Kavita salika sikhayenge

सलीका सिखाएँगे | Kavita salika sikhayenge

सलीका सिखाएँगे!

( Salika sikhayenge )

 

हम सिर्फ जिन्दा रहे,तो मर जाएँगे,
देश के लिए जिएँ, तो जी जाएँगे।
मुबारक हो उन्हें जो सोते रुपयों पे,
हम तो वहाँ खाली हाथ जाएँगे।

 

तुम खफा न हो जमीं-आसमां से,
हम सितारे जमीं पे उतार लाएँगे।
अपने बसेरों से पंछी लौट न जाएँ,
हम उनका घोंसला खुद संवारेंगे।

 

चोरों की यहाँ कोई कमी नहीं,
ईमानदारी का शजर लगाएेंगे।
जादू की छड़ी से देश चलता नहीं,
तुम्हें तेजाबी कलम थमा जाएँगे।

 

मेरे हौसलों के पर मत काटो,
उजाला जमीं में हम बो जाएँगे।
कर्म से बनता आदमी अच्छा-बुरा,
इंकलाबी मशाल जला जाएँगे।

 

सियासी भाव से उसे मत तौलो,
उसके सत्य का सबूत दे जाएँगे।
ऐतबार नहीं उठा है दुनिया से,
हम फिर खपरैल के घर में जाएँगे।

 

लोग हैं तनाव में भूल से मुस्कुराते,
इंसानों की नई दुनिया बसाएँगे।
रोज-रोज काट रहे देखो दरख़्त,
कैसे बारिश का बिस्तर बिछाएँगे?

 

बादलों के टुकड़ों ने आग लगा दी,
उन्हें उड़ने का सलीका सिखाएँगे।
युद्ध है एक बला,खा गई सूरज-चाँद,
अपनों की खातिर कहकशाँ उगाएँगे।

 

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )
यह भी पढ़ें:-

बगावत नहीं होती | Kavita bagawat nahi hoti

Similar Posts

  • माँ | Maa Ke Upar Kavita

    माँ ( Maa )   खिली धूप से चमक रहे थे उसके बाल अनुभव की सिकुड़न रहती उसके माथे पर कड़वा तीखा बोलने की ताकत उसके लब पर मुस्कुरा कर फिर आ जाती तेरे एक बुलाने पर रिश्तो के ताने-बाने में उलझी रहती जीवन भर तरतीब से रखा हुआ सामान उसके होने का एहसास कराता…

  • एकता का प्रतीक

    एकता का प्रतीक एकता का प्रतीक मकर संक्रान्तिजिन्हें जानकर दूर होगी भ्रांतिसभी जाति ,संप्रदाय, पंथ वालोंमिलकर रहो बनी रहेगी शांति । तिल है कालाचावल है उजलाशक्कर है गेरूआमूंग है हरासभी है एक रस में घुला । चावल , दाल मसाले मिलकरसबने एक खिचड़ी बनाईयह पर्व मानव को सौंपकरऋषि, मनि एक बात सिखाई । भले हमारा…

  • भारत चांद पर छाया है | Bharat Chand par

    भारत चांद पर छाया है ( Bharat chand par chaya hai )     माना के तू चाँद है भारत में सिवान सोमनाथ है विक्रम राह से भटका था तू तनिक हाथ से छिटका था   ऑर्बिटर से घिरा है तू कैसा सरफिरा है तू ? विक्रम फिर से जुड़ जायेगा तू कहीं और ना…

  • करवा चौथ पर कविता | Karwa Chauth Poem in Hindi

    करवा चौथ पर कविता ( Karwa Chauth par kavita ) ( 5 ) मिट्टी से बने बर्तन और चतुर्थी कृष्ण पक्ष कितना प्यारा, सुहागिन स्त्रियां खास विधान पूजा करती श्रृंगार न्यारा। करती श्रृंगार,चूड़ी,कंगन,बिंदिया,सिंदूर,मेहंदी हाथों पर, शतायु हो,खुशियां हों जीवन में,अमर रहे सुहाग हमारा।। चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती खुशियां मांगती जीवन में, कामना करती,गणेश जी…

  • डॉ. चंद्र दत्त शर्मा की कविताएं | Dr. Chander Datt  Sharma Poetry

    रक्तदान – रागनी तरज मानी नी माई मुंडेर… रक्तदान तै बड़ा दान ना, सबने न्यूं समझा दयो।18 वर्ष की उम्र हुवे जब परोपकार मैं ला दयो ।।भाइयों रै, सजनों रै…. भाइयों रै, सजनों रै….। आदमी का दुनिया मैं ना सदा एक-सा बख्त होवैघायल हो या कोए बीमारी संजीवनी यू रक्त होवैबख्त होवै जब काम आण…

  • नारी की वेदनाएं

    नारी की वेदनाएं नारी को हि बोझ अपना समझ रहे हो क्यों ?गर्भ में हि कोख से उसे हटा रहे हो क्यों ? निर्जन पथ पर बचा न पाती अस्मत नारी,नोच रहे क्यों दानव बनकर नर बलात्कारी | दासी मानकर चाहते हैं गुल्लामी उसकी,कन्या को पूज कर चाहते हैं कृपा भी उसकी | अशिक्षित हि…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *