Kavita Agar tu

अगर तू जो एक किताब है

अगर तू जो एक किताब है

तुम्हें पढ़ना चाहता हूं
तेरे हर एक पन्ने को
अगर तू जिंदगी है
जीना चाहता हूं
आहिस्ता-आहिस्ता पूरी उम्र
अगर तू फूल है
तो मैं तेरा रंग बनना चाहता हूं

अगर तू जो एक किताब है
तुम्हें पढ़ना चाहता हूं
तेरी तस्वीर में बिखरे रंगों का
एक एहसास बनना चाहता हूं
हां तेरा इतिहास बनना चाहता हूं

अगर तू जो एक किताब है
तुम्हें पढ़ना चाहता हूं
एक-एक दिन बिताई है जो तुमने
कई सदियां की तरह
तेरे सूखे हुए होठों की
मुस्कान बनना चाहता हूं

हां तेरे किताब के
लिखें हुए पन्ने की
इबादत बनना चाहता हूं

तूं जो एक किताब है
तुम्हें पढ़ना चाहता हूं

 नवीन मद्धेशिया

गोरखपुर, ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

महिलाएं | Mahilayen

Similar Posts

  • बलिदान | Kavita

    बलिदान ( Balidan )   क्या है आजादी का मतलब देश प्रेम वो मतवाले लहू बहाया जिन वीरों ने बलिदानी वो दीवाने   मातृभूमि पर मिटने वाले डटकर लोहा लेते थे देश भक्ति में ऐसे झूले फांसी तक चढ़ लेते थे   जलियांवाला बाग साक्षी अमर कथा उन वीरों की वंदे मातरम कह गए जो…

  • वो नन्ही सी चींटी | Cheenti par kavita

    वो नन्ही सी चींटी ( Wo nanhi si cheenti )   एक ना एक दिन ज़रूर आता है चींटी का भी वक्त, हिला देती है वो नन्हीं सी चींटी ताज और ये तख्त। समय पलटते देर न लगता किसी का भी उस वक्त, परेशानियां दूरी बना लेती चाहे वह हो बहुत सख़्त।। वो परमपिता सभी…

  • क्या खूब दिन थे!

    क्या खूब दिन थे! बड़ा मजा आता था बचपन में,खलिहान हमारा घर हो जाता,सुबह से लेकर रात तक,मस्ती ही मस्ती सुहाती! धान की सटकाई,पोरे की बँधाई,आटा सारे बँध जाने पर,पुआल का गाझा बनता! शाम पहर धान के गट्ठर पर,गोबर का पिण्ड रखा जाता,सांझ के दीपक से,मॉ अन्नपूर्णा को पूजा जाता! खलिहानों में दोपहर में,महिला मजदूरों…

  • क्या होता है पिता

    क्या होता है पिता क्या होता है पिता, यह अहसास होता है तब। बनता है जब कोई पिता, अनाथ कोई होता है जब ।। क्या होता है पिता—————————।। रहकर मुफलिसी में पिता, बच्चों को भूखे नहीं रखता। छुपा लेता है अपने दर्द और आँसू, खुश बच्चों को वह रखता।। भूलाकर बच्चों की गलती ,पिता ही…

  • उम्मीदों का दामन | Umeedon ka Daman

    उम्मीदों का दामन ( Umeedon ka daman )   उम्मीदों का दामन यूं कभी ना छोड़िए। उम्मीद पे दुनिया टिकी मुंह ना मोड़िए। आशाओं के दीप जला खुशियां पाईए। प्यार के अनमोल मोती जग में लुटाइए। हारकर जो थक चुका हौसला बढ़ाइए। बढ़कर जरा थामिए हमें यूं ना गिराइए। मिलने को है आतुर थोड़ा शीघ्र…

  • सावन आया | Sawan Aaya

    सावन आया  नयी चेतना  नयी जाग्रत  अंतर्मन में  नया भाव कुछ  मन को भाया, गूॅंज उठे स्वर झूॅंम उठे वन प्रकृति ने भी  नव मधुरस का  पान कराया, लतिकाएं तरु आलिंगन कर  लिपट लिपट कर  नतमस्तक  साभार जताया, रिमझिम रिमझिम  बूॅंदें जल की  छोड़ गगन को  उतर धरा पर  उपवन का  संसार बसाया, स्पर्श प्रेम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *