Kahi Unkahi

कही अनकही | Kahi Unkahi

कही अनकही

( Kahi Unkahi )

 

बीत जाता है वक्त
रह जाती है सिर्फ उनकी यादें
धुंधलाते से चेहरे
और कहीं अनकही बातें

तब होता नहीं महसूस कुछ
प्रेम ,क्रोध या नाराजगी
तड़पाती हैं वे ही बहुत
जब बीत जाता है वक्त
रह जाती है एहसास की बातें

न आता है फिर वह वक्त कभी
न आते हैं जा चुके लोग कभी
रह जाते हैं नासूर बन चुके गिले शिकवे
जब बीत जाता है वक्त
रह जाती हैं पछतावे की बातें

कभी मिलना नहीं होता
अतीत वर्तमान नहीं होता
भविष्य रह जाता है खड़ा अकेला
आंसुओं से भारी पलकों में
जब बीत जाता है वक्त
ढक जाती है धुंध में सारी बातें

रह जाती हैं तो सिर्फ उनकी यादें
धुंधलाते चेहरे
और कहीं अनकही बातें

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

किराए की मस्ती | Kiraye ki Masti

Similar Posts

  • घुटन | Ghutan

    घुटन ( Ghutan )    भीतर की घुटन जला देती है जिंदा शरीर किताब के पन्नों में लगे दीमक की तरह खामोश जबान को शब्द ही नहीं मिलते शिकायत के लिए अपनों से मिले दर्द दिखाये भी नहीं जाते बताएं भी सुख जाते हैं आंसू पलकों में ही उन्हें बहाने की भी इजाजत नहीं होती…

  • मेरा दोस्त मुझसे रूठा ऐसा | Kavita mera dost

    मेरा दोस्त मुझसे रूठा ऐसा ( Mera dost mujhse rootha aisa )    आज फिर एक-बार हुआ ऐसा, मेरा दोस्त मुझसे रूठा है ऐसा। ना बोलकर गया न खबर दिया, दिल के दुखः गम सब पी गया।।   चला गया मुझको ऐसे छोड़कर, वापस नहीं आऍंगा वो लौटकर। सेना में जीवन का खेल निराला, कौन…

  • दीवानगी | Deewangee

    दीवानगी ( Deewangee )   शराब तो नहीं पीता मैं पर रहता हूं उसके नशे में चूर हरदम वह ऐसी चीज ही लाजवाब है कि नशा उतरता ही नहीं बड़ी हसीन तो नहीं पर दीवानगी का आलम यह कि सर से पांव तक भरी मादकता से उतरती ही नहीं सोच से पूरी कायनात भी फीकी…

  • हिन्दू सो रहा है | Hindu so Raha Hai

    हिन्दू सो रहा है ( Hindu so raha hai )    करो तुम शान्ति से प्रतिकार,हिन्दू सो रहा है। भुला करके सभी इतिहास, हिन्दू सो रहा है। अपने धरम को बाँध कर,अपनी शिखा को काट कर, मर्यादा सारे त्याग कर…. हिन्दू सो रहा है… हिन्दू सो रहा है…. हिन्दू सो रहा है.. करो तुम शान्ति…

  • थोड़ा उदास हूँ

    थोड़ा उदास हूँ   पिछले कई दिनों से मन थोड़ा #उदास रहने लगा है समझ नहीं आ रहा कि क्या करें हम एक ही बात बार-बार #मन में हर बार आ रही है कि हर बार मेरे ही साथ ऐसा क्यूँ होता है..?   उन्हीं की बातों को #दिल से लगाकर विचारों की #मथनी चलती…

  • कुदरत | Kudrat

    कुदरत ( kudrat )    युगों-युगों से निसर्ग की दुनिया दीवानी, चलो आज लिखते हैं कुछ नई कहानी। बाँहें फैलाए खड़ी है ये कुदरत, छेड़ते हैं बातें कुछ उसकी रूहानी। अल्हड़ हवाएँ,वो उड़ते परिन्दे, जगह -जगह छोड़ी है अमिट निशानी। झीलों का देखो वो झलकता बदन, बातें बहुत हैं उसकी आसमानी। नदियों का बहना, नदियों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *