राम नवमी

Kavita | राम नवमी

राम नवमी

( Ram Navami )

 

भक्तवत्सल सत्य अविरल भूमिजा सुखधाम आये।
अयोध्या में राम आये,अयोध्या में राम आये।।
थी धरा सहमी हुयी बहु पापियों के पाप से,
हे प्रभू आकर बचालो इस विकट संताप से,
त्रास अवनी की मिटाने संतप्रिय श्रीधाम आये।।
अयोध्या में राम ०।।
नवमी तिथि नखत पुनर्वसु शुक्ल पक्ष विचार के,
ऋतुराज ने स्वागत किया था दोनों हाथ पसार के ,
अवधराज के प्राणप्रिय कौशिल्या के अभिराम आये।
अयोध्या में राम आये०।।
हेम मनिमय दीप मोती अवध आंगन स्वर्ग सा है,
धर्मध्वज अंशुमान वंसज का भवन अपवर्ग सा है ,
संत चित्त विलास विभु परमात्मा अविराम आये।।
अयोध्या में राम आये०।।
इन्द्र ने स्तुति किया नारद ने वीणा सुर मिलाया,
ब्रह्मा विष्णु महेश वसुगण ने मधुर संगीत गाया।।
पवन नाचे दा दिर दा रा शेषने सोहर सुनाये।।
अयोध्या में राम आये०।।

 

?

कवि व शायर: शेष मणि शर्मा “इलाहाबादी”
प्रा०वि०-नक्कूपुर, वि०खं०-छानबे, जनपद
मीरजापुर ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें : –

जबसे नजरें मिला के रखा है | Nazre Shayari

 

Similar Posts

  • मन एक परिंदा है | Poem man ek parinda hai

    मन एक परिंदा है ( Man ek parinda hai )   ये मन एक परिंदा है उड़ाने ऊंची भरता। स्वप्न लोक विचरण सकल विश्व करता।   मन के नयन हजार मन जाए सरिता के पार। पंखों को व्योम पसार घूमे सपनों का संसार।   कभी झूमता कभी नाचता मतवाला सा गाता। पंछी मनवा सैर सपाटा…

  • मूल पंजाबी कविता- अमरजीत कौंके | अनुवादक- डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक

    डॉ.अमरजीत कौंके पंजाबी साहित्य के आकाश पर ध्रुव तारे की तरह चमकता हुआ नाम है जिसकी रोशनी में पंजाबी साहित्य मालामाल हुआ है। उनकी रचनाएँ प्रेम के सरोकारों को नए दृष्टिकोण से परिभाषित करती हैं। उनकी कविता की विशेषता है कि यह पाठक से बड़ी ख़ामोशी से हम – कलाम होते हुए उस की रूह…

  • Ja-Ra-Mat Bhojpuri Kavita -जरअ मत !

    जरअ मत !  ** (भोजपुरी भाषा में) ******   ना त राख हो जइब, कोयला नियर खाक हो जइब। बाॅडी मास ( Body, Mass ) सब हो जाई हवा, एकर नइखे कवनो दवा। इ प्रकृति के नियम बा- जे जरी ऊ साफ होई, जरला पर राख होई। हवा उड़िया ले जाई, अस्तित्व तोहार मिटाई। त…

  • बसंत | Basant kavita

    बसंत ( Basant )   चंचल मन हिलोरे लेता, उमंग भरी बागानों में। पीली सरसों ओढ़े वसुंधरा, सज रही परिधानों में ।   मादक गंध सुवासित हो, बहती मधुर बयार यहां। मधुकर गुंजन पुष्प खिले, बसंत की बहार यहां ।   गांव गांव चौपालों पर, मधुर बज रही शहनाई है। अलगोजों पर झूम के नाचे,…

  • लालच बुरी बलाय

    लालच बुरी बलाय ***** सदैव हलाल की कमाई खाएं, किसी के आगे हाथ न फैलाएं। ऊपर वाला जिस हाल में रखें- ख़ुशी ख़ुशी जीवन बिताएं, आवश्यकता से अधिक न चादर फैलाएं; बस अपना काम ईमानदारी से करते जाएं। बरकत और अल्ल्लाह की रहमत- खुद चलकर आपके द्वार आए, फिर काहे को हाय हाय? सब जानते…

  • अटल के इरादे

    अटल के इरादे टलना मैंने सीखा नहीं,जिगर शेर-सा मैं रखता हूं।कायर नहीं जो पीठ दिखाऊं,अटल इरादे मैं रखता हूं।। प्रहरी हूं मैं भारतवर्ष का,तन हिमालय-सा मैं रखता हूं।तूफानों से ना कोई डर मुझे,अटल इरादे मैं रखता हूं।। सत्य,अहिंसा,शांति का,मूलमंत्र स्वीकार मैं करता हूं।मानवता की राह चलने का,अटल इरादे मैं रखता हूं।। शत्रु की सांसे मैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *