Kavita Shiksha ka Aadhar

शिक्षा का आधार | Kavita Shiksha ka Aadhar

शिक्षा का आधार

( Shiksha ka Aadhar )

 

इल्म की रौशनियाँ जग में जो फैलाते हैं,
ज़िन्दगी जीने का गुर जो हमें सिखाते हैं,

लड़खड़ाहती है , जब भी ज़ुबाने हमारी,
शिक्षक ही हर्फ-बा-हर्फ हमको रटाते हैं,

अलिफ़ से अल्लाह की पहचान कराते,
गीता बाईबिल में , ख़ुदा वही दिखाते हैं,

वालिदैन का दुनिया में कोई बदल नहीं,
मगर शिक्षक सबसे ऊँचा ओहदा पाते हैं!

Aash Hamd

आश हम्द

( पटना )

यह भी पढ़ें :-

इल्म की रौशनियाँ | Ilm ki Roshniyan

Similar Posts

  • सावन मास | Kavita Sawan Maas

    सावन मास ( Sawan Maas ) सावन के मास में वो, शिवजी पर जल ढारत है। बेल पत्ती और फूलों से, पूजा नित्यदिन करती हैं। मनोकामना पूरी कर दो, सावन के इस महीने में। मिलवा दो प्रभु अब मुझे, उस जीवन साथी से। जिसके सपने देख रही, मानो कितने वर्षों से। अब की बार खाली…

  • गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर | Rabindranath Tagore par Kavita

    गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ( Gurudev Rabindranath Tagore )   गुरू देव सादा जीवन जीनें वालें, नोबल पुरस्कार आप पानें वालें। रविन्द्र नाथ टैगोंर आप थें हमारें, साहित्य किंग जो कहलानें वालें।। महान शख्सियत और रचनाकार, ब्रह्म-समाज दार्शनिक चित्रकार। आध्यात्मिक एवंम् मर्यादा ज्ञाता, समाज सुधारक एवं संगीतकार।। धर्म परायण 13 बच्चों की माता, महान थी देवी…

  • मां सिद्धिदात्री | Maa Siddhidatri

    मां सिद्धिदात्री ( Maa Siddhidatri )    नवरात्रि का नवम दिन है माता सिद्धिदात्री का, जग पालन कर्ता सम्पूर्ण जगत की अधिष्ठात्री का। चतुर्भुजी स्वरूप में आती माता कमलासना, नवरात्रि व्रत पूर्ण होता इनकी करके उपासना। शंख पद्म चक्र गदा धारी अद्भुत रूप दिखलाए, इनकी पूजा जो भक्त करे वो सब सिद्धियां पाए। एक ओर…

  • विश्व तंबाकू निषेध दिवस

    विश्व तंबाकू निषेध दिवस   बस एक कदम, खुशियों की ओर तंबाकू सर्वदा हानिकारक, तन मन धन हीनार्थ बिंदु । विचलित दशा दिशाएं, दूरी यथार्थ आनंद सिंधु । क्रोध वैमनस्य घृणा संग, हर पल नैराश्यता सराबोर । बस एक कदम, खुशियों की ओर ।। तंबाकू मिश्रित विविध पदार्थ, सर्वत्र सहज सुगम उपलब्ध । आरंभ शौक…

  • होली में तेरी याद

    होली में तेरी याद गुलाल भी फीका, अबीर भी रूठा है,तेरे बिना हर रंग जैसे टूटा है।भीड़ में हूँ पर तन्हा खड़ा हूँ,तेरी हंसी के बिना हर मौसम सूखा है। जहां एहसासों के रंगों से तेरा चेहरा सजाता था,आज वही हाथ कांप सा जाता है।तेरी हँसी की गूंज कहाँ खो गई दिकु,अब तो हर खुशी…

  • सब मौन क्यों | Poem sab maun kyon

    सब मौन क्यों ? ( Sab maun kyon ) *****  गिरी जीडीपी! बढ़ी महंगाई, डीजल पेट्रोल के मूल्य हैं हाई। कोरोना का हुआ आगमन, ताली थाली से हुआ स्वागतम! पहले शर्माया, फिर पूरी तैयारी कर आया। अब कहर ढा रहा है, दिनों-दिन रूला रहा है। बढ़ी हुई है बेकारी, चहुंओर है मारामारी। युवाओं की है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *