी होती गोल मटोल शानदार। तरोताजा तवे की रोटी हमें लगती बहुत जानदार। चिकनी चिकनी चुपड़ी चुपड़ी स्वाद से है भरी पूरी। खाने वाले खाते ही जाए हल्की हो जाए हलवा पूरी। चूल्हे की रोटी मन को भाए घर वाले खुशी से…

  • सोच समझकर बोल | Soch samajh kar bol | Geet

    सोच समझकर बोल ( Soch samajh kar bol )   सोच समझकर बोल रे बंदे सोच समझकर बोल तिल का ताड़ बना मत बंदे मन की आंखें खोल   मीठी वाणी लगती प्यारी मधुरता से रिश्ता नाता है मधुर बोल दुनिया दीवानी तोता पिंजरे में आता है हंगामा खड़ा मत करना प्यारे मत करना रमझोल…

  • अहीर रेजिमेंट | Ahir Regiment par kavita

    अहीर रेजिमेंट! ( Ahir Regiment )   सरहद पे दुश्मन की पैनी निगाहें, फिर से अहीर रेजिमेंट बनाएँ। यदुवंशियों की है लंबी कहानी, चीन भी देखा है इनकी जवानी। आओ उस हक़ को वापस दिलाएँ, फिर से अहीर रेजिमेंट बनाएँ, सरहद पे दुश्मन की पैनी निगाहें, फिर से अहीर रेजिमेंट बनाएँ। आँसू से आँचल कभी…

  • एक चने ने

    एक चने ने मेरे आँगन नित्य सवेरे बुलबुल आती एकसच्च बोलो-सच बोलो की मधुर लगाती टेक मधुर लगाकर टेक मुझे हैरान करेकैसी खोटी बातें ये नादान करे झूठा और बेईमान भला सच कैसे बोलेज़हर बेचने वाला अमृत कैसे तौले मूरख पंछी मुझको कैसी सीख दे रहानहीं चाहिए बिन मांगे क्यों भीख दे रहा तेरी मीठी…

  • मिठास | Mithaas

    मिठास ( Mithaas )    लग जाती है अगर दिल को कही किसी की बात तुम्हें तो लगती होगी तुम्हारी भी कही क्या कभी सोच हो तुमने इस बात को भी बातों का असर कभी एक पर ही नहीं पड़ता यह चीर हि देती है हृदय जिस किसी के लिए भी कहीं जाए चाहते हो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *