Dridhta ka Sandesh

दृढ़ता का सन्देश | Dridhta ka Sandesh

दृढ़ता का सन्देश

( Dridhta ka sandesh ) 

 

हिमालय के ये शैल-शिखर
संकल्प शक्ति का पान किए।

मानो अविचल सिद्धांतो पर,
दृढ़ता का सन्देश लिए।

कल-कल निनाद करती गंगा,
जीवन- संगीत सुनाती हैं।

धरती के सुंदर समतल में,
गति का सन्देश बहाती हैं।

 

गीता शर्मा 

( हिमाचल प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

आती याद बहुत तू माँ | Maa ki Yaad Kavita

Similar Posts

  • अवध | Awadh par Kavita

    अवध ( Awadh )   रत्नजडित सिंहासन पर,अभिषेक राम का होगा। भारत की पहचान विश्व में, मन्दिर राम से होगा। भगवा ध्वँज पिताम्बर तुलसी, राम नाम गुँजेगा। शंख चक्र कोदण्ड धनुष संग,अवध नगर सँवरेगा। सरयू तट पर दीप करोडो, जगमग जग दमकेगा। भाव भक्ति से भरे भक्तों का,नयन मगर छलकेगा। रामचरित्र मानस गुँजेगा सरयू जी…

  • देखो, आई सांझ सुहानी

    देखो,आई सांझ सुहानी गगन अंतर सिंदूरी वर्ण, हरितिमा क्षितिज बिंदु । रवि मेघ क्रीडा मंचन, धरा आंचल विश्रांत सिंधु । निशि दुल्हन श्रृंगार आतुर , श्रम मुख दिवस कहानी । देखो,आई सांझ सुहानी ।। मंदिर पट संध्या आरती, मधुर स्वर घंटी घड़ियाल । हार्दिक आभार परम सत्ता, परिवेश उत्संग शुभता ढाल । परिवार संग हास्य…

  • बिखरा बिखरा |  Suneet Sood Grover Poetry

    बिखरा बिखरा ( Bikhara bikhara )   बिखरा बिखरा कतरा कतरा इधर उधर से जो मैं सहेजती हूँ संजोती हूँ   हवा का इक झोंका फिर उसे बिखरने को कर देता है मजबूर   दो हाथों में कभी आगोश में तो कभी दामन के पल्लू में   फिर उसे बचाती हूँ समेटती हूँ बाँध कर…

  • सलमान की सद्भावना | Salman par kavita

    सलमान की सद्भावना ! *****   आज धर्म के नाम पर सभी लड़ रहे हैं, काट और कट रहे हैं। देश को बदनाम और मानवता को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। इसी बीच सलमान खान ने दिया सुंदर संदेश, घर में ही स्थापित किया “गणेश”। हर साल की भांति इस साल भी सपरिवार ‘गणपति…

  • दिव्यांश मौर्य की कविताएँ | Divyansh Maurya Poetry

    मैं कविताएं तब लिखता हूं। मैं कविताएं तब लिखता हूं, जब मेरा मन रोने लगता। जीवन के दुःख दर्दों को जब , मन अश्रु से धोने लगता। मैं कविताएं तब लिखता हूं, जब मेरा मन रोने लगता। बोल नहीं जब मैं कुछ पाता, पर मन ही मन हूं चिल्लाता। जब मन भावुक हो जाता है,…

  • खत से इजहार | Kavita Khat se Izhaar

    खत से इजहार ( Khat se izhaar ) दिल की पीड़ा को नारी भली भाती जानती है। आँखों को आँखों से पढ़ना भी जानती है। इसलिए तो मोहब्बत नारी से शुरू होकर। नारी पर आकर ही समाप्त होती है।। मोहब्बत होती ही है कुछ इसी तरह की। जो रात की तन्हाई और सुहाने मौसम में।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *