Kavita holi aayi

होली आई | Kavita holi aayi

होली आई 

( Holi Aayi )

 

होली आई, होली आई

रंग-बिरंगी ख़ुशियाँ लाई ।

 

हाथों में लें लो पिचकारी,

रंग डालने की करो तैयारी ।

 

पानी से भर रखें हैं ग़ुब्बारें

दिल में उठे प्रेम की फुहारें ।

 

सबके चेहरे रंगों से भरे हैं,

मस्ती में सब झूम रहे हैं ।

 

छोटे-बड़े का छोड़ों ख़्याल

सबके गालों पे डालों गुलाल ।

 

मिठाइयाँ-पकवान खूब खाएँगे

सब मिल-जुलकर होली मनाएँगे ।

 

?

कवि : संदीप कटारिया

(करनाल ,हरियाणा)

Similar Posts

  • यूं ना मुस्कुराया करो | Yun na Muskuraya Karo

    यूं ना मुस्कुराया करो ( Yun na muskuraya karo )    हमसे मिलकर तुम यूं ना मुस्कुराया करो। मुस्कानों के मोती यूं हम पर लुटाया करो। हंसता हुआ चेहरा मन को मोहित कर जाता। हंसी की फुलझड़ियां सबको दिखाया करो। लबों की ये मुस्कान क्या गजब ढहाती है। दिल तक दस्तक देती झंकार सुनाया करो।…

  • लालसा | Poem laalasa

    लालसा ( Laalasa )   लालसा न चाह का है  ,जीवन में कुछ पाने को लालसा न बड़ा बनू, न बहुत कुछ कर जाने को छीन कर खुशियां किसी की, रोटियां दो वक्त की मैं चलूं तारों को लाने,छोड़ इन्हें मर जाने को धिक्कार है जीवन को ऐसे,धिक्कारता हूं लोग को जो अपनी ही खुशियों…

  • मौन | Kavita maun

    मौन ( Maun )   एक समय के बाद बहुत उत्पीड़न अन्तत: मौन की ओर हमें ले जाता है। और मौन? निराशा की ओर। निराशा किसी अपने से नहीं, ईश्वर के किसी निर्णय से नहीं। मात्र खुद से। अकेले रहते रहते हमारी आत्मा इतनी कुण्ठित होती जाती है, कि हमारा क्रोध, प्रतिशोध, आकाँक्षायें सब कुछ…

  • नशामुक्त अभियान | Nasha Mukt Abhiyan

    नशामुक्त अभियान ( Nasha mukt abhiyan )    सबको मिलकर रचना है इतिहास हिन्दुस्तान में, नामुमकिन कुछ नहीं इंसानों के लिए जहान में। दीप ज्ञान का जलाना‌ है ये लिया क़लम हाथ में, नशीलें-पदार्थ ना आनें देंगे हिन्ददेश महान में।। जीतेंगे यह युद्ध भारतीय नशामुक्त अभियान में, बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू जला देंगे श्मशान में। नही…

  • तु खुदकी खोज में निकल | Tu Khud ki Khoj mein Nikal

    तु खुदकी खोज में निकल ( Tu khud ki khoj mein nikal )    तु खुदकी खोज में निकल, तुझे किसकी तलाश हैं, तु निराशा के बादलोसे आशा का सावन है ।। तु कोहिनूर सा हिरा है, तुझे क्यों सितारो की तलाश है। तु खुद हमराही है, हमसफर क्यो तलाश है । तु खुद सावन…

  • घर | Ghar par kavita

    घर ( Ghar )   सोने बैठने रहने का ठिकाना है सबसे सुंदर आशियाना है घर।। जहां मां बाप भाई हैं बेटा बेटी और लुगाई है जहां अपने है जीवन के सपने हैं जहां हर तरह का बहाना है ऐसा ठिकाना है घर….. थक हार कर जब स्कूल से आते हैं घर पर ही आराम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *