दोषी कौन

दोषी कौन?

“अरे बेटा, तू राजू का दोस्त है ना?” राह चलते एक महिला ने रोहित को रोकते हुए पूछा।

“हाँ जी, बताइए। कोई खास बात?” रोहित ने पूछा।

“तुझे तो पता ही होगा कि राजू ने अपनी पत्नी सोनिका को शादी के 6 माह बाद ही मारपीट करके घर से बाहर क्यों निकाल दिया?”

“कैसी बातें कर रही हो? सोनिका भाभी के साथ राजू ने मारपीट की? मुझे तो बिल्कुल यकीन न हो रहा। इस बारे में मुझे कुछ नहीं पता आंटी जी।” रोहित ने हैरानी से जवाब दिया।

“कैसा दोस्त है? मैं तो तुम चारों दोस्तों (सुशील, राजू, करन और तुम्हें) को रोज एक साथ शाम में घूमते देखती हूँ।इसलिए मैंने सोचा कि तुम दोस्तों को तो सब पता ही होगा कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया? खैर छोड़ो… तुम्हें तो यह भी ना पता होगा कि सोनिका ने राजू पर हिंसा, दहेज उत्पीड़न व तलाक का मुकदमा भी दर्ज करवा दिया है।” यह कहकर वह महिला आगे बढ़ गई।

हैरान रोहित सोच में पड़ गया कि इतनी बड़ी बात आखिर राजू ने हम तीनों दोस्तों से क्यों छुपाई?.. जबकि हम चारो शाम को लगभग 1 घण्टा साथ रहते हैं, एक साथ टहलते हैं, ऑफिस, घर, परिवार की समस्याओं पर चर्चा करते थे और उन समस्याओं का हल निकालने की कोशिश करते हैं। राजू भी हमारी बातें सुनकर अपनी राय/मशवरा हमें दिया करता है।

रोहित ने तुरन्त ही सुशील और करन को फोन पर उस महिला द्वारा कही गई बात को बताया। फिर तीनों दोस्तों ने फैसला किया कि वे आज शाम को राजू से मिलकर, उसकी समस्या जानकर… उसकी समस्या हल करने की कोशिश करेंगे… आखिर दोस्ती का यही मतलब होता है। दोस्त ही दोस्त के काम आते हैं।

शाम को सुशील ने फोन करके राजू को अपने घर पर बुलाया। वहां पहले से ही रोहित व करन मौजूद थे।

“राजू भाई, तेरे और भाभी के बीच कुछ अनबन हो गई है क्या? आज सुबह मुझे एक महिला मिली और उसने मुझे बताया कि भाभी के साथ तुमने अभद्र व्यवहार किया, उनको मारा पीटा और उनको घर से बाहर निकाल दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि भाभी जी ने तुम पर मुकदमा कर दिया है और तुमसे तलाक मांग रही है? मुझे उस महिला की बात पर रत्ती भर यकीन नहीं है। मैं तेरे मुंह से सच सुनना चाहता हूं कि आखिर बात क्या है? ऐसा क्या हुआ जो बात इतनी बढ़ गई और तुमने हम दोस्तों को कोई बात बताना उचित ना समझा?” बातचीत की शुरुआत करते हुए रोहित ने राजू से वजह पूछने की कोशिश की।

“मुझे इस बारे में तुमसे कोई बात नहीं करनी। तुम इस बारे में मुझसे बात ही ना करो तो ज्यादा अच्छा है।” राजू ने दोस्तों को जवाब दिया।

“ऐसा क्यों बोल रहे हो? हम यहां तेरी समस्या सुनने और उसका हल निकालने के इरादे से आए हैं।” अब बोलने की बारी करन की थी।

“मुझे अपनी समस्या तुम लोगों से हल नहीं करवानी।” राजू बोला।

“यह तो बाद की बात है। पहले यह बता कि समस्या क्या है? सुशील बोला।

“एक बार बोला ना कि मेरी पारिवारिक और व्यक्तिगत जिंदगी से तुम सब दूर रहो। मुझे तुम लोगों से कुछ भी डिस्कस नहीं करना।”

“वही तो हम जानना चाहते हैं कि तुझे अपनी समस्या हमें क्यों नहीं बतानी? रोज हमारे साथ घूमता है और हमें इस बात की भनक तक नहीं लगने दी कि तेरे और भाभी के बीच में गड़बड़ हो गई है। यह तो बहुत गलत बात है। जिस तरह हम अपनी दैनिक समस्त समस्याओं को मिलकर रोज हल करते हैं, वैसा ही तुझे भी करना चाहिए था पर तूने नहीं किया।” रोहित ने कहा।

“मैंने तुमसे कब कहा कि तुम सब अपनी निजी समस्याओं को, परिवार की बातों को मुझे बताओ, मेरे सामने रखो। यह तो तुम खुद ही मुझे बताते हो। यह तुम्हारी गलती है। इसे मेरी कोई गलती नहीं है।” राजू बोला।

“अरे भाई, यह कैसा जवाब हुआ? क्या तू हमारा दोस्त नहीं है? दोस्ती का मतलब या अर्थ… पता भी है तुझे? तुझे पता भी है कि तू क्या बोल रहा है? किससे बोल रहा है? होश में भी है तू?” गुस्सा करते हुए करन बोला।

“मैं होशोहवास में हूँ। मुझे तुमसे कोई बात डिस्कस नहीं करनी। मेरे साथ रहना है, मुझसे दोस्ती रखनी है तो रखो, वरना अपना काम करो। मैं कब कहता हूँ कि अपनी निजी, व्यक्तिगत पारिवारिक बातों को मुझसे शेयर करो।” राजू ने दो टूक जवाब दिया।

“तेरी बातों से तो यही लगता है कि निश्चित ही सारी गलती तेरी होगी, तू ही गलत होगा… तभी तो हमें कुछ भी बताने से परहेज कर रहा है।” सुशील बोला।

“यही समझ ले कि सब गलती मेरी है, लेकिन यह बात अच्छी तरह समझ लो कि तुम लोगों से मुझे इस बारे में कोई बात नहीं करनी।” यह बोलकर राजू उठ गया और घर से बाहर निकल गया।

इस घटना के बाद रोहित, सुशील और करन से राजू ने दूरी बना ली। राजू ने अकेला रहना और उनसे कुछ भी बताने से परहेज करने का निर्णय लिया था। उधर रोहित, करन व सुशील ऐसी दोस्ती बिल्कुल नहीं चाहते थे, जिसमें कोई व्यक्ति साथ तो रहे लेकिन अपनी कोई बात डिस्कस ना करें। वे जानते थे कि सच्ची दोस्ती में विश्वास, समर्थन, समझदारी और साथ रहना शामिल होता है। दोस्त एक दूसरे के सुख-दुख में साथ रहते हैं और एक दूसरे की मदद करते हैं। सच्ची दोस्ती में कोई स्वार्थ नहीं होता है। दोस्त एक दूसरे के प्रति ईमानदार और सच्चे होते हैं। सच्ची दोस्ती जीवन को सुखी और अर्थपूर्ण बनाती है।

इस बात को धीरे-धीरे 3 वर्ष बीत गए। अक्सर राजू राह चलते तीनों दोस्तों से टकरा जाता था। उनमें आपस में दुआ सलाम होती थी और फिर सब अपने-अपने रास्ते चले जाते थे लेकिन परिवार के बारे में कोई बातचीत नहीं होती थी।

एक दिन रोहित, सुशील और करन तीनों ने राजू को बाइक पर एक महिला और एक, एक वर्ष की बच्ची के साथ बाजार में घूमते देखा। देखने से ही पता चल रहा था कि वह महिला राजू की बेहद खास है। हम सोच में पड़ गए कि आखिर वह महिला है कौन? और वह बच्ची कौन है?

राजू ने हमसे कभी उस महिला से मुलाकात के बारे में कोई भी जिक्र कभी नहीं किया था। तीनों दोस्तों ने राजू व उस महिला के बारे में जानकारी निकलवाई तो पता चला कि वह महिला राजू की पत्नी रश्मि है और वह 1 वर्षीय लड़की राजू की बेटी है।

यह भी पता चला कि ग्रेजुएशन करने के दौरान, राजू व रश्मि एक दूसरे के प्यार में पड़ गए थे। राजू उससे शादी करना चाहता था, लेकिन परिवार के दबाव के चलते उसने मजबूरन सोनिका से शादी बेशक कर ली थी, लेकिन वह रश्मि को भुला ना पाया था। वह लगातार रश्मि के सम्पर्क में रहा।

शादी के बाद भी उसके रश्मि से अवैध संबंध बन रहे। राजू की शादी के बारे में जानकर रश्मि उससे बहुत नाराज भी हुई थी। लेकिन फिर एक दिन उन्होंने परिवार को बिना बताए कोर्ट मैरिज कर ली। अब सोनिका को रास्ते से हटाने के लिए उन्होंने एक प्लान बनाया।

राजू ने सोनिका को प्रताड़ित करना, उसके साथ हिंसा करना, मारपीट करना, बात-बात पर तानें देना, कमेंट करने शुरू कर दिया था ताकि वह उससे परेशान होकर घर छोड़कर चली जाए। लेकिन सब कुछ बर्दाश्त करते हुए सोनिका राजू के घर पर ही रही। फिर एक दिन सर्द अंधेरी रात में राजू ने सोनिया को मारपीट कर घर से बाहर निकाल कर गेट बंद कर लिया।

बेचारी सोनिका आधी रात में जैसे तैसे अपने घर पहुँची और उसने अपने परिवार को अपने साथ हो रही ज्यादतियों के बारे में बताया। सोनिका के परिवार ने राजू को समझाने की कोशिश की लेकिन उसने उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया व सोनिका को अपने साथ रखने से साफ इनकार कर दिया।

उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह सोनिका के साथ नहीं रह सकता। उसने सोनिका पर चरित्रहीन होने का इल्जाम लगाते हुए कहा कि उसे सोनिका से तलाक चाहिए। सुलह का कोई रास्ता नज़र न आने पर मजबूरन सोनिका व उसके परिजनों ने राजू द्वारा सोनिका के साथ हिंसा करना, दहेज हेतु उत्पीड़न करने व तलाक लेने का मुकदमा दर्ज करवा दिया।

लगभग 3 वर्ष मुकदमा चला तब जाकर उनका तलाक हुआ। उधर राजू रश्मि के संपर्क में लगातार बना रहा। उसकी बेटी भी पैदा हो गई लेकिन राजू और उसके परिजनों ने यह बात मुकदमे का फैसला आने तक सबसे छुपाकर रखी। फिर जब एक बार मुकदमा फाइनल हो गया, राजू का सोनिका से तलाक हो गया… तब सार्वजनिक रूप से राजू, रश्मि के साथ हर जगह नजर आने लगा।

तलाक हो जाने तक राजू ने रश्मि को एक बड़े शहर में किराए के मकान पर छुपा कर रखा। राजू का घर तो फिर से आबाद हो गया लेकिन सोनिका का क्या? उसकी जिंदगी की बलि आखिर क्यों दी गयी? उसकी आगे की जिंदगी कैसे कटेगी? अब कौन उससे शादी करेगा? सोनिका की दुर्गति के पीछे आखिर दोषी कौन था? राजू, रश्मि या राजू के घरवाले? यह प्रश्न विचारणीय है।

देखा जाए तो वर्तमान परिदृश्य में तलाक के मुकदमे बढ़ते जा रहे हैं। पति, पत्नी की हत्या करवा रहा है और पत्नी, पति की हत्या करवा रही है। इसका कारण कहीं ना कहीं शादी से पहले या शादी के बाद अवैध संबंधों का होना है… जो बाद में तलाक का, बेगुनाह व्यक्तियों की मौत का कारण बनता है।

बेहतर यह होगा कि बाद में दिक्कतों से बचने के लिए, शुरूआत में ही हिम्मत करके लोगों को अपने लव अफेयर्स के बारे में परिजनों को स्पष्ट रूप से बता देना चाहिए, उनसे अपने संबंधों के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए, यही उचित होगा।

परिजनों को भी सब कुछ जानने के बाद, अपने बच्चों की दूसरी जगह जबरन शादी करने व अपने बच्चों की ऑनर किलिंग में मरवाने से बचना चाहिए, यह बिल्कुल गलत है। यह बंद होना चाहिए ताकि किसी बेगुनाह की जिंदगी बर्बाद न हो, उसे जान से हाथ न धोना पड़े।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • स्वयंसिद्धा | Kahani Swayamsidha

    जीत ने जैसे ही घर का ताला खोल घर मे प्रवेश कदम रखा कि मोहल्ले की औरतों ने भी उसके साथ प्रवेश किया। वे सब उससे उसका हाल चाल पूछ रही थीं और वह बड़े संयत ढंग से उन सभी के प्रश्नों का उत्तर देती जा रही थी। लगभग दो घण्टो के बाद भीड़ छंटनी…

  • मुझको पहचाने | Mujhko Pahchane

    मुझको पहचाने  ( Mujhko Pahchane ) हवा में ऐसे उड़ाऊँगा अपने अफ़साने ज़माने भर का हरिक शख़्स मुझको पहचाने मिज़ाजे-दिल भी कहाँ तक मेरा कहा माने छलक रहे हैं निगाहों से उसकी पैमाने मुझे सलाम यूँ करते हैं रोज़ रिंदाने बुला बुला के पिलाते हैं मुझको मैख़ाने मैं महवे जाम न होता तो और क्या…

  • आँखों में बसी हुई चाँदनी सी | Laghu Katha

    स्कूल की जिंदगी की कहानी कुछ और होती है, कुछ कहानी दूर तक सफर तय करती है तो कुछ सिमट कर वहीं की वहीं रह जाती है अपने आप में। किंतु दूर की करती कहानी अपनी अलग पहचान छोड़ जाती है। शेखर ने हाई स्कूल में दाखिला लिया तो क्लास नौ से दस तक जाते-जाते…

  • “Kidnap”- एक क्राइम कथा

    मेरे तैयार होते ही एक कॉल आया और सामने से आवाज आई! प्लीज मुझे बचा लो यह लोग मुझे मार डालेंगे! मैं आवाज पहचान नहीं पा रहा था। तभी किसी ने रिसीवर उसके हाथ से छीन लिया और नीचे पटक दिया। मैं बुरी तरह से चौंक गया। मैं समझ गया था किसी लड़की की जान…

  • निवेश

    एक था धनीराम और एक था सुखीराम। दोनों में गाढ़ी मित्रता थी। दोनों ही शुगर के मरीज थे। दोनों की माली हालत अच्छी नहीं थी। उन्होंने साथ में बहुत काम किये लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर उनके किसी मित्र ने उन्हें प्रॉपर्टी(जमीन) खरीदने-बेचने के काम की सलाह दी और बताया कि जमीन के रेट दिन…

  • कटे हुए अंगूठे की बात | Kate Hue Anguthe ki Baat

    “प्रणाम गुरूवर।” घीसा ने अपने गुरू महेश्वराचार्य को विनम्र भाव से सिर झुकाते हुए कहा। ” आरे घीसा तुम, बहुत दिनों बाद आए, कहो कैसे आना हुआ, तुम्हारा?” गुरू महेश्वराचार्य ने आश्चर्य चकित होते हुए निश्छल भाव से पूछा। “गुरूवर, आज गुरू पूर्णिमा है, सोचा दूर रहकर स्मरण करने से अच्छा है कि चल कर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *