Kahin kisi mod par

कहीं किसी मोड़ पर | Kahin kisi mod par | Kavita

कहीं किसी मोड़ पर

( Kahin kisi mod par )

 

फूल खिलने मन मिलने लगे महक गई वादियां
मनमीत मिले संगीत सजे लो होने लगी शादियां
आओ आओ सनम मिलो प्रेम की हसीं रोड पर
फिर मिलेंगे हम जाने कब कहीं किसी मोड़ पर

 

राहे खुल सी गई बातें घुल सी गई जुबां पे सनम
मनमयूरा हमारा झूम उठा देख तुम्हारे बढ़ते कदम
हवाओं की खुशबू से महका मन ताजगी जोड़ के
आशाओं के दीप जला मिलेंगे कभी किसी मोड़ पे

 

वो नजारे हसीं महकती वादियां मिलने को सनम
दिल की बातें मधुर सुहाने वो पल याद करते हम
सीमाएं सरहद ना बांधे तुझे आ जाओ तोड़कर
दिल यह कहता मिलेंगे हम कभी किसी मोड़ पर

 

गीत नगमे तराने वो प्यार के मन में उठने लगे
मोहक झरने सुहाने बहारों के जब झरने लगे
चले ना जाना यूं ही हमसे फिर मुंह मोड़कर
रखो धीरज प्रिये हम मिलेंगे कभी किसी मोड़ पर

 

मन के जुड़ जाये तार जब संगीत बने प्यार के
दो दिलों की धड़कन जब मौसम खिले बहार से
चले आना मत रुकना तुम जग की किसी हौड़ से
यह वादा हमारा हम मिलेंगे कभी किसी मोड़ पे

 

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

 

चुगली रस | Chhand in Hindi

Similar Posts

  • बहना | Kavita Bahna

    बहना ( Bahna ) जीवन को महकाती बहना हर ग़म को सह जाती बहना । मां की ममता स्नेह पिता का सब हम पर बरसाती बहना ।।१। गोद लिए टहलाती बहना अक्षर ज्ञान कराती बहना । डगमग करते पाँव कभी तो उँगली पकड़ चलाती बहना ।।२। गलती पर गुर्राती बहना प्रेम सहित समझाती बहना ।…

  • कर गया है वो बेआबरु आज फ़िर

    कर गया है वो बेआबरु आज फ़िर     कर गया है वो बेआबरु आज फ़िर! प्यार की जब की है  गुफ़्तगू आज फ़िर   देखकर मोड़ लेता था चेहरा अपना हो गया वो चेहरा रु -ब -रु आज फ़िर   भूलकर दर्द ग़म जिंदगी के सभी कर रहा हूँ ख़ुशी जुस्तजू आज फ़िर  …

  • मैं विकलांग नहीं हू | Main Viklang nahi Hoon

    मैं विकलांग नहीं हू ( Main viklang nahi hoon )   कुछ लोग हँसते हैं, जबकि अन्य बस देखते रहते हैं। कुछ लोग सहानुभूति भी रख सकते हैं, लेकिन वास्तव में किसी को परवाह नहीं है। मेरे पैर नहीं हैं, और स्थिर नहीं रह सकता. हाँ, मैं अलग हूँ, लेकिन मैं विकलांग नहीं हूं. कुछ…

  • उन्माद भरा बसन्त

    उन्माद भरा बसन्त फ़रवरी की धूप में, सीढ़ियों पर बैठ कर, शरद और ग्रीष्म ऋतु के,मध्य पुल बनाती धूप के नामलिख रही हूँ ‘पाती’आँगन के फूलों परमंडराती तितलियाँ ,पराग ढूँढती मधुमक्खियाँ,गुंजायमान करते भँवरेमन को कर रहे हैं पुलकित हे प्रकृति!यूँ ही रखनायह मन का आँगन आनंदितसुरभित, सुगन्धितमधुमासी हवा का झोंकागा रहा है बाँसुरी की तरहहृदय…

  • यही सच्चाई है जिंदगी की

    यही सच्चाई है जिंदगी की ———-&&——   कभी दुखों का सैलाब तो  कभी खुशियों की बारिश है जिंदगी  कभी मां-बाप की डांट फटकार, तो कभी लाड ,प्यार का एहसास है जिंदगी कभी भाई बहन का झगड़ना तो कभी प्यार ,हंसी-खुशी है ज़िंदगी, कभी समाज की आलोचनाएं तो कभी मिली प्रोत्साहन है जिंदगी, कभी लोगों से…

  • नशा कुर्सी का | Kavita nasha kursi ka

    नशा कुर्सी का ( Nasha kursi ka )     नर झूम-झूम गाता नशा कुर्सी का छा जाता चंद चांदी के सिक्कों में बहुमत नेता पाता   कुर्सी का चक्कर ऐसा सत्ता के गलियारों में वादे प्रलोभन सीखो भाषण दो हजारों में   समीकरण सारे हो कुछ प्यादे हमारे हो जोड़-तोड़ राजनीति राजनीतिक वारे हो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *