गिरदावरी

गिरदावरी | Girdawari

शहर के नए पटवारी सोहनलाल जी हाल ही में ज्वाइन होकर अपने आफ़िस में काम पर आए थे । अगले महीने राज्य के मुख्यमंत्री जी स्वयं उनके शहर आने वाले थे, क्योंकि मुख्यमंत्री जी को पिछले साल मौसम के कारण ख़राब हुई फ़सल के लिए वहाँ के चुनिंदा किसानों को मुआवजा राशि वाले चेक प्रदान करने थे ।

फाइलों की जांच के दौरान पटवारी साहब को पता चला कि किसी रामलाल नामक किसान के पास लगभग 14 एकड़ ज़मीन है और हर बार मौसम की वजह से या फिर अन्य किसी आपदा के कारण उसकी फ़सल लगातार ख़राब हो रही है । पटवारी साहब ने सोचा इस व्यक्ति के साथ लगातार बहुत दुःखदायी घटना घट रही है।

इससे एक बार ज़रूर मिलना चाहिए । पटवारी साहब अपनी सरकारी गाड़ी में बैठकर उस गाँव की ओर चल दिए, उन्होंने रास्ते में बहुत से लोगों से पूछा कि रामलाल का खेत कहाँ पड़ेगा परंतु किसी को रामलाल के बारे में कुछ नहीं पता था ।

रास्ते में उन्होंने एक बुजुर्ग से पूछा-
“अरे, वही रामलाल ! जिसकी फ़सल ख़राब हुई है । ”
उसने उत्तर दिया-” मैं 70 साल का हो लिया, पर म्हारे यहाँ कोई रामलाल नी है- जिसकी फ़सल खराब होई हो …”
और अधिकतर ग्रामीणों का भी आश्चर्य से यही उत्तर होता-‘साहब हम किसी रामलाल को नहीं जानते…आपके मुँह में छाले‌ं पड़े ! हमारे यहाँ तो राज्य में सबसे अच्छी फ़सल होती है…’

उन्होंने फाइल को दोबारा चेक किया और उसमें खेत की लोकेशन के लिए दिए गए लोंगिट्यूड और लैटीट्यूट को मोबाइल पर सर्च किया तो वह एक निश्चित स्थान पर पहुँचे । परन्तु उस जगह पर तो एक फार्महाऊस और बड़ा-सा गोदाम बना हुआ था ।

जैसे ही फार्म हाउस के मालिक अर्थात गाँव के प्रधान जी को पता चला कि हमारे शहर का पटवारी उनके फार्म हाऊस के पास आ पहुँचा है तो उन्होंने तुरंत उसे चाय-पानी के लिए आमंत्रित किया ।

दोपहर का समय हो गया था और पटवारी जी को भूख भी लगी थी इसलिए पटवारी जी प्रधान जी ने उनके निमंत्रण को स्वीकार कर लिया । पटवारी साहब की खातिरदारी के बाद प्रधान जी ने उन्हें अपना फार्महाउस, गोदाम और नई बनने वाली फैक्ट्री दिखाई ।

जैसे ही पटवारी साहब विदा लेने लगे तभी उन्हें ध्यान आया कि जिस मुख्य काम के लिए वह यहाँ आए थे वह तो भूल ही गए । तभी उन्होंने जाते-जाते प्रधान जी से पूछ ही लिया,” प्रधान जी मैं तो असल में यहाँ पर गिरदावरी के लिए आया था,आपके गाँव में कोई रामलाल नाम का अभागा किसान है जिसकी लगभग 14 एकड़ की फ़सल इस बार भी ख़राब हो गई है। मुख्यमंत्री जी स्वयं उस गरीब किसान से मिलकर उसे विशेष सहायता राशि देना चाहते हैं ।”

प्रधान जी ने झेंपते हुए, हल्की मुस्कुराहट के साथ कहा,”हुज़ुर…इस दास को ही किसान रामलाल कहते हैं !”

कवि : संदीप कटारिया

(करनाल ,हरियाणा)

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