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राम का गलत वनवास हुआ | Kavita Ram ka Vanvas

राम का गलत वनवास हुआ

( Ram ka Galat Vanvas Hua )

 

हमें कुछ ऐसा एहसास हुआ
राम का गलत वनवास हुआ।
भरत तो थे नहीं अपने घर में
और भी माँए थी उस नगर में।
सबकी बनी भी सहमति होती
नहीं किसी की कोई क्षति होती।
विमाता का स्वार्थ खास हुआ
राम का गलत वनवास हुआ।।

विमाता का गलत निर्णय हुआ
राम का वन जाना तब तय हुआ।
जब भरत आए तो धधक उठे
भाई की ओर वह लपक उठे।
अश्रु बहा तो बहते रहा लगातार
राम को निरखते रहे वो बार-बार।
बोले माँ की बात को छोड़ो भैया
डूब जाएगी अपनी घर की नैया।
टूटे घर का कब विकास हुआ।
राम का गलत वनवास हुआ ।।

और चले सदाचार दिखाने राम
ले लो मेरे भाई तुम राज्य तमाम।
माँ की बात तुम ठुकराओ मत
ऐसा तुम त्याग दिखलाओ मत।
सबका चेहरा तब उदास हुआ।
राम का गलत वनवास हुआ।।

Vidyashankar

विद्या शंकर विद्यार्थी
रामगढ़, झारखण्ड

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