खंजर

खंजर

खंजर

**

 

नरम  पत्तों  के  शाख से हम भी बहुत ही कोमल थे पर।
है छीला लोगो ने यू बार-बार की अब हम,खंजर से हो गये।

 

**
जिसे  ही  माना  अपना  उसने  ही  आजमाया  इतना।
कि शेर हृदय के कोमल भाव भी सूख के,पिंजर से हो गये।

 

**
मिट  गये  भाव  सुधा  सरिता  सूखी  है  हृदय पटल की।
सच है ये बात की अबकी शेर का मन भी,बंजर से हो  गये।

 

**
शिकायत क्यों किससे और बार- बार ये आँसू ना अब।
जो  बोला  जैसा  जिसने  साथ उसी से, मंजर से हो गये।

 

**
मिटा  दी  मोह  लोभ  अब  लोगो  की  बातों मे  पडना।
अब शेर  भी तन और मन से, पार्थ धनुर्धर हो गये।
**

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

 

यह भी पढ़ें : 

Hindi kavita | Hindi Diwas Poem -और हिन्दी

Similar Posts

  • याद रहेगा | Kavita Yaad Rahega

    याद रहेगा ( Yaad Rahega )   गुजर जायेगा ये वक्त मगर,याद रहेगा। कहर ढाहती वबा का असर,याद रहेगा। आलम  ये बेबसी का, यह मौत का मंजर, सितम गर बना है सारा शहर,याद रहेगा। अपना है दोष या के,साहब की ग़लतियां। संसार  को  सब  कोर कसर,याद रहेगा। लुका-छिपी का मौत से है खेल तभी तक,…

  • शिक्षा उपवन | Shiksha Upvan

    शिक्षा उपवन ( Shiksha upvan )    सुसंस्कारों के सौरभ से, शिक्षा उपवन महकता रहे ज्ञान सहज अवबोध , प्रयोग व्यवहार धरातल । निर्माण आदर्श चरित्र, भविष्य सदा उज्ज्वल । आत्म सात कर नूतन, पुरात्तन भाव चहकता रहे सुसंस्कारों के सौरभ से, शिक्षा उपवन महकता रहे ।। शिक्षण अधिगम ज्योत, दिव्यता अप्रतिम प्रसरण । तन…

  • लौट आओ ना | Laut Aao Na

    लौट आओ ना ( Laut Aao Na ) हर आहट पे दिल को सुकून सा आता है, तेरी यादों में अब भी दर्द जगमगाता है। लौट आओ ना, ये दिल बस यही पुकार करे, तुझ बिन हर एक लम्हा बस खाली सा रह जाता है। हर ख्वाब में तुम ही हो, हर बात में तेरा…

  • मनभावन है हिंदी | Manbhavan hai Hindi

    मनभावन है हिंदी ( Manbhavan hai Hindi )    हिंदी है हमारी शान स्वाभिमान अभिमान गागर में सागर का भाव ये जागती है। पावन है हिंदी मनभावन है हिंदी संस्कृत की बेटी ये अज्ञान हटाती है। धूमिल ना होय छबि नेकभाषा हिंदी मेरी हिंग्लिश चाल चले,रूप मिटाती है। शब्दों की खान है दिनकर सा भान…

  • नव वर्ष 2025 | New Year 2025

    नव वर्ष नव वर्ष की वैला में हमें खुद को सँभालना हैं ।अन्तर की शुद्धि कर आत्मा को धोना हैं । इस जग के जाल में हमको नहीं फँसना है ।नव वर्ष की वैला में हमें खुद को सँभालना हैं । राग – द्वेष के भावों को दिल से निकालना हैं ।धर्म के रस का…

  • जिनसे अब तक सुना दुश्मनी हो गई

    जिनसे अब तक सुना दुश्मनी हो गई जिनसे अब तक सुना दुश्मनी हो गईकह रहे अब वही दोस्ती हो गई बात देखो बहुत ये बड़ी हो गईक्यों नबाबी नगर गोमती हो गई माँ-पिता से मिला आज आशीष तोदूर जीवन की सब बेबसी हो गई घर कदम क्या पड़े आज सरकार केहर तरफ़ अब यहाँ रोशनी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *