Swagat hai Nav Varsh

स्वागत है नववर्ष तुम्हारा | Swagat hai Nav Varsh

स्वागत है नववर्ष तुम्हारा

( Swagat hai nav varsh tumhara ) 

( 2 )

स्वागत है नव – वर्ष तुम्हारा !
आओ दूर करो अन्धियारा!
आकर यह संसार बना दो
फिर से सुन्दर प्यारा प्यारा !

गाव शहर के सब घर आँगन
गलियाँ , चौबारै , झोपड़ियाँ
करते बैठे सतत प्रतीक्षा
तुम आओ तो शायद पूरी
हो पाये युग युग से चलती
व्याकुलजन की कठिनपरीक्षा
हर इक प्यासे खेत गाँव तक
पहुँचे गंगा – यमुना धारा !
स्वागत है नव – वर्ष तुम्हारा !

जाने कितने बेचारों को
उनकी अपनी कठिन तपस्या
के वरदान अभी मिलने हैं
शान्ति दूत जो भटक गये हैं
दुनिया के मरुथल में उनको
नखलिस्तान अभी मिलने हैं
परिणामों के महल बनायें
विश्वासों का मिट्टी गारा !
स्वागत है नव- वर्ष तुम्हारा !

उड़ने से लाचार खड़े हैं
घायल पंख पखेरू बन कर
कितनी ही आँखों के सपने
उत्साहों अनुरागों का वह
मरहम उन्हें लगादो आकर
वरदायी हाथों से अपने
अन्धियारे “आकाश” में उगे
अब फिर नया भोर का तारा !
स्वागत है नव – वर्ष तुम्हारा !

 

Manohar Chube

कवि : मनोहर चौबे “आकाश”

19 / A पावन भूमि ,
शक्ति नगर , जबलपुर .
482 001

( मध्य प्रदेश )


( 1) 

नवल आस से है सजा सपनों का संसार।
अभिनंदन है नववर्ष घट घट बरसे प्यार।
स्वागत करते बारंबार स्वागत करते बारंबार।

नई सोच ले नई उमंगे उमड़े भाव भरी रसधार।
होठों पर मुस्कान मधुर हो खुशियों भरा संसार।
मन की कलियां खिले महके गुलशन गुलजार।
अभिनंदन की शुभ बेला में नववर्ष करे सत्कार।
स्वागत करते बारंबार,स्वागत करते बारंबार।

आशाओं के दीप तुम हो पावन गंगा जलधार।
हर्ष खुशी आनंद मधुर दिलों का उमड़ता प्यार।
जीवन अनमोल मोती सुख आनंद भरा भंडार।
उन्नति का सोपान बन प्रेम की मधुर फुहार।
स्वागत करते बारंबार स्वागत करते बारंबार।

अंधकार में उजियारा फुलझडियों की बहार।
हंसी तराने गीत सुहाने बोल मधुर सदाबहार।
प्यार की सरिता बनकर बन जाओ जलधार।
महकते रहे आंगन सारे फुलवारी में सदाचार।
स्वागत करते बारंबार स्वागत करते बारंबार।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

संगत | Sangat par chhand

 

Similar Posts

  • लड़ाई लंबी है | Poem in Hindi on Ghaza War

    लड़ाई लंबी है ! ( Ladai lambi hai )    हुई मानवता तार-तार,लड़ाई लंबी है, नाच रही है मौत, लड़ाई लंबी है। एटम-बम बना खिलौना कुछ लोगों का, द्वार चक्रव्यूह तोड़,लड़ाई लंबी है। नभ,जल,थल से न बरसेंगे फूल कोई, लहू से सने हैं हाथ,, लड़ाई लंबी है। महंगाई,बेकारी पर किसी का ध्यान नहीं, बदलेगा भूगोल,लड़ाई…

  • आपसे सर्वस्व मेरा | Aapse Sarvasya Mera

    आपसे सर्वस्व मेरा ( Aapse Sarvasya Mera ) आप सर्वस्व मेरे,आपके श्री चरणों में मेरा सर्वस्व अर्पण है।आप मेरे प्राण के प्राण,आप मेरे प्राण धन हैं।आपके श्री चरणों में मेरा सर्वस्व अर्पण है। हे प्राणनाथ, मेरे प्राणेश्वर!बलिहारी नित मैं आप पर।आपका श्री चरण मेरा घर।चरण कमल का भौंरा यह मन है।आप मेरे प्राण के प्राण,आप…

  • महामारी | Kavita

    महामारी ( Mahamari )   विकट समय में आज परीक्षा मानवता के नाम की चंद  सांसों  का  खेल  सारा संपदा किस काम की भूखे को भोजन मिल जाए क्या करना भंडार का अच्छे कर्मों की चर्चा चलती कहना है संसार का रोगी को दवा और सेवा मिल जाए अच्छी बात मानवता  अब गर्त में सोई…

  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर | Poem Dr. Bhimrao Ambedkar

    डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ( Dr. Bhimrao Ambedkar )   संविधान निर्माता नमन वंदन हे राष्ट्र रतन भारत पंचशील सिद्धांत अपनाया बौद्ध धर्म में हुये रत   समानता भाईचारा मानवतावाद के पथ प्रदर्शक छुआछूत मिटाने का प्रचार प्रसार किया भरसक   पत्रकार संपादक बने कलम के सजग सिपाही समता समाचार निकाला पक्षधर दीन ए इलाही  …

  • Poem in Hindi on Lekhni | लेखनी

    लेखनी ( Lekhni )    जाती ही नही लेखनी कल्पना के लोक मे कैसे करूं श्रृंगार,समय के इस वियोग मे खमोशभाईं बच्चे,बेटियां भी हैं सहमी हुई अधरों पर आए हंसी कैसे,अपनों के शोक मे सुना था की ,देश को मिल गई है आजादी पर,हुए हैं आज़ाद कौन इस मुल्क में सिसक रही झोपड़ी,आज भी महलों…

  • बसंत पंचमी | Basant Panchami

    बसंत पंचमी ( Basant Panchami )   ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ हो जाये हमारा जीवन साकार ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ चहुँ और हो बसंत जैसी बहार जीवन बने सदैव सुखकार रहे निरामय हमारे विचार ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ निर्लिप्तता से जीवन जिये भार मुक्त हम खुद…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *