Kar Prayas

कर प्रयास | Kar Prayas

कर प्रयास

( Kar prayas )

 

क्या जीत में,
क्या हार में
तेरा अस्तित्व है
तुझसे ही संसार में।।

कर्म पथ पर करता चल
अपने कर्म से पूर्ण हर मनोकामना
तेरी हार में भी जीत निश्चित ही होगी
होगी यह भी एक संभावना।।

तू ढूंढ निकल कर कोई समाधान
आए जब कोई भी तूफान
न थक्कर यूं बैठ तू जा
कर प्रयास कर प्रयास
तेरा अभ्यास ही तेरी साधना ।।

 

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/buddh-hona-chahti-hoon/

Similar Posts

  • Hindi Poetry | नयन

    नयन ( Nayan )     नयनाभिराम नयना, ना नींद है ना चैना। बेकल नयन अधीर है, काटे न कटे रैना।   मन साँवरे में लीन है,उनसे नही ये कहना। आयेगे  तो पूछूँगी  मै, बितायी कहाँ रैना।   जहाँ प्रेम है विरह भी है,राधा जहाँ है कृष्णा। फिर क्यों तडप रहा है मन,सन्तुष्ट नही तृष्णा।…

  • आँसू | Aansoo

    आँसू ! ( Aansoo )    हजारों रंग के होते हैं आँसू, जल्दी दफन कहाँ होते हैं आँसू। जंग तो हिला दी है सारे जहां को, खाते हैं गम औ बहाते हैं आँसू। ये रोने की कोई बीमारी नहीं, पलकों को तोड़कर बहते हैं आँसू। आँख का खजाना खत्म हो रहा, रोती जमीं है निकलते…

  • मेरा बचपन | Poetry On Bachpan

    मेरा बचपन ( Mera bachpan)   वो रह रह कर क्यों याद आता है मुझे वो मेरा बचपन जो शायद भूल मुझे कहीं खो गया है दूर वो मेरा बचपन… वो पापा की बातें मम्मी का झिड़कना इम्तिहान के दिनों में मेरा टीवी देखने को ज़िद करना…. कितना मासूम था भोला था वो कितना न…

  • गला कटे तत्काल | Gala Kate Tatkal

    गला कटे तत्काल ( Gala Kate Tatkal ) कत्ल करे दुश्मन बने, बदल गई वो चाल। करके देखो नेकियाँ, गला कटे तत्काल।। जो ढूंढे हैं फायदा, उनका क्या परिवार। संबंधों की साधना, लुटती है हर बार।। नकली है रिश्ते सभी, नहीं किसी में धीर। झूठी है सद्भावना, समझेंगे क्या पीर।। सब कुछ पाकर भी रहा,…

  • मुर्दे की अभिलाषा | Kavita Murde ki Abhilasha

    मुर्दे की अभिलाषा ( Murde Ki Abhilasha )   लगी ढ़ेर है लाशों की टूट चुकी उन सांसों की लगी है लंबी कतार, बारी अपनी कब आएगी? कब खत्म होगा इंतजार? जीवन भर तो लगे ही लाईन में, अब लगे हैं श्मशान में। हे ईश्वर! मानव जीवन कितना कष्टमय है? जीवन तो जीवन मृत्यु पर…

  • मांँ जीवन की भोर | Maa poem in Hindi

    मांँ जीवन की भोर ( Maa jeevan ki bhor )   मांँ तो फिर भी मांँ होती है हर मर्ज की दवा होती। आंँचल में संसार सुखों का हर मुश्किलें हवा होती।   मोहक झरता प्रेम प्यार बहाती पावन संस्कार से। आशीष स्नेह मोती बांटती माता अपने दुलार से।   मांँ की ममता सुखसागर पल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *