Kavita holi aayi
Kavita holi aayi

होली आई 

( Holi Aayi )

 

होली आई, होली आई

रंग-बिरंगी ख़ुशियाँ लाई ।

 

हाथों में लें लो पिचकारी,

रंग डालने की करो तैयारी ।

 

पानी से भर रखें हैं ग़ुब्बारें

दिल में उठे प्रेम की फुहारें ।

 

सबके चेहरे रंगों से भरे हैं,

मस्ती में सब झूम रहे हैं ।

 

छोटे-बड़े का छोड़ों ख़्याल

सबके गालों पे डालों गुलाल ।

 

मिठाइयाँ-पकवान खूब खाएँगे

सब मिल-जुलकर होली मनाएँगे ।

 

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कवि : संदीप कटारिया

(करनाल ,हरियाणा)

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