Naino ke Tare Aaja

नयनों के तारे आजा | Naino ke Tare Aaja

नयनों के तारे आजा

( Naino ke Tare Aaja )

 

नयनो के तारे आजा, बुढ़ापे के सहारे आजा।
दूध का कर्ज चुकाने, बेटे फर्ज निभाने आजा।
नयनो के तारे आजा

खूब पढ़ाया तुमको, लाड लडाया तुमको।
अंगुली पकड़कर, चलना सिखाया तुमको।
तुतलाती बोली प्यारी, शीश झुकाने आजा।
ताक रही आंखें रस्ता, झलक दिखाने आजा।
नयनो के तारे आजा

तूने खूब कमाया पैसा, ना कोई तेरे जैसा।
दूर जाकर भूल गया, बदल गया तू कैसा।
गांव की हवा खाजा, बाबूजी की दवा लाजा।
टूट गया है छप्पर, ढांढस हमको बंधावाजा।
नयनो के तारे आजा

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

भगवान सिर्फ लकीरें देता है | Kavita Bhagwan Sirf

Similar Posts

  • मैं अकेला इक काफिला हूं | Geet Main Akela

    मैं अकेला इक काफिला हूं ( Main akela ek kafila hoon )    मैं अकेला इक काफिला हूं, चलता जाता मौज में। गीत रचता नित नया, काव्य शब्द चुनता ओज के। वीरों महावीरों रणवीरों की, तरुणाई जगाने चला हूं। राष्ट्रधारा में देशभक्ति की, वीर गाथा सुनाने चला हूं। मैं अकेला इक काफिला हूं हल्दीघाटी हुंकार…

  • मनभावन | Manbhawan

    मनभावन ( Manbhawan ) मनभावन प्रतिबिम्ब तुम्हारे ,जब सुधि में उतराये हैं ।पाँव तले कंटक भी हों यदि हम खुलकर मुस्काये हैं ।। क्या दिन थे वे जो कटते थे लुकाछिपी के खेलों मेंबन आती थी अनायास जब मिल जाते थे मेलों मेंचूड़ी ,कंगन ,बिंदिया, गजरा देख-देख हर्षाये हैं ।।मनभावन ————— बागों में हर दिवस…

  • सावन में | Geet Sawan Mein

    सावन में ( Sawan Mein ) मधुर मिलन का ये महीना। कहते जिसे सावन का महीना। प्रीत प्यार का ये महीना, कहते जिसे सावन का महीना। नई नबेली दुल्हन को भी, प्रीत बढ़ाता ये महीना।। ख्वाबों में डूबी रहती है, दिन-रात सताती याद उन्हें। रिमझिम वारिश जब भी होती, दिलमें उठती अनेक तरंगे। पिया मिलन…

  • इंसान हूॅं मैं इंसान हूॅं | Insaan Hoon Main

    इंसान हूॅं मैं, इंसान हूॅं ( Insaan hoon main, insaan hoon )  इंसान हूॅं मैं, इंसान हूॅं । जितना खुश उतना ही परेशान हूॅं।। इंसान हूॅं मैं, इंसान हूॅं… इक उमर तक नहीं सौ साल तक लड़ता रहा हूॅं, मैं हर हाल तक कभी ढूढता हूॅं गुलिस्तां-अमन कभी फूंक देता हूॅं हॅंसता चमन अनजान हूॅं…

  • शिव का सजा दरबार सावन में | Shiv ka Saja Darbar

    शिव का सजा दरबार सावन में ( Shiv ka saja darbar sawan mein )    जल भर लोटा हाथों में सजा लो कावड़ भक्तों। भोले शिव का करो ध्यान उठा लो कावड़ भक्तों। हर-हर महादेव सब बोलो बढ़ते चलो वन वन में। त्रिनेत्र त्रिशूलधारी सदाशिव भोलेनाथ रखो मन में। शिव का सजा है दरबार सावन…

  • शत: शत: प्रणाम | Geet Shat Shat Pranam

    शत: शत: प्रणाम ( Shat Shat Pranam ) हिमालय की शान को, माँ, गंगा की आन को, सागर के सम्मान को, झरनों की मधुर तान को इंद्रधनुषी आसमान को, मेरे वतन की शान को शत: शत: प्रणाम है, मेरा शत: शत: प्रणाम है !! १ !! गीता और कुरआन को वेदो को और पुराण को,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *