Jo Kuch Umda

जो कुछ उम्दा | Jo Kuch Umda

जो कुछ उम्दा

( Jo kuch umda) 

 

नया / पुराना / अभी का/ तभी का

जो कुछ भी है/ जहांँ भी/कहीं का/

हर क्षेत्र का/ हर विधा का/

बस वही रहे /जो है उम्दा

सर्वप्रिय/ मंगलकारी

सत्यम/ शिवम/ सुंदरम सा

जिससे हो अपना/ देश का भला

बाकी सब /उखाड़ फेंको

 बाहर का/ दरवाजा दिखा दो।

कांँच नहीं /  हीरे बनो / जौहरी भी।।

 

@अनुपमा अनुश्री

( साहित्यकार, कवयित्री, रेडियो-टीवी एंकर, समाजसेवी )

भोपाल, मध्य प्रदेश

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कविताएंँ रहेंगी | Kavitayen

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