प्यार चाहिए | Kavita Pyar Chahiye

प्यार चाहिए

( Pyar Chahiye )

प्यार को प्यार से देखो
तो प्यार बढ़ता है।
दिल को दिल से मिलाओं
तो दिल पिघलता है।
है बहुत से लोग यहां
जिनको प्यार मिलता नही।
तो क्या उनका जीवन
बिन प्यार के नीरस है।।

जो प्यार मोहब्बत को यारों
सिर्फ खेल समझते है।
वो हसीन सपनों से यारों
कोसों दूर रहते है।
इसलिए तो जिंदगी में
प्यार मोहब्बत जरूरी है।
बिना प्यार के ये जिंदगी
सच में अधूरी है।।

प्यार मोहब्बत का अंदाज
बहुत अलग होता है।
प्यार जिंदगी का बहुत
हसीन एक सपना है।
जो सभी को जीवन में
कहाँ नसीब होता है।
जिनको मिलता है मौका
जीवन भर खुश रहता है।।

Sanjay Jain Bina

जय जिनेंद्र
संजय जैन “बीना” मुंबई

यह भी पढ़ें :-

निर्णय लेना है | Kavita Nirnay Lena Hai

Similar Posts

  • पुरवा बयार बहे | Purwa bayar bahe

    पुरवा बयार बहे ( Purwa bayar bahe )   केतकी गुलाब जूही चम्पा चमेली, मालती लता की बेली बडी अलबेली। कली कचनार लागे नार तू नवेली, मन अनुराग जगे प्रीत सी पहेली।   पुरवा बयार बहे तेज कभी धीमीं, बगियाँ में पपीहे की पीप रंगीली। बारिशों की बूँदे बनी काम की सहेली, रागवृत रति संग…

  • भाई दूज पर्व | Bhai Dooj Parv

    भाई दूज पर्व ( Bhai dooj parv )    यम यमुना सा पावन, भाई बहन का प्यार कार्तिक मास शुक्ल द्वितीया, तिथि अद्भुत अनूप विशेष । सृष्टि रज रज विमल प्रवाह, भाई दूज खुशियां अधिशेष । परस्पर मंगलता कामना अथाह, शीर्ष वंदित परंपरा संस्कार । यम यमुना सा पावन, भाई बहन का प्यार ।। भाई…

  • धोखा | Dhokha kavita

    धोखा ( Dhokha )   दे गये धोखा मुझे वो, बीच राह में छोड़कर। प्रीत का रस्ता दिखा, चले गए मुंह मोड़कर।   महकती वादियां सारी, फूल भी सारे शर्माने लगे। उनकी बेरुखी को हमें, अक्सर यूं बतलाने लगे।   मन में उठती लहरें सारी, अब हो चली उदास सी। कल तक वो बातें मीठी,…

  • ख्वाबों में जलाएगी | Kavita Khwabon mein Jalayegi

    ख्वाबों में जलाएगी! ( Khwabon mein Jalayegi )    ये जिस्म नहीं है बस आग बुझाने के लिए, अंतिम है इसका लक्ष्य मोक्ष पाने के लिए। अपनों से जंग बताओ कोई क्या लड़ेगा, अगर करो भी सौदा तो हार जाने के लिए। होता है गम बाढ़ के पानी के जैसा दोस्तों, बस साँसें टिकाए रखो…

  • अंतर्राष्ट्रीय शाकाहारी दिवस | Shakahari divas par kavita

    अंतर्राष्ट्रीय शाकाहारी दिवस ( Antarrashtriya shakahari divas )    अपनी सभी बिमारियों को दूर आप भगाओ, आज अभी से शाकाहारी भोजन अपनाओ। देखते है इन्सान होने का प्रमाण कौन देते है, मांस मछली छोड़कर शाकाहारी बन जाओ।। जियो एवं जीने दो वन्यजीव पशु पक्षियों को, नहीं मारकर खाओ कोई भी इन्सान इनको। क्यों निमंत्रण दे…

  • और झनकन | Kavita jhanakan

    और झनकन ( Aur jhanakan )   तार वीणा के शिथिल इतनी स्पंदन और झनकन। बिना कंगन असह्य खनकन और झनकन।। शांत अन्तस्थल में कल कल की निनाद। चिरन्तन से अद्यतन तक वही संवाद। इतीक्षक कब होगा दरपन जैसा ये मन और झनकन।। बिना कंगन० करुण क्रंदन चीख बहती अश्रुधारा। जब विभू था सम्प्रभू था…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *