Kavita magarmach ke aansoo

मगरमच्छ के आंसू | Kavita magarmach ke aansoo

मगरमच्छ के आंसू

( Magarmach ke aansoo )

 

 

दिखावे की इस दुनिया में लोग दिखावा करते हैं

घड़ियाली आंसू बहाकर जनमन छलावा करते हैं

 

मगरमच्छ के आंसू टपकाते व्यर्थ रोना रोते लोग

अपना उल्लू सीधा करते मतलब से करते उपयोग

 

भांति भांति के स्वांग रचाते रंग बदलते मौसम सा

बात बात में जहर घोलते मौका खुशी या गम का

 

छल कपट सीनाजोरी से जिनका गहरा नाता है

मगरमच्छ के आंसू बहाना जिनको खूब आता है

 

मधुर रसीली बातों के पारंगत होते वो चतुर लोग

गिरगिट भांति रंग बदलते विद्वत्ता का करते ढोंग

 

झूठी संवेदना जताकर जा दिलों में बस जाते हैं

मक्कारी जिनका आभूषण सज्जनता जताते हैं

 

जिनसे काम पड़ा फिर देखो मगरमच्छ के आंसू

लच्छेदार मीठी सब बातें हो भाषण जिनके धांसू

 

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

बुलंद हुंकार | Poem Buland Hunkar

Similar Posts

  • लोहड़ी आई रे

    लोहड़ी आई रे लोहड़ी आईसभी जनों बधाईहर्ष उल्लास गाना बजानाखान पान संग होपंजाबी गीत। खूब जलेगीफुले रेवड़ी अग्नि मेंअर्पित होंगे। नाचेंगे सारेमहफिल सजेगीआग के बीच। मुबारक होनव जोड़ो लोहड़ीकी सौगात हो। खुशियों डेराजात पात का भेदमिटाना आज। लोहड़ी आईसुंदरी मुंदरी केगीत गायेगे। लता सेन इंदौर ( मध्य प्रदेश ) यह भी पढ़ें :-

  • वाह भाई वाह | Wah Bhai Wah

    वाह भाई वाह ( Wah Bhai Wah )   बालपन से बनना चाहतें कवि-लेखक साहित्यकार, मन में थी उनके ऐसी आशा उसको किया साकार। तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो से बनाएं पहचान, शैलेश लोढ़ा नाम है जिनका सपनें किया साकार।। ९ वर्ष की उम्र में जिन्होंने बाल-कवि उपनाम पाया, ये साहित्य की प्रेरणा इन्होंने…

  • जनमत हूं शान हूं | Janamat

    जनमत हूं शान हूं ( Janamat hoon shaan hoon )    लोकतंत्र का सजग सिपाही जनमत हूं शान हूं। मैं राष्ट्र का नागरिक हूं मैं मानवों में महान हूं। लोकमत के लोकहित में लोकतंत्र गुण गाता है। प्रजातंत्र में प्रजा हित को शासन दौड़ा आता है। मैं भारतवासी जन गण संस्कृति स्वर गान हूं। राष्ट्रधारा…

  • मैं थानेदार हूँ | Thanedar par kavita

    मैं थानेदार हूँ! ( Main thanedar hoon )   जो कानून का आँचल फाड़ते हैं, मैं उन्हें फाड़ता हूँ। ऐसे मजनुओं का जुनून मैं, जूतों से कुचलता हूँ। मैं सेवक हूँ आम जनता का, हर जुल्म का प्रहार हूँ, मैं एक थानेदार हूँ।   हर आग से देखो मैं हूँ वाकिफ , जलना मुझे आता…

  • भारत के | सजल

    भारत के ( Bharat ke ) तुम हो वीर सपूत महान भारत के बढाते हो तुम्हीं सम्मान भारत के ।।1। निछावर करते प्राण, मोह नहीं करते तुम विश्व-गुरु अभियान हो भारत के ।।2। मौत का कफन बांध लडते हो वीर तुम भारती-सपूत लाल महान भारत के ।।3। मातृभूमि की मिट्टी लगे सबसे अनमोल, कण-कण है…

  • कविता जीवन की परिभाषा है

    कविता जीवन की परिभाषा है दिल को छूकर कविता धड़कन बन जाती हैजुदाई में किसी रूह की तड़पन बन जाती हैबच्चा हंसता है तो कविता होठों पर मुस्काती हैहर किसी की आह में खुदा का खत बन जाती है। जब कोई बच्ची बस पानी पीकर सो जाती हैभूख की दारुण दशा देख कविता रो जाती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *