मनमंदिर

मनमंदिर | Manmandir par Kavita

मनमंदिर

( Manmandir )

 

आस्था विश्वास रहते, प्रेम सद्भाव बहते।
मनमंदिर में जोत,  जगाते चले जाइए।

 

महकते  पुष्प  खिले,  खुशबू जग में फैले।
शब्द मोती चुन चुन, रिश्तों को महकाइये।

 

चंदन अक्षत रोली, धूप दीप नैवेद्य से।
जगत करतार की, सब आरती गाइए।

 

मोदक माखन मेवा, मिश्री अरु नारियल।
छप्पन भोग प्रभु को, मुदित हो लगाइए।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

 

लीलाधारी श्रीकृष्ण | Kavita

Similar Posts

  • पहचान | Kavita

    पहचान ( Pehchan )   प्रेम के मोती लुटाओ प्रतिभा कोई दिखाओ पहचान  जग  में  कोई  नई  बनाईए सफलता मिल सके पर्वत भी हिंल सके जंग  भरी  दुनिया  में  हौसला  बनाइए लगन से मेहनत रंग जरूर लाएगी पहचान जग में आप ऐसी बनाईए पूर्वजों की साख में चार चांद लग जाए कर्म  पथ  पर  अपनी …

  • कुर्सी | Kavita Kursi

    कुर्सी ( Kursi ) पद एवं कुर्सी का मुद्दा देशभक्ति, रोज़ी -रोटी से भारी हो गया ऐसा फ़रमान दिल्ली से जारी हो गया मर चुकी जन सेवा देश सेवा की भावना कुर्सी एवं पद के लिए ओछे हथकंडे घटिया दांव -पेंच कल का जनसेवक कलियुग का जुआरी हो गया वास्तविकता पर जब भी चलाई है…

  • वो घास हैं

    वो घास हैं पाश हो या सफदर हाशमीया हो फिर भगत सिंहइन तीन नाम में छिपे हैं कई और नामडराया गयाधमकाया गयामारा गयाकोशिश की गई उनके विचारों को मिटाने कीक्या फिर भी मिट पाए ये नाम?क्या नेस्तनाबूद हुए उनके विचार ? वो तो घास हैंहर बार उग आते हैं कहीं ना कहींजो जगह कर दी…

  • सम्राटअशोक महान | Kavita Samrat Ashok

    सम्राटअशोक महान ( Samrat Ashok Mahan ) क्रांति की ताकत से, शांति का संदेश देवनांप्रिय चक्रवर्ती सम्राट, मौर्य राजवंश अनूप छवि । अखंड भारत साम्राज्य परिध, शक्ति ओज सदृश रवि । अंतर परिवर्तन बिंदु कलिंग, वरण बौद्ध धर्म नमन संजेश । क्रांति की ताकत से, शांति का संदेश ।। पितृसत्तात्मक शासन उपमा, लोक कल्याण परोपकार…

  • बातें

    बातें * करो सदा पक्की सच्ची और अच्छी! वरना… ये दुनिया नहीं है बच्ची, सब है समझती। समझाओ ना जबरदस्ती! बातें… ओछी खोखली और झूठी नहीं हैं टिकतीं। जगह जगह करा देतीं हैं बेइज्जती! सच्चाई छुप नहीं सकती, बेवक्त है आ धमकती! होश फाख्ता कर देती है, सिर झुका देती है। तेज़ ही उसकी इतनी…

  • दीबार | Deewar kavita

     “दीबार”  ( Deewar )   –>मत बनने दो रिस्तों में “दीबार” || 1.अगर खडी हो घर-आंगन, एक ओट समझ मे आती है | छोटी और बड़ी मिलकर एक, सुंदर आवास बानाती है | मत खडी होने दो रिस्तों मे, टकरार पैदा कारती है | हंसते गाते हमारे अपनों मे, दरार पैदा करती है | –>मत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *