Dard Apne Sanam

दर्द अपने सनम | Kavita Dard Apne Sanam

दर्द अपने सनम

( Dard Apne Sanam )

दर्द अपने सनम पराए क्यों हो गए।
रिश्ते हमने है निभाए क्यों खो गए।

पीर पर्वत से भारी हुई क्यों सनम।
खुशियां बांटी हमने छुपाए है गम।

खिल जाता चेहरा देख हमको जरा।
दिल दीवाना कहो कहां वो प्यार भरा।

बदली दुनिया तुम ना बदलना सनम।
कैसे जी पाएंगे बोलो बिन तुम्हारे हम।

बेरुखी भी निभाना ना पाओगे सनम।
प्यार सच्चा है खुद चले आओगे सनम।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

नयनों के तारे आजा | Naino ke Tare Aaja

Similar Posts

  • मोहब्बत उसे भी थी | Prem Kavita

    मोहब्बत उसे भी थी ( Mohabbat use bhi thi )   हां मोहब्बत उसे भी थी, वो प्यार का सागर सारा। उर तरंगे ले हिलोरे, अविरल बहती नेह धारा।   नेह सिंचित किनारे भी, पल पल में मुस्काते थे। मधुर स्नेह की बूंदे पाकर, मन ही मन इतराते थे।   कोई चेहरा उस हृदय को,…

  • ऐ अँधेरे | Ai andhere kavita

    ऐ अँधेरे ( Ai Andhere )   ऐ अँधेरे तूने मुझे बहुत रुलाया है समेट कर सारी रोशनी मुझे सताया है तुझ से दूर जाने के किये बहुत यतन जाने क्यूं मेरी जिन्दगी को बसेरा बनाया है ऐ अँधेरे तूने वाकयी बहुत रुलाया है समेट कर सारी रोशनी मुझे सताया है कौन सी धुन मे…

  • India Republic Day Kavita | गणतंत्र दिवस

    गणतंत्र दिवस ( India Republic Day )   भारत माता के मस्तक पर, रोली अक्षत चंदन की। संविधान के पावन पर्व पर, वंदन और अभिनंदन की।   वर्षों के तप और धैर्य से, वीरों के लहू और शौर्य से, माताओं के जिन पुत्रों ने, चलना सही न सीखा था, अंग्रेजों से लड़ लड़ कर, ये…

  • स्वर्ग-नर्क | Poem in Hindi on Swarg narak

    स्वर्ग- नर्क ( Swarg – Narak )   स्वर्ग है या नर्क है कुछ और है ये। तूं बाहर मत देख तेरे ठौर है ये।। तेरे मन की हो गयी तो स्वर्ग है। मन से भी ऊपर गया अपवर्ग है। आत्मतत्व संघत्व का सिरमौर है ये।। तूं बाहर० मन की अभिलाषा बची तो नर्क है।…

  • मां दुर्गा के प्रथम रूप | Maa Durga ke Pratham Roop

    मां दुर्गा के प्रथम रूप ( Maa durga ke pratham roop )    मां दुर्गा के प्रथम रूप पर, सारा जग बलिहारी शैलपुत्री मंगल आगमन, सर्वत्र आध्यात्म उजास । नवरात्र शुभ आरंभ बेला, परिवेश उमंग उल्लास । योग साधना श्री गणेश, साधक मूलाधार चक्र धारी । मां दुर्गा के प्रथम रूप पर, सारा जग बलिहारी।।…

  • पराजय | Parajay

    पराजय ( Parajay )    खड़े हो उम्र की आधी दहलीज पर ही अभी ही कर लिया समझौता भी वक्त से यह तो है ,पराजय ही स्वीकार कर लेना लेने होते हैं कुछ निर्णय भी सख्त से अभी ही न मानो हार तुम,उठा आगे बढ़ो ऊंचा नही है शिखर कोई,नियमित चढ़ो दुहराओ न गलतियां ,फिर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *