कौन हूँ मैं?

कौन हूँ मैं | Kavita

कौन हूँ मैं?

( Kaun hoon main kavita )

 

सहमी सहमी कमजोर नहीं हूं
भीगी भीगी ओस नहीं हूं
आसमान पर उड़ने वाली
चंचल चितवन चकोर नहीं हूँ

 

कोमल कच्ची डोर नहीं हूं
अनदेखी से उड़ने वाली
शबनम सम छोटी बूँदों जैसी
खुशबू भीनी हिलौर नहीं हूं

 

कुछ जुमलों से डर जाउंगी
ऐसी भी कमजोर नहीं हूं
उड़ती चिड़िया खुले गगन की
आदि अंत से परे उडूँ मैं

 

नीले अंबर से ऊपर के
सभी सितारे छूकर गिनू मैं
मुट्ठी में बंद है उड़ान हौसलों की
स्वप्नों का सत्य जहान हासिल है

 

अनचाहे अनसुलझी डगर का
राज अन्जाना सा मैं ही हूँ
हाँ अन्तर्मन की आवाज मैं ,
कोई और नहीं ,मैं ही हूँ

☘️☘️


डॉ. अलका अरोड़ा
“लेखिका एवं थिएटर आर्टिस्ट”
प्रोफेसर – बी एफ आई टी देहरादून

यह भी पढ़ें :

नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना | Kavita

Similar Posts

  • उठे जब भी कलम

    उठे जब भी कलम ***** लिखेंगे सच सच हम, खाएं सब कसम! लाज साहित्य की बचायेंगे, किसी प्रलोभन में न आयेंगे। न बेचेंगे अपनी कलम, लेखनी से जनांदोलन छेड़ेंगे हम। उठाएंगे बेबस मजदूरों की आवाज, चाहे महिलाओं की मान सम्मान की हो बात। भ्रष्टाचार रूपी दानव को- लेखनी के दम पर हराएंगे, किसानों की बात…

  • नैनो का अंदाज़ जुदा | Nain par Kavita

    नैनो का अंदाज़ जुदा ( Naino ka andaz juda)    आंखें सबकी एक जैसी देखने का अंदाज़ जुदा। नज़ाकतें भांति भांति की नजरें होती जब फिदा। कोई तिरछी नजरें झांके टिक टिक नजर गढ़ाए। ललचाई आंखों से कोई मन ही मन मलाई खाए। नेह सी आंखों से झरते अनमोल मोती प्यार भरे। खुल जाते दिल…

  • अंतर्मन की बातें | Kavita

    अंतर्मन की बातें ( Antarman ki baatein )   अंतर्मन की बातें निकल जब, बाहर आती हैं। हर पल बदलती जिंदगी, कुछ नया सिखाती है।।   खुशी से हर्षित है ये मन, निशा गम की छा जाती है । कभी बिछुड़न बना है दर्द, मिलन से खुशियां आती है।।   कभी ऐसे लगे जीवन ,खुशनसीब…

  • बंधित | Bandhit

    बंधित ( Bandhit )    कल वो फिर नही आई मेरी काम वाली बाई और मैं सोचती रही क्या हुआ होगा पेट दर्द, सिर दर्द, हाथ दर्द या पैर में पीड़ा.. रोज सुबह चाय का कप साथ पीने के बहाने जब बैठा देती हुँ उसे काम के बीच रोककर देखती सुनती हुँ उसे तब उठती…

  • एक शादी ऐसा भी | Ek Shadi Aisa Bhi

    एक शादी ऐसा भी ( Ek Shadi Aisa Bhi ) अनंत-राधिका की शाही शादी को देखा, करोड़ों की कुबेर में लिपटते हुए देखा , हालीवुड,वालीवुड को थिरकते हुए देखा, राजनयिकों,राजाओं की अगुवाई को देखा, योग के शलाकपुरूष का योगाभ्यास को देखा, काशी विश्वनाथ के मठाधीशों को देखा, गरीब-गुरबे ,भूखों की आहट को न सुना ।…

  • चहुंओर युद्ध हो रहे हैं | Chahunor

    चहुंओर युद्ध हो रहे हैं ( Chahunor yudh ho rahe hai )    चहुंओर युद्ध हो रहे हैं बात सब बुद्ध की कर रहे हैं चहुंओर अधर्म का है जोर और धर्म का सब तरफ है शोर कथनी करनी में इतना भेद हे मानव ! मानस में तेरे कितने छेद? समझ से है परे तब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *