Karwa Chauth Poem in Hindi

करवा चौथ पर कविता | Karwa Chauth Poem in Hindi

करवा चौथ पर कविता

( Karwa Chauth par kavita )

( 5 )

मिट्टी से बने बर्तन और चतुर्थी कृष्ण पक्ष कितना प्यारा,
सुहागिन स्त्रियां खास विधान पूजा करती श्रृंगार न्यारा।
करती श्रृंगार,चूड़ी,कंगन,बिंदिया,सिंदूर,मेहंदी हाथों पर,
शतायु हो,खुशियां हों जीवन में,अमर रहे सुहाग हमारा।।

चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती खुशियां मांगती जीवन में,
कामना करती,गणेश जी खुशियां रहे जीवन के उपवन में।
चंद्र दर्शन के बाद ही जल ग्रहण करके तोड़ती हैं व्रत अपना,
आंटा छन्नी से पति का दर्शन करती,पुलकित होती मन में।।

करक चतुर्थी नाम संस्कृत में, करवा सबके मन को भाती है,
हर सनातनी स्त्रियां इस त्यौहार पर मंगल-कामना करती हैं।
भगवान शिव,माता पार्वती,गणेश,कार्तिकेय की पूजा करके,
बाद में करवा माता और चंद्रमा पूजन, व्रत पूर्ण करती है।।

स्नान कर सुहाग की आरोग्य,सौभाग्य का संकल्प लेती है,
दिनभर निराहार रहती, दीर्घायु हो पति कामना करती हैं।
शुद्ध घी में,आटे में शक्कर,खांड,मिलाकर नैवेद्य हैं बनाती,
नैवेद्य और जल,वस्त्र सहित दक्षिणा माता को चढ़ाती हैं।।

करवा चौथ,करवा देवी और करवा के पति की कहानी है,
करवा चौथ की कहानी जग में सबसे न्यारी व प्यारी है।
करवा देवी और उनके पति,तुंगभद्रा नदी के किनारे रहते थे,
अनेकों दंत कहानियां हैं, जो सच्चाई को सामने लातीं है।।

प्रभात सनातनी राज गोंडवी
गोंडा उत्तर प्रदेश

( 4 )

दीप जला निज मन का तुम,
भावों से श्रंगार करो।
प्रीति के रंग में खुद को रंग के,
हर दिन को तुम मनोहार करो।
दिन विशिष्ट है करवा चौथ का,
पति का तुम आभार करो।
अंजान से तुमको जान बनाया,
इसका तुम मन में भान रखो।
अपने घर की बागडोर संग,
खुद को भी तुमको सौंप दिया।
उसके इस बलिदान को तुम,
मन से प्रिये स्वीकार करो।
चूड़ी कंगना मेंहदी महावर,
सब उसकी ही पहचान है।
उसके बिना तो जीवन क्या,
सूना पूरा संसार है।
आज के दिन निर्जल व्रत रहकर,
पूरा संस्कृति का विधान करो।
पर मन में दृढ़ संकल्प भी लेलो,
मुुश्किल में खुद को ढाल करो।
बनकर उसकी अर्धांगिनी तुम,
स्व सर्वस्व को उसपर वार करो।

अंजलि श्रीवास्तव “अनु “

( 3 ) 

आता करवा चौथ का त्यौहार,
संग लाता है खुशहाली अपार,
साल भर करती सभी सुहागिनें
इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार ।

सजना संवरना सोलह सिंगार,
पिया मिलन को हो के बेकरार,
भले हो जाती भूख से व्याकुल
फिर भी करती सिर्फ फलाहार।

सुहागिनों को इससे विशेष प्यार,
सबसे अनूठा इनका त्यौहार,
रात को करके पूजा चंद्रमा की
पति को नज़रों से करती प्यार।

संग मिलकर दोनों लेते आहार,
इसी से बढ़ता उनके बीच प्यार
यही होती परिणीता की कामना
खुशियों से भरा रहे उसका संसार।

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

( 2 ) 

कार्तिक मास की चतुर्थी का दिन है शुभ आया,
सब सुहागिनों देखे इस दिन चांद में पति की छाया।

करवाचौथ के व्रत में जो भी करवा मां का पूजन करे,
अमर सुहाग रहे उसका पति नित नव उन्नति करे।

करक चतुर्थी का यह दिन कहलाता है करवाचौथ,
इससे पति पत्नि के प्रेम समर्पण का उगता नया पौध।

करवाचौथ का यह पावन व्रत जो भी नारी रखे,
व्रत के प्रताप से पति को संकटों से दूर रखे।

दिन भर भूखी प्यासी रह पत्नि व्रत पूजन करे,
रात्रि में चंद्र दर्शन करके पति संग पूजन करे।

सुहागिनों के इस व्रत पूजन को पूर्ण करने आते चंद्रदेव,
देते आशीष सदा सलामत सुहाग रहे सदैव सुखी पतिदेव।

करवाचौथ का यह व्रत है निश्चित फल देता,
पति पत्नी के जीवन को प्रेम प्यार से भर देता।।

रचनाकार  –मुकेश कुमार सोनकर “सोनकर जी”
रायपुर, ( छत्तीसगढ़ )

( 1 ) 

उपासना परम स्तर,अखंड दांपत्य वर पाने को

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी बेला,
नारी जगत मंगल पथ ।
स्पंदन विमल उर भाव,
खुशहाल वैवाहिकी मनोरथ ।
करवा चौथ व्रत अद्भुत सेतु,
जन्म जन्मांतर साथ निभाने को ।
उपासना परम स्तर,अखंड दांपत्य वर पाने को ।।

करवा चौथ इतिहास अनूप,
नारी पतिव्रता अग्नि परीक्षा ।
सुफलित व्रत स्तुति दिव्यता ,
वचन अटल जीवन रक्षा ।
तदंतर परंपरा भव्य निर्वहन,
पति अथाह प्रेम जताने को ।
उपासना परम स्तर,अखंड दांपत्य वर पाने को ।।

कर श्रृंगार भव्य हिना,
देह मनमोहक परिधान ।
मुस्कान मोहिनी धर अधर,
आलिंगन धर्म आस्था विधान ।
परिवेश अप्रतिम जगमगाहट,
उरस्थ अनंत खुशियां रमाने को ।
उपासना परम स्तर,अखंड दांपत्य वर पाने को ।।

पत्नी पति अंतर भावना,
नित समानता अभिवंदन
परस्पर स्नेह आदर सम्मान,
संबंध आत्मिक सुरभि चंदन ।
कदम नित्य अग्र तत्पर,
अतरंग वाटिका महकाने को ।
उपासना परम स्तर, अखंड दांपत्य वर पाने को ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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