सब मौन क्यों ?

सब मौन क्यों | Poem sab maun kyon

सब मौन क्यों ?

( Sab maun kyon )

***** 

गिरी जीडीपी! बढ़ी महंगाई,
डीजल पेट्रोल के मूल्य हैं हाई।
कोरोना का हुआ आगमन,
ताली थाली से हुआ स्वागतम!
पहले शर्माया,
फिर पूरी तैयारी कर आया।
अब कहर ढा रहा है,
दिनों-दिन रूला रहा है।
बढ़ी हुई है बेकारी,
चहुंओर है मारामारी।
युवाओं की है फौज बड़ी,
नहीं दिख रही कहीं नौकरी।
धरी रह गई सारी तैयारी,
अनिश्चित भविष्य देख बैठे हैं, हिम्मत हारी ।
जिनकी थी उनकी भी चली गई,
पग पग पर जनता छली गई।
रेल किराया हो गए दुगने,
जगह जगह लगीं हैं रूकने।
रसोई गैस ने चिंता बढ़ाई,
सीमा पर भी चल रही लड़ाई।
एक आफत चीन भी है भाई,
फिंगर 4 से 10 तक है आंख लगाई;
गलवान घाटी में हो चुकी लड़ाई।
हो रही अभी भी वहां छिटपुट हाथापाई,
हमारे 20 उनके 35 सैनिकों ने जान गंवाई।
पाकिस्तान की पूछो ही मत,
चींटी की बढ़ गई है हिम्मत।
नेपाल भी दिखा रहा है आंखें,
फिर भी नेता इधर उधर ही झांके।
वित्तमंत्री ने कह दिया एक्ट आॅफ गाॅड!
ईश्वर जानें कौन है फ्राॅड ?
कहां कहां लोचा है?
नोटबंदी, जीएसटी भी हमने देखा है;
सब कह रहे धोखा है , धोखा है!
टीवी वाले चिल्ला रहे सुशांत सुशांत,
फिर भी रिया नहीं हो रही शांत ।
टीवी पर आकर दिए इंटरव्यू,
रखे मीडिया के समक्ष अपने व्यू।
हम सबकी सुन रहे,
सबकी समझ रहे।
नहीं खोल रहे अपना मुखरा,
भीतर ही भीतर छुपा रहे सब अपना दुखड़ा।
लाॅकडाउन ने भी किया कमाल,
कुछ तो हुए मालामाल;
बाकी हो गए हैं कंगाल।
कुछ बाढ़ में घिरे हैं,
कुछ औंधे मुंह पड़े हैं।
बढ़ी है अपराधियों की सनक,
काम न आवे पुलिसिया हनक।
ऊपर तक पहुंच है भाई,
तो डरने की जरूरत नहीं है साईं।
कुछ अपने हिस्से की ले किए आंखें बंद,
तमाशा देख, मुस्करा रहे मंद मंद।
बचे हैं बहुत थोड़े चंद,
जो देश को लेकर हैं फिक्रमंद।
उन्हीं से होप है,
बाकी सब बिना बारूद के तोप है।
कमर तो जनता की है टूटी,
सुहा नहीं रहे किसी को कौड़ी फूटी।
नेतागण चुनाव में हैं जुटे,
अपनी नेतागिरी चमका रहे।
अगले 5 साल का भी प्रबंध कर ही लें,
क्या पता फिर कुर्सी मिले न मिले ?
वे दशकों से लूट रहे हैं, आगे भी लुटेंगे,
आवश्यकतानुसार कूटेंगे।
जबतक एकजुट न हो हम जुटेंगे,
सब हमें लुटेंगे, कूटेंगे।
बोलना पड़ेगा हल्ला बोल,
ऐ जनता! अब तो आंखें खोल।
जबतक कुर्सी न होगी डांवाडोल,
तब तक बदलेगा न परिदृश्य होल।
जनता जनार्दन!
तू मुंह खोल, अब मुंह खोल!!
कब तक हम अपनी खाट पर लेटे रहेंगे?
वे हमारी कमजोरियों का लाभ लेते रहेंगे।
सब , सब जानते है,
एक-दूजे को पहचानते हैं।
हम भी , वो भी!
फिर भी सब हैं मौन,
पता नहीं सब क्यों हैं मौन?
आखिर इनके पीछे है कौन?
कहीं दुबई वाला तो नहीं है डॉन!
मुझे पता नहीं,पर सब हैं मौन,
खुदा जाने सब क्यों हैं मौन?
कब तक रहेंगे सब मौन?
चुप्पी तो तोड़नी पड़ेगी!
तभी कुछ होगा!
वरना यूं ही सब नष्ट होगा।

?

नवाब मंजूर

लेखक– मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें :

अनलाॅक 4.0 | Kavita unlock 4.0

 

Similar Posts

  • Kavita | गजगामिनी

    गजगामिनी ( Gajagamini )   मन पर मेरे मन रख दो तो,मन की बात बताऊं। बिना  तेरा  मै  नाम  लिए ही, सारी बात बताऊं। महफिल में कुछ मेरे तो कुछ,तेरे चाहने वाले है, तेरे बिन ना कटते दिन, हर रात की बात बताऊं।   संगेमरमर  पर  छेनी  की,  ऐसी  धार ना देखी। मूरत जैसे सुन्दर…

  • तारों की महफ़िल | Kavita Taaron ki Mehfil

    तारों की महफ़िल ( Taaron ki Mehfil )   जब शाम होने को होती है एक एक तारा निकल आता है, ज्यों ज्यों रात की शुरुआत होती इनका झमघट हो जाता है। रात का नया पड़ाव ऐसे सजाती तारें जैसे रोज दिवाली है, दीपों जैसी सुन्दरता इठलाती बलखाती रात सुहानी है। जब लेटा किसान मजदूर…

  • साथ तुम आ जाओ | Romantic Poetry In Hindi

    साथ तुम आ जाओ   ( Saath tum aa jao ) साथ आज तुम आ जाओ तो, संबल मुझको मिल जाए। जीवन  नैया डगमग डोले, उजड़ी बगिया खिल जाए।।   कंटक पथ है राह कठिन है, कैसे मंजिल पाऊंगा। हाय अकेला चला जा रहा, साथी किसे बनाऊंगा। फिर भी बढ़ता जाऊंगा, शायद किनारा मिल जाए।…

  • म्हानै बोलण दयो सरकार | Mhanai Bolan Dayo Sarkar

    म्हानै बोलण दयो सरकार ( राजस्थानी कविता )   म्हानै बोलण दयो सरकार, म्हारी भाषा राजस्थानी। बहवै मिसरी सी रसधार, जिकी दुनिया है दीवानी। म्हानै बोलण दयो सरकार ई माटी रो घणों रूतबो, म्हारी मायड़ राजस्थानी। रण बांकुरा जनम्या जठै, कूदी जौहर म राणी। तलवारां रो जोश जठै, गूंजै महाराणा री हूंकार। पन्ना रो बलिदान…

  • श्रुत स्तुति | सरस्वती वंदना

    श्रुत स्तुति ( सरस्वती वंदना ) वीतरागी सर्वज्ञ और हितोपदेशी जो तीर्थंकर हैं,अष्ट कर्मों और अठारह दोषों से रहित जिनेश्वर हैं,अनंत चतुष्टय के धारी हैं अनंत कैवल्य ज्ञानी हैं,ऐसे त्रिकालदर्शी जिनमुख से झरती वाणी श्रेयस्कर है!! सरस्वती कहो या श्रुतमाता एक दूजे के पर्याय कहाएं,जैन धर्म में देव शास्त्र गुरु भव्य जनों को मोक्षमार्ग दिखाएं…

  • अवशेषी पुस्तिका | Avsheshi Pustika

    अवशेषी पुस्तिका ( Avsheshi Pustika )   ना सारांश ना ही उद्धरण; ना प्रतिमान ना ही प्रतिच्छाया छोटी सी स्मृति भरी अशुद्ध संवेदी अवधारणा हूँ… अप्रचलित परिच्छेदों; त्रुटियों से पूर्ण परित्यक्ता कही जाने वाली अधुरी सी गूढ़ कहानी हूँ… मेरे घटिया शब्दों के प्रत्युत्तर में तुम्हारी सभ्य खामोशी के अर्थ ढूँढने की कोशिश करती सस्ती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *