Jiyo Jeene Do

जीयो जीने दो | Jiyo Jeene Do

जीयो जीने दो

( Jiyo Jeene Do )

 

बैठ बलाओं से यूँ मत थक हार कर
ज़ीस्त नदी है इसको तिरकर पार कर

ख़ुद भी जीयो जीने दो औरों को भी
क्या होगा उपलब्ध किसी को मार कर

क्या खोया क्या पाया पूरे रोज़ में
रोज़ ज़रा सा सोते वक़्त विचार कर

सोई हैं सत्ताएँ ग़हरी नींद में
लोग थक गए उनको रोज़ पुकार कर

जां दे देंगे तेरे इक़ संकेत पर
मत दो हमको दंड नज़र से मार कर

बहुत हसीं थे दिन बचपन के वे सभी
मन जाते थे वापस तब तक़रार कर

ज़ुल्फ़ शबों सी लब सहर के मानिंद हैं
होती होगी सुबह तिरे दीदार कर

पानी आँखों का बीता तो क्या बचा
ऐ इंसां मत पगड़ी को सलवार कर

 

महेन्द्र कुमार जोशी
लखेर, जयपुर (राज.)

यह भी पढ़ें :-

अरमान 2024 के | Arman 2024 ke

Similar Posts

  • कैसा धर्म | Kaisa Dharam

    कैसा धर्म ( Kaisa dharam )    भगवा तो कभी ‌हरा ओढ़ा दिया रंग हीन,उस दयादीन को कैसा कैसा जामा पहना दिया निर्गुण, निराकार को सब ने जाने क्या क्या अपनी मर्जी से आकार दिया सर्व भूत, सर्व व्यापी तुझे हमने कैद कर दीवारों में बांध दिया हे स्रष्टा ,जग केरचयिता तुझको ही सीमाओं से…

  • थकान | Kavita Thakan

    थकान ( Thakan )   जरूरी नहीं कि हर अंधेरा रोशनी के साथ हि पार किया जाय हौसलों के दीये कुछ दिल में भी जलाये रखा करिये माना कि गम कम नहीं जिंदगी में आपकी जरूरते भी तो कम नहीं पैदल के सफर में लगता है वक्त भी पास की भी दूरी लगती कम नहीं…

  • अपनापन | Kavita Apnapan

    अपनापन ( Apnapan ) सफर करते-करते कभी थकती नहीं, रिश्ता निभाने का रस्म कभी भूलती नहीं, कभी यहाँ कभी वहाँ आनातुर, कभी मूर्खता कभी लगता चातुर्य, समझ से परे समझ है टनाटन, हर हालत में निभाते अपनापन, किसी को नहीं मोहलत रिश्तों के लिए, कोई जान दे दिया फरिश्तों के लिए, कोई खुशी से मिला,कोई…

  • मैं और मेरी तनहाई | Main aur Meri Tanhai

    मैं और मेरी तनहाई ( Main aur Meri Tanhai )   मिलने को तो मिला बहुत, पर मनचाहा न मिला। निद्रालस नयनों को सपनों ने है बहुत छला। बनते मिटते रहे चित्र कितने ही साधों के। दण्ड भोगता रहा न जाने किन अपराधों के, साॅसों की पूंजी कितनी ही, मैंने व्यर्थ गंवाई। बहुत बार भयभीत…

  • समझदारी | Samajhdari

    समझदारी ( Samajhdari )   यह संभव ही नहीं कि लोग मिले आपसे पहले की तरह ही उनका काम निकल जाने के बाद भी रहे नहीं संबंध अब पहले जैसे आपकी अपेक्षाएं और विश्वास ही कष्ट अधिक देते हैं उम्मीदों का दौर अब खत्म हुआ अपने पैरों को मजबूत आप ही बनाए रखें भरोसा दिलाते…

  • जीवन धारा | Kavita jeevan dhaara

    जीवन धारा ( Jeevan dhaara )   हर्ष उमंग खुशियों की लहरें बहती जीवन धारा। मेहनत लगन हौसला धरकर पाते तभी किनारा।   भावों की पावन गंगा है मोती लुटाते प्यार के। पत्थर को भगवान मानते सुंदर वो संस्कार थे।   इक दूजे पे जान लुटाते सद्भावों की पावन धारा। क्या जमाना था सुहाना बहती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *